फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Ram in art: Lohia advised Maqbool Fida Hussain to paint Ramayana

कला में राम : लोहिया ने मकबूल फिदा हुसैन को रामायण चित्रित करने की दी थी सलाह

Fri, 12 Jan 2024 03:05 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 12 Jan 2024 03:05 PM IST
सार

राम एवं रामकथा के अनेक संदर्भों पर अपने स्कूल खत्री पाठशाला से लेकर पजावा और पथरचट्टी के दलों के लिए अनेक चौकियां मैंने बनाई और पेंट की है। प्रयाग में आयोजित होने वाली रेलवे की रामलीला में सुप्रसिद्ध कलाकार जगरूपन सिंह के साथ रूप-सज्जा और सेट डिजाइन भी किया।

विज्ञापन
Ram in art: Lohia advised Maqbool Fida Hussain to paint Ramayana
amarujala - फोटो : amarujala

विस्तार

का गुरु....कस गुरु.... की नगरी प्रयागराज में राम-राम गुरु, जै राम के संबोधन को सुन-सुन कर मैं बड़ा हुआ। राम और राम दरबार को अनेक बार पेंट किया, कभी रामलीला के पर्दों पर, कभी दशहरे की चौकियों में। इलाहाबादी दशहरे का भी अपना अलग ही शगल है और पुराने शहर में पजावा और पथरचट्टी के रामदल की चौकियों को देखने का अपना सुख। उससे जुड़ना तो गौरव की बात होती है यहां।

विज्ञापन


राम एवं रामकथा के अनेक संदर्भों पर अपने स्कूल खत्री पाठशाला से लेकर पजावा और पथरचट्टी के दलों के लिए अनेक चौकियां मैंने बनाई और पेंट की है। प्रयाग में आयोजित होने वाली रेलवे की रामलीला में सुप्रसिद्ध कलाकार जगरूपन सिंह के साथ रूप-सज्जा और सेट डिजाइन भी किया। अनगिनत झांकियां बनाई। कल्याणी देवी पार्क में आयोजित होने वाले नव संवत्सर के मानस प्रवचनों में राम दरबार भी बनाया।
विज्ञापन


रामकथा को पढ़ा - रामचरितमानस में, रामकथा को सुना - प्रवचनों और सत्संगों में, राम को देखा और पहचाना। गीता प्रेस के छपे हुए रंगीन पन्नों पर, राम नाम सत्य है.... को अनगिनत बार शवयात्रा में सुना, लेकिन रामकथा को वैचारिक रूप से समझा और जाना उमाकांत मालवीय की पुस्तक- ''राघव राग'' से।

विज्ञापन
विज्ञापन
Trending Videos

कला के अध्ययन के दौरान मैंने रामकथा में राम की छवियों को लगभग हर भारतीय कला शैलियों में पाया। राजस्थानी, कोटा, बूंदी, चंबा, गुलेर, मालवा, कांगड़ा, जोधपुर, पहाड़ी शैली, बंगाल की कालीघाट शैली, उड़ीसा पटचित्र शैली, लोक प्रसिद्ध मधुबनी शैली में राम और राम कथा के अनेक स्वरूप हमें मिलते हैं। इन लघुचित्रों एवं लोक शैलियों के चित्रों में राम के विविध रूप हमें प्राप्त होते हैं, जो अपनी शैलीगत विशेषताओं के कारण विश्वप्रसिद्ध हैं।

रामकथा राजस्थानी, पहाड़ी, और बंगाल के कलाकारों का पसंदीदा विषय रहा है, जिसमें कल्पना की प्रचुरता है और जिससे भरतीय कलाकार सदैव आकर्षित भी होते रहे। पांचवीं शताब्दी के मध्य में उत्तर भारत के देवगढ़ के मंदिरों की मूर्तियों में भी विष्णु के अवतारों के दिव्य स्वरूप का अंकन हमें देखने को मिलता है, जिसमें राम सबसे ज्यादा लोकप्रिय हुए।

