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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Ayodhya Ram Mandir Two temples of Delhi were the main center for deciding the strategy

Ram Mandir: रणनीति तय करने का मुख्य केंद्र रहे दिल्ली के दो मंदिर, एक में विहिप, दूसरे में साधु-संत करते मंथन

Tue, 16 Jan 2024 01:51 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Tue, 16 Jan 2024 01:51 AM IST
सार

आरकेपुरम स्थित संकट मोचन आश्रम (मंदिर) में विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख अशोक सिंघल समेत तमाम पदाधिकारियों का जमावड़ा रहता था। दूसरी ओर आसफ अली रोड स्थित मंदिर श्रीराम हनुमान वाटिका में साधु संतों का डेरा रहता।

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Ayodhya Ram Mandir Two temples of Delhi were the main center for deciding the strategy
दिल्ली के मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भगवान राम के कभी भी दिल्ली आने के संबंध में कोई चिन्ह सामने नहीं आए हैं, लेकिन दिल्ली के दो मंदिर उनकी जन्म भूमि पर मंदिर बनाने की रणनीति तय करने के मुख्य केंद्र रहे। एक मंदिर में विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी रणनीति तैयार करते, जबकि दूसरे मंदिर में साधु संत मंथन करते थे। इस मंदिर में अनेक बार विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी भी साधु संतों से मिलने आते थे।

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आरकेपुरम स्थित संकट मोचन आश्रम (मंदिर) में विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख अशोक सिंघल समेत तमाम पदाधिकारियों का जमावड़ा रहता था। विहिप के संयुक्त महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा ने बताया कि सभी पदाधिकारी यहां पर अयोध्या में मंदिर बनवाने की रणनीति तय करने में जुटे रहते थे। उनके बीच कई-कई घंटे बैठकों का दौर चलता। वह यहां पर ही रहते थे। यहां उनके साथ हिंदू संगठनों के पदाधिकारी भी बैठक करने आते थे।
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दूसरी ओर आसफ अली रोड स्थित मंदिर श्रीराम हनुमान वाटिका में साधु संतों का डेरा रहता। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले अध्यक्ष बने महंत नृत्य गोपाल दास दिल्ली आने के दौरान यहां पर ही रुकते हैं। वह वर्ष 2003 में श्रीराम जन्म भूमि न्यास ट्रस्ट का अध्यक्ष बनने के बाद माह में एक-दो बार यहां पर आ रहे हैं। इस मंदिर के महंत श्रीरामकृष्ण दास महात्यागी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने से पहले वह जब भी यहां पर आते थे, तो साधु संतों के साथ मंदिर के निर्माण के संबंध में मंथन करते। यहां पर ही विहिप के पदाधिकारी उनसे मिलने आते थे। वह करीब चार साल पहले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का अध्यक्ष बनने के बाद सीधे इसी मंदिर में आए थे। इस मंदिर में वह जिस कमरे में रुकते हैं, उस कमरे को अन्य किसी के लिए नहीं खोला जाता है।

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