राम मंदिर : प्रतापगढ़ के 1410 रामभक्तों ने लिखे तकरीबन 10 करोड़ 19 लाख रामनाम
राम नाम की यह पूंजी प्रभु श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा उत्सव के बाद अयोध्या में जमा की जाएगी। रामभक्तों ने करीब 9,270 पुस्तिकाओं में तकरीबन 10 करोड़ 19 लाख राम नाम लिखकर श्रीराम लेखन बैंक में जमा किए हैं।
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कलियुग केवल नाम अधारा ...। भव सागर से बेड़ा पार लगाने का यह सूत्र रामचरितमानस में संत तुलसीदास ने दिया है। जिले के 1410 राम भक्तों ने जीवन कल्याण के लिए विवेक नगर स्थित अंंतरराष्ट्रीय श्रीराम लेखन बैंक में अपनी राम नाम की पूंजी जमा की है।
राम नाम की यह पूंजी प्रभु श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा उत्सव के बाद अयोध्या में जमा की जाएगी। रामभक्तों ने करीब 9,270 पुस्तिकाओं में तकरीबन 10 करोड़ 19 लाख राम नाम लिखकर श्रीराम लेखन बैंक में जमा किए हैं।
बता दें, बैंक की ओर से प्रयागराज और लखनऊ से प्रकाशित यह पुस्तिका रामभक्तों को नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। इसमें लाल रंग की स्याही से राम नाम लिखा जाता है। बैंक की ओर से राम भक्तों को स्याही भी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है।भक्तों से पुस्तिकाएं प्राप्त होने के बाद उसे लाल रंग के कपड़े से बांध कर रखा जाता है। वर्ष 2011 से अब तक करीब 9270 पुस्तिकाओं जमा की गईं। इसमें एक अरब 18 करोड़ राम नाम अंकित हैं। बैंक के प्रबंधक आचार्य अमित शुक्ला कहते हैं, यह पुस्तिकाएं भगवान राम के प्राण प्रतिष्ठा उत्सव के बाद अयोध्या में जमा की जाएंगीं।
मान्यता है कि बैंक में राम नाम की पुस्तिकाएं जमा करने वालों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। वर्ष 2011 में बैंक की स्थापना के बाद कुल दस सदस्य जुड़े। धीरे-धीरे इसके प्रति लोगों में आस्था बढ़ती गई, जिसकी वजह से अब सदस्यों की संख्या 1410 तक पहुंच गई है। बैंक की ओर से सदस्यों को उपलब्ध कराई गई पासबुक में उनकी ओर से लिखे गए राम नाम की संख्या अंकित की जाती है। इसके साथ बैंक का रिकॉर्ड भी अलग से तैयार किया जाता है। इसमें सभी सदस्यों के पंजीकरण के साथ उनके द्वारा लिखे गए राम नाम की संख्या दर्ज की जाती है। बैंक का प्रधान कार्यालय श्री अयोध्यापुरी में है।
बैक सदस्यों के बोल
राम नाम लिखने का बोनस सदस्यों को भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा के रूप में मिलने जा रहा है। 65 पुस्तिकाओं पर राम नाम लिख चुका हूं। पुस्तिकाएं प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में जमा की जाएंगीं। - आचार्य अमित शुक्ला, बैंक प्रबंधक
बैंक की शुरुआत में ही सदस्य बना। अब तक 42 पुस्तिकाओं पर राम नाम लिख चुका हूं। यह पुस्तिकाएं जब भगवान राम के चरणों में अयोध्या में जमा होंगी तो मुझे बहुत प्रसन्न्ता होगी। - अनिरुद्ध मिश्र
वर्ष 2021 से राम नाम की पुस्तिकाओं को लिखना शुरू किया। पिताजी को भी पुस्तिकाएं दे रखी हैं। समय मिलने पर वह भी राम नाम लिखते हैं। मेरे घर से 12 पुस्तिकाएं बैंक में जमा की जा चुकी हैं। - विजय कुमार वैश्य
राम नाम का सुमिरन और लेखन एक ही समान है। लिखने में व्यक्ति मौन होकर प्रभु का स्मरण करता है। राम नाम अंकित करते समय आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है। राम नाम की 38 पुस्तिकाएं लिख चुका हूं। - देवशरण तिवारी