25 करोड़ की आबादी वाला मुस्लिम देश इंडोनेशिया, एकमात्र ऐसा देश है, जहां भगवान राम और रामायण को पूजा जाता है। 1673 में अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन का आयोजन पहली बार इंडोनेशिया ने ही किया। यहां देन पिसार, बाली स्थित भगवान राम की विशाल मूर्ति विश्व प्रसिद्ध है। मसलन ऐसा नायक जिसका नायकत्व देश-दुनिया में स्वीकार किया गया।

जब स्वतंत्र भारत के संविधान का लेखन संविधान सभा में अपने अंतिम चरण में था तब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अंतिम मसौदा पारित होने के तुरंत बाद संविधान की मूल प्रति के लिए शांति निकेतन के प्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बोस को अधिकृत किया गया। भारतीय संविधान का भाग तृतीय, जो हमारे मौलिक अधिकारों का वर्णन करता है, उसमें श्रीराम, सीता और लक्ष्मण का एक चित्र अंकित है। यहां यह समझना महत्वपूर्ण है कि इस भाग के लिए श्रीराम की छवि ही सबसे उपयुक्त विकल्प क्यों है।

आधुनिक एवं समकालीन कला में भी राम एवं रामकथा से संबंधित बहुतायत में चित्रांकन किया गया है। महाराष्ट्र के सुप्रसिद्ध चित्रकार सुभाष बाहुलकर ने चित्रकूट में अपने सहयोगियों के साथ रामकथा पर आधारित चित्र और मूर्तियों की विशिष्ट और अद्भुत शृंखला ''राम-दर्शन'' नामक वीथिका का सृजन किया है, जो भारत की उन्नत एवं परिमार्जित चित्र एवं शिल्प शैली का अनुपम उदाहरण है।

सुप्रसिद्ध चित्रकार एमएफ हुसैन ने भी रामायण शृंखला पर बेमिसाल कार्य किया है। एमएफ हुसैन की रामायण शृंखला के साथ एक वाकया डॉ. राम मनोहर लोहिया से जुड़ा है। बात 20वीं सदी के पांचवें दशक की है। हैदराबाद के मोती भवन में डॉ. राम मनोहर लोहिया एक कार्यक्रम के सिलसिले में पधारे थे, वहीं युवा एमएफ हुसैन पूरे दृश्य का रेखाकंन कर रहे थे।

हुसैन ने अपने चित्र डॉ. लोहिया को दिखाया, जिसे देख वह अभिभूत हो गए और हुसैन को गले लगा कर दिल्ली में मिलने का न्योता दिया। दिल्ली में दोनों की मुलाकात जामा मस्जिद के पास करीम होटल में हुई। अनेक संदर्भों पर चर्चा के उपरांत हुसैन की पीठ थपथपाते हुए डॉ. लोहिया ने कहा कि ''टाटा-बिड़ला के ड्राइंग रूम में लटकने वाली तस्वीरों से बाहर निकलो और रामायण पेंट करो, क्योंकि आर्ट गैलरी की तस्वीरें लोग पतलून में हाथ डाल कर देखते हैं, लेकिन रामायण की तस्वीरों में लोग घुल-मिल जाते हैं।''

इस मुलाकात के बाद वर्षों तक हुसैन ने गांव और शहर की रामलीला के पात्रों का अध्ययन किया और बेमिसाल रामायण शृंखला सृजित की। डॉ. राम मनोहर लोहिया के निधन के बाद हुसैन ने उनकी स्मृति में हैदराबाद के मोती भवन को रामायण आधारित अनेक चित्रों से निःशुल्क सुसज्जित किया।

यह सच है कि रामकथा धार्मिकता की एक मनमोहक कहानी है। मानवीय सरोकारों की छवि है, जिसमें सामाजिक नैतिकता और मानवीयता के वह सारे प्रतिमान उपस्थित हैं। रामकथा और राम का जीवन चरित समाज में नैतिकता, राजत्व और देवत्व की प्रकृति की जांच करने के लिए एक दार्शनिक आधार प्रदान करती है। श्रीराम की छवि निराली है- प्रेम, शौर्य, सेवा और मर्यादा के प्रतीक राम, अपने-अपने राम, राम अनुभूति का विषय हैं जो दर्शक की अनुभूति में स्वतः ही समा जाती है। - अजय जैतली, प्रोफेसर/हेड, दृश्यकला विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed