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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   yodhya Ram Mandir Pran Pratishtha Mantra Completed in 83 Seconds Instead 84 More Details in Hindi

Ram Mandir: प्राण प्रतिष्ठा का मंत्र 84 नहीं इतने सेकंड में हुआ पूरा, पंडित गणेश्वर ने बताई इसके पीछे की वजह

Thu, 25 Jan 2024 09:52 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 25 Jan 2024 09:52 AM IST
सार

Ram Mandir Ayodhya: श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य मंत्र 84 की जगह 83 सेकंड में ही पूरा हो गया। ऐसा विद्वानों की चपलता से है। प्राण प्रतिष्ठा के संयोजक रहे पं. गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ ने यह जानकारी दी।

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yodhya Ram Mandir Pran Pratishtha Mantra Completed in 83 Seconds Instead 84 More Details in Hindi
Ayodhya Ram Mandir - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा सही मुहूर्त में हुई। इस महानुष्ठान का असर देश-दुनिया पर सकारात्मक पड़ेगा। प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य मंत्र 84 सेकेंड का था। लेकिन, विद्वानों की चपलता से उसे 83 सेकेंड में ही पूरा कर लिया गया। 
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प्राण प्रतिष्ठा के संयोजक रहे पं. गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ बुधवार को अयोध्या से काशी लौटे। रामघाट स्थित सांग्वेद विद्यालय में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि सबकुछ जिज्ञासा के अनुसार चलता है। मगर जो लोग मुहूर्त को सही नहीं मानते वो सिर्फ इस कार्य में विघ्न डालने की कोशिश में हैं। 
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वह राजनीति से प्रेरित हैं या अज्ञानता से ये वही जान सकते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीरामलला के अयोध्या में विराजमान होने से लोगों के मन में सत्य प्रवृत्तियां और धर्मानुसार कार्य करने का विचारा आएगा। शुभ और अच्छे कार्य होंगे। इससे सनातन और मजबूत होगा।
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एक सेकेंड पहले ही पूरा हो गया था मंत्र
पं. गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य मंत्र दिन में 12 बजकर 29 मिनट और आठ सेकेंड पर शुरू हुआ और 12 बजकर 30 मिनट और 31 सेकेंड पर पूरा हो गया। मंत्र को तीन बार पढ़ा गया। इसके बाद प्राण प्रतिष्ठा का महानुष्ठान पुरा हुआ था।

रामघाट स्थित सांग्वेद विद्यालय में उन्होंने कहा कि श्रीरामलाल के अयोध्या में विराजमान होने से लोगों के मन में सत्य प्रवृत्तियां और धर्मानुसार कार्य करने का विचार आएगा। शुभ और अच्छे कार्य होंगे। इससे सनातन और मजबूत होगा। 

पं. गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ ने कहा कि मुट्ठीभर लोग हैं जिन्होंने इस महानुष्ठान में विघ्न डालने का प्रयास किया लेकिन प्रभु श्रीराम के कार्य में कोई बाधा नहीं आई। बल्कि इस स्वर्णिम पल को लोगों ने उत्सव के तौर पर मनाया और सिर्फ देश ही नहीं पूरा विश्व इसमें सहभागी बना।

विश्व ने आनंद की अनुभूति की
प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य आचार्य पं. लक्ष्मीकांत दीक्षित ने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा से भारत ही नहीं पूरे विश्व का भविष्य उज्ज्वल होगा। अनुष्ठान में कोई विघ्न न पड़े इसलिए देशभर के विद्वानों को बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि मुहूर्त को लेकर तर्क-वितर्क करने वालों को संपूर्ण निदान दे दिया गया था। अब वह संतुष्ट हैं या नहीं वो जानें। जब पूरा देश राममय हो गया था तो राजनीति करने वाले भी बदल गए और राममय हो गए।

सनातन समृद्ध होगा और आएगा सद्भाव
अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के बाद काशी लौटे काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष नागेंद्र पांडेय ने कहा कि प्रभु श्रीराम के रामराज्य की दृष्टि को बल मिलेगा। राष्ट्र निर्माण को भी ताकत मिलेगी। काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा से रामराज्य की कल्पना साकार होगी। इससे सनातनियों की खोई हुई विरासत पुन: वापस आएगी।

 

श्रीरामानंद विश्व हितकारिणी परिषद के संस्थापक व श्रीराम जानकी मंदिर के पीठाधीश्वर स्वामी रामकमलदास वेदांती ने कहा कि रामलला के विराजमान होने से मानवता में प्राण आ गया है। व्याकरणाचार्य सुमित्रानंद चतुर्वेदी ने कहा कि सनातन का सूर्योदय हुआ है। अब प्रभु श्रीराम के आदर्श को आत्मसात करने की जरूरत है। 

 

कबीर प्राकट्य धाम लहरतारा के महंत गोविंद शास्त्री ने कहा कि जिस श्रीराम के जीवन दर्शन को कबीर साहब ने बीजक में वर्णित किया है, उनका अब अयोध्या में आगमन हुआ है। यह ऐतिहासिक है। गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सतनाम सिंह धुन्ना ने भी काशी लौटने के बाद गुरुग्रंथ साहिब पर मत्था टेका। उन्होंने कहा कि मैंने प्रभु से देश में सामाजिक सौहार्द्र और शांति की अरदास लगाई है। निश्चय ही सनातनी संस्कृति समृद्ध होगी।
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