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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Ram Mandir Ayodhya construction News Update work artisan said - I do not wish to go home.

Ram Mandir : राम काज कीन्हे बिनु मोहि कहां विश्राम, कारीगर बोले- घर जाने की नहीं होती है इच्छा

Mon, 15 Jan 2024 02:25 PM IST
विनोद सिंह मशाहिद अब्बास, प्रयागराज
मशाहिद अब्बास, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 15 Jan 2024 02:25 PM IST
सार

अयोध्या के श्रीरामलला मंदिर के निर्माण में लगे कारीगरों में अजीब उत्साह और उर्जा का संचार देखा जा रहा है। कारीगरों का कहना है कि वह उन्हें घर जाने का मन ही नहीं करता। यह वक्त उनके जीवन का सबसे स्वर्णिम समय है। यह सौभाग्य से उन्हें प्राप्त हुआ है। 

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Ram Mandir Ayodhya construction News Update work artisan said - I do not wish to go home.
अयोध्या राम मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

यह प्रभु राम की महिमा ही है, जो हमें मंदिर निर्माण में काम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसमें अपना योगदान देना अद्भुत तथा अकल्पनीय है। यही नहीं राम मंदिर निर्माण कार्य से जुड़े प्रयागराज के कारीगरों ने कहा, इसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। हम लोगों का घर जाने का मन भी नहीं करता। अब तो बस इतना ही कहना है कि राम काज कीन्हे बिनु मोहि कहां विश्राम।

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कारीगर कहते हैं, इस पल को पूरे जीवन कभी भी नहीं भूल सकेंगे। वह बहुत भाग्यशाली है, जिसका भगवान राम ने अपने मंदिर निर्माण कार्य में योगदान लिया है।कोरांव के बड़ोखर के धनंजय पांडेय मुंबई की एक निजी कंपनी में काम करते हैं। उन्होंने हैदराबाद, मुंबई, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी काम किया है। धनंजय राम मंदिर में बीते 16 महीनों से बतौर सुपरवाइजर काम कर रहे हैं। कहते हैं, यहां काम करके जो खुशी मिल रही है, उससे बढ़कर खुशी की बात यह है कि परिवार भी यहां पर आ चुका है। हमारे घर लोग राम मंदिर की भव्यता सुनने को कतार लगाए रहते हैं। रामकाज में इतना आनंद आ रहा है कि वापस जाने का मन ही नहीं करता।

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अयोध्या राम मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।

राम मंदिर में काम करने का मौका मिलना सौभाग्य की बात

धनंजय बोले, दुर्घटना हो गई थी। घर पर आराम कर रहे थे, इसी दौरान राम मंदिर में काम करने के लिए फोन आया। यह सुनकर पिता रामकैलाश पांडेय खुशी से झूम उठे थे। फौरन जाने के लिए कह दिया था। तभी से मैं यहां आ गया। यहां कोई भी पैसे या पेशे के लिए काम नहीं कर रहा, सभी भक्ति भाव से काम कर रहे हैं। इस समय ऐसा लग रहा है जैसे अयोध्या के हर घर में शादी हो। पूरा अयोध्या सज रही है।

बड़ोखर के ही रूद्रपति गौतम मंदिर में शटरिंग का काम कर रहे हैं। बताते हैं, मंदिर में काम करने का अलग एहसास है। काम करते समय लोग जब तब रामभजन गुनगुनाने लगते हैं। किसी के गले में रामनामी होती है, तो किसी के कंधे पर राम नाम का गमछा। दिन भर की थकान और मंदिर परिसर में उठ रहे धूल के बावजूद काम करने के लिए लगातार प्रोत्साहित करते रहते हैं। हाथ में औजार लिए हर मजदूर यह चाहता है कि वह मंदिर के निर्माण में ज्यादा से ज्यादा योगदान दें।

दिन रात एक करके करते हैं मंदिर के लिए काम

मंदिर में कंट्रोल रूम सुपरवाइजर की जिम्मेदारी निभा रहे मांडा के सिरसा गांव के अशोक सिंह और भुंडा, करछना के शुभम पांडेय ने बताया कि दिन भर मंदिर निर्माण का काम करते हैं। रात में जब सोते हैं तो भी मंदिर के बारे में ही सोचते रहते हैं। आखिर हो भी क्यों न, जिस मंदिर की एक झलक पाने के लिए पूरी दुनिया का हर रामभक्त तरस रहा है। हम चौबीस घंटे उसी मंदिर परिसर में होते हैं। परिवारवालों को हम पर गर्व है। इससे बढ़कर और क्या हो सकता है। प्रभु के नाम से जीवन और आजीविका दोनों है।

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मुस्लिम कारीगरों ने भी दिया है योगदान

कोरांव के बड़ोखर व आसपास के क्षेत्र से करीब दर्जन भर मुस्लिम कारीगर भी अयोध्या जा चुके हैं। पत्थर को तराशने व नक्काशियों का काम करने वाले असलम व निजाम वर्ष 2019 से ही अयोध्या में काम कर रहे हैं। मेजा और कोरांव क्षेत्र में बने स्थानीय मंदिरों में भी पत्थर पर नक्काशी का काम निजाम व असलम कर चुके हैं। निजाम के पिता कल्लू ने बताया, हमें जात-मजहब से कोई लेना-देना नहीं है। हमारे लिए हमारा काम महत्वपूर्ण है। गांव में भी तो सबकी सुबह राम-राम से होती है। यह खुशी की बात है कि बेटा, मंदिर निर्माण का हिस्सा है। इससे देश में भाईचारे और एकता का संदेश जाएगा।

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