फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Ayodhya Ram Mandir Story of kar sevaks Was arrested on way to Ayodhya stayed in jail for a month

Ram Mandir: कूद पड़े थे राम मंदिर आंदोलन में... रास्ते में पुलिस ने कर लिया था गिरफ्तार; कार सेवकों की कहानी

Wed, 03 Jan 2024 11:42 AM IST
शाहरुख खान अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 03 Jan 2024 11:42 AM IST
सार

अलीगढ़ के बिजौली गांव के रहने वाले अशोक सिंघल के परिवार के भतीजे महाराणा प्रताप सिंघल ने कहा कि 1992 में दूसरी बार जब आंदोलन का ज्वार भाटा उठा तो फिर अपने आप को रोक नहीं पाए। अयोध्या जाते समय रास्ते में गिरफ्तार कर लिए गए थे। वो एक महीने जेल में रहे थे।

विज्ञापन
Ayodhya Ram Mandir Story of kar sevaks Was arrested on way to Ayodhya stayed in jail for a month
Ram Mandir - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिजौली की माटी में राम भक्ति की वो सुगंध है, जिसने पूरे देश में राम मंदिर आंदोलन की लहर पैदा कर दी थी। रामभक्त विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष रहे अशोक सिंघल बिजौली गांव के ही रहने वाले थे। राम मंदिर आंदोलन की ऐसी लहर पैदा की थी कि पूरे देश से एक ही आवाज आ रही थी। बच्चा-बच्चा राम का, जन्म भूमि के काम का।
विज्ञापन


1992 में दूसरी बार जब आंदोलन का ज्वार भाटा उठा तो फिर अशोक सिंघल के परिवार के भतीजे महाराणा प्रताप सिंघल भी अपने आप को रोक नहीं पाए। अपने गांव से अयोध्या के लिए कूच कर दिया। मगर, रास्ते में ही गिरफ्तार हो गए और एक महीने जेल में रहे। उन्हीं की जुबानी सुनते हैं आंदोलन की पूरी कहानी...
विज्ञापन


गांव बिजौली अतरौली तहसील के अंतर्गत आता है। मेरा सौभाग्य है कि मेरे चाचा अशोक सिंघल राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार रहे। इसलिए उनका गांव में अक्सर आना रहता था। 1990 में जब अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के लिए लाखों की संख्या में कारसेवक पहुंचे थे तो मुलायम सिंह यादव की सरकार में राम भक्तों पर गोली चलवा दी गई थी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


उसके बाद दिसंबर 1992 में एक बार फिर राम मंदिर आंदोलन के लिए पूरे देश भर में हुंकार भरी गई। फिर लाखों की संख्या में राम भक्त कारसेवक अयोध्या पहुंचने लगे। मेरी उम्र उस समय करीब 32 साल थी। चूंकि चाचा देश ही नहीं पूरी दुनिया में चर्चित हो गए थे। इसलिए राम मंदिर के नाम पर मेरा भी खून उबाल दे गया।
 

1992 में छह दिसंबर से पहले ही मैं करीब चार-पांच कारसेवक के साथ अयोध्या के लिए कूच कर गया। मगर एलआईयू की नजर सबसे अधिक मेरे परिवार पर थी। इसलिए अलीगढ़ पहुंचने से पहले मुझे और मेरे साथ जो कारसेवक थे, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पहले हम लोगों को नुमाइश मैदान स्थित कृष्णाजंलि लाया गया। यहां करीब पांच घंटे बैठाए रखा गया। फिर यहां से जेल में डाल दिया गया।

एक महीने था जेल में, सबसे अधिक मुझ पर थी नजर

अलीगढ़ में मुझे करीब एक महीने जेल में रखा गया। क्योंकि अशोक सिंघल के परिवार से मैं था तो इसलिए सबसे अधिक नजर मेरे ऊपर ही रखी जा रही थी। इसी बीच छह दिसंबर को अयोध्या में विवादित ढांचा गिरा दिया गया। इसके बाद मेरे ऊपर और सख्ती कर दी गई। मगर जेल में रहकर हम लोग राम मंदिर से जुड़े गीत गाते रहे। प्रतिदिन शाम को राम कीर्तन किया करते थे। 
 

हम लोगों की देखकर जेल के कुछ कैदी भी भजन कीर्तन में शामिल हो जाते थे। वो लोग चर्चा करते थे कि कम से कम तुम लोग राम मंदिर के लिए जेल में आए हो। उस समय हम लोगों में राम मंदिर के प्रति इतनी अगाध आस्था थी कि जेल आदि का कोई डर नहीं था। मेरा सौभाग्य है कि मैं अशोक सिंघल जी के परिवार से हूं और आज राम मंदिर का निर्माण होते देख रहा हूं। मेरे लिए सबसे सुनहरा पल होगा जब 22 जनवरी को रामलला विराजमान होंगे। मेरे चाचाजी की भी आत्मा को शांति मिलेगी।

घर-घर बांटे पूजित अक्षत व श्रीराम मंदिर का चित्र
श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास में भगवान श्रीराम के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम के दौरान घरों में दीप प्रज्ज्वलित करने और निमंत्रण देने के लिए अक्षत वितरण मंगलवार को प्रताप नगर सर्वोदय शाखा में हुआ। सर्वोदय शाखा के मुख्य शिक्षक श्याम वर्मा ने बताया की प्रताप नगर की सर्वोदय शाखा से जुड़े सभी घरों में गृह संपर्क अभियान चलना है। इसमें राकेश कुमार शर्मा, आनंद सक्सेना, राज सक्सेना, नितिन सुपारी, धर्मवीर मालिक, रितेश वाष्र्णेय, नितेश सक्सेना,हर्ष लोधी, हिर्दश कुशवाह, आदि मौजूद रहे।
 
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed