भाजपा के लिए पूर्वांचल में थोड़ा है, ज्यादा की जरूरत है
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद सोमवार को मऊ में जनसभा कर मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ के मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाएंगे। बीते साल एक मई को पीएम ने देशव्यापी उज्ज्वला योजना की शुरुआत के लिए बलिया को चुना था।
प्रदेश में परिवर्तन यात्राओं के क्रम में 14 नवंबर को उन्होंने गाजीपुर में जनसभा कर चुनावी माहौल को गति दी थी। तीन से पांच मार्च तक पीएम मोदी की वाराणसी, मिर्जापुर और जौनपुर में सभाएं होनी हैं।
पूर्वांचल पर भाजपा के खास ध्यान देने की वजह है।
दरअसल, भाजपा को भलीभांति मालूम है कि राजनीतिक रूप से परिपक्व पूर्वांचल के लोग न केवल तर्क करते हैं, बल्कि तर्कों को कसौटी पर परखते भी हैं। इसके अलावा पूर्वांचल के मतदाता एकतरफा मतदान करते हैं।
सपा से नाराज मतदाताओ को अपनी ओर करना चाहती है भाजपा
2012 में सपा को सात में से छह सीटें देने वाले गाजीपुर में 2007 में बसपा के छह प्रत्याशी जीते थे। मिर्जापुर में 2002 और 2007 के चुनाव में बसपा ने पांच में से तीन सीटें कब्जाई थीं। 2012 में जरूर उसे एक सीट मिली और तीन पर सपा प्रत्याशी विजयी रहे। इसी तरह 2012 में जौनपुर के मतदाताओं ने सपा के नौ में से सात उम्मीदवारों को विधानसभा भेज दिया, जबकