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Delhi : प्राण प्रतिष्ठा पर राममय होगी लुटियन की दिल्ली, 22 जनवरी को लाइव होगा अयोध्या का उत्सव
Sat, 20 Jan 2024 05:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 20 Jan 2024 05:48 AM IST
सार
एनडीएमसी कनाॅट प्लेस समेत विभिन्न स्थानों पर लगीं एलईडी स्क्रीन पर कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दिखाएगी। इसके अलावा वह प्रमुख चौराहों पर फूलों से मंदिर की बनी कलाकृति के बोर्ड लगाएगी और अपनी सभी बिल्डिंगों को रोशनी से जगमग करेगी।
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पुराने किले पर रौनक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लुटियन की दिल्ली में 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का लाइव होगा। एनडीएमसी कनाॅट प्लेस समेत विभिन्न स्थानों पर लगीं एलईडी स्क्रीन पर कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दिखाएगी। इसके अलावा वह प्रमुख चौराहों पर फूलों से मंदिर की बनी कलाकृति के बोर्ड लगाएगी और अपनी सभी बिल्डिंगों को रोशनी से जगमग करेगी। लिहाजा उसने प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को राष्ट्रीय व धार्मिक पर्व की तरह मनाने का निर्णय लिया है।
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एनडीएमसी के उपाध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि 22 जनवरी को लुटियन की दिल्ली राममय होगी। एनडीएमसी की बिल्डिंग ही नहीं, सभी मार्केट रोशनी से जगमग होंगी। सरकारी बिल्डिंगों, मार्केटों व होटलों पर रोशनी की जाएगी और दीप जलाए जाएंगे। खान मार्केट, खन्ना मार्केट, कनॉट प्लेस, किदवई नगर, पंडारा रोड, शंकर मार्केट, पालिका बाजार और लोधी रोड सहित एनडीएमसी क्षेत्र की मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन बड़े धूमधाम के साथ उत्सव में शामिल होंगी।
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खान मार्किट में रथ शोभा यात्रा, वृंदावन की टीम 24 घंटे का संकीर्तन और झंडे, स्टिकर और दीयों के साथ विस्तृत सजावट की जाएगी। खान मार्केट ट्रेडर्स द्वारा सुंदरकांड पाठ और 2000 लोगों के लिए भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जबकि कनॉट प्लेस ट्रेडर्स 125,000 दीये जलाएगी, सी ब्लॉक में एक विशेष पूजा आयोजित करने और पूरे बाजार में झंडे और बैनर प्रदर्शित करने की योजना बनाई जा रही है। यहां पर 11 किलोग्राम के एक लड्डू का प्रसाद बांटा जाएगा। वहीं कनाॅट प्लेस में एक दाना संस्था 21 हजार लड्डू बांटेगी और 21 सौ दीये जलाएगी ।
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भाजपा 40 हजार लोगों को कराएगी रामलला के दर्शन
अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद भी प्रदेश भाजपा ने राजधानी के माहौल को राममय बनाए रखने का निर्णय लिया है। इस कड़ी में वह करीब 40 हजार राजधानी निवासियों को रामलला के दर्शन कराएगी। प्रदेश भाजपा 29 जनवरी से 29 फरवरी तक 32 दिनों के भीतर 28 ट्रेनों से राजधानी सेे अयोध्या लेकर जाएगी। एक ट्रेन में 20 कोच होंगे। पहली ट्रेन 29 जनवरी को रवाना होगी। प्रदेश भाजपा ने रामलला के दर्शन करने के इच्छुक लोगों का चयन करने की जिम्मेदारी अपने सभी जिलों व मंडलों को दी है।
केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 22 जनवरी को हाफ-डे घोषित
अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह को देखते हुए केंद्रीय विश्वविद्यालयों में हाफ-डे घोषित किया गया है। इस दिन दोपहर ढाई बजे तक आईआईटी दिल्ली, जेएनयू, डीयू, जामिया मिलिया इस्लामिया, एनआईएफटी विश्वविद्यालय बंद रहेंगे। वहीं, आईपीयू व एयूडी ने कहा है कि राज्य सरकार की ओर से अभी इस तरह का आदेश नहीं आया है। ऐसे में सरकार के आदेश के अनुसार ही फैसला लिया जाएगा।
अपने-अपने राम : राम का शौर्य और धैर्य अनुकरणीय
भगवान राम (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Social media
मर्यादा पुरुषोत्तम राम की शख्सियत के अनंत आयाम हैं। इसमें से कुछ का चुनाव मेरे लिए बेहद मुश्किल है। फिर भी, रावण के साथ निर्णयाक युद्ध के पहले उन्होंने अपनी जिन आंतरिक शक्तियों का वर्णन किया, उसी रूप में राम मेरे सबसे करीब हैं।
मुझे मेरे राम का शौर्य और धैर्य पसंद है। सत्य और शील, बल और विवेक पसंद है। मुझे कई बार लगता है कि राम की तरह हमें भी अपनी आंतरिक शक्तियों पर भरोसा करना चाहिए। बाहरी संसाधनों की तुलना में आंतरिक शक्तियां सदैव महत्वपूर्ण साबित होती हैं।
हर तरह के साधनों से युक्त रावण को देखकर रणक्षेत्र में जब विभीषण शंकालु हुए तो मुसकराते हुए उन्होंने शौर्य और धैर्य को अपने रथ का पहिया बताया। सत्य और शील को पताका। बल व विवेक रथ के घोड़े हुए। क्षमा, कृपा और समता उसकी रस्सियां बनीं।
यही राम की अपनी आंतरिक शक्तियां थीं। इनका संधान करके राम ने रावण को शिकस्त दी। रामचरित मानस में राम खुद बताते हैं कि जिनके पास इस तरह का धर्ममय रथ हो, उसे संसार के किसी भी संग्राम में कोई भी शत्रु परास्त नहीं कर सकता है।
(प्रभु नारायण मिश्रा, मैनेजमेंट गुरु और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो. वीसी)
मुझे मेरे राम का शौर्य और धैर्य पसंद है। सत्य और शील, बल और विवेक पसंद है। मुझे कई बार लगता है कि राम की तरह हमें भी अपनी आंतरिक शक्तियों पर भरोसा करना चाहिए। बाहरी संसाधनों की तुलना में आंतरिक शक्तियां सदैव महत्वपूर्ण साबित होती हैं।
हर तरह के साधनों से युक्त रावण को देखकर रणक्षेत्र में जब विभीषण शंकालु हुए तो मुसकराते हुए उन्होंने शौर्य और धैर्य को अपने रथ का पहिया बताया। सत्य और शील को पताका। बल व विवेक रथ के घोड़े हुए। क्षमा, कृपा और समता उसकी रस्सियां बनीं।
यही राम की अपनी आंतरिक शक्तियां थीं। इनका संधान करके राम ने रावण को शिकस्त दी। रामचरित मानस में राम खुद बताते हैं कि जिनके पास इस तरह का धर्ममय रथ हो, उसे संसार के किसी भी संग्राम में कोई भी शत्रु परास्त नहीं कर सकता है।
(प्रभु नारायण मिश्रा, मैनेजमेंट गुरु और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो. वीसी)