Ram Mandir: बाबा विश्वनाथ को चढ़ाई गईं प्राण प्रतिष्ठा समारोह को जाने वाली पूजन सामग्रियां, लोरी गीत भी गाए गए
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती के नेतृत्व में षोडशोपचार पूजन कर प्रभु श्रीराम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव निर्विघ्न संपन्न होने की प्रार्थना की गई। इस दौरान संस्कृत में दो लोरी गीत भी सुनाए गए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
महादेव के आराध्य रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए जाने वाली पूजन सामग्रियां रविवार को बाबा विश्वनाथ को चढ़ाई गईं। पीतल की थाल में 11 चांदी के बेलपत्र के साथ प्रभु श्रीराम और मां जानकारी के वस्त्र और शृंगार की सामग्रियां महादेव के आंगन में अर्पित की गईं।
काशी विद्वत परिषद के अष्टम दल मंडल के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी और अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती के नेतृत्व में षोडशोपचार पूजन कर प्रभु श्रीराम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव निर्विघ्न संपन्न होने की प्रार्थना की गई। इस दौरान संस्कृत में दो लोरी गीत भी सुनाए गए।
वैदिक विद्वानों के सानिध्य में अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के लिए यहां से भेजे जाने वाली सामग्री को बाबा को अर्पित किया गया। बाबा का पूजन कर रामकाज के लिए ये सामग्रियां ले जाने का संकल्प लिया गया। प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि 21 चांदी के बेलपत्र, राम और लक्ष्मण के लिए पीतांबरी वस्त्र और मोती की दो माला और माता जानकी के लिए साड़ी, चुनरी के अलावा शृंगार की सामग्रियां पीतल की थाल में रखकर बाबा को अर्पित की गई।
उन्होंने बताया कि शृंगार में मां अन्नपूर्णा का सिंदूर भी है। इस दौरान संस्कृत भाषा में रचित श्रीराम के जागरण के लिए दो लोरी गीत भी बाबा को समर्पित किए गए। बताया कि प्रभु श्रीराम बाल स्वरूप में अयोध्या में विराजमान हो रहे हैं। उनको प्रतिदिन सुबह यही लोरी सुनाकर जगाया जाएगा। पूजन में प्रो. रामचंद्र पांडेय, प्रो. गोपबंधु मिश्र, प्रो. विनय कुमार पांडेय, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, पं. गोविंद शर्मा, पं. दीपक मालवीय, मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील कुमार वर्मा, एडीएम शंभु शरण शर्मा, सूर्यकांत पांडेय, अरविंद सिंह आदि मौजूद रहे।
शिव ने प्रभु श्रीराम को देखा था बालरूप में
प्रो. रामनायण द्विवेदी ने बताया कि त्रेता युग में भगवान शिव स्वयं बालरूप में श्रीराम को भेष बदलकर देखने गए थे और सभी बाधाओं का निवारण किया था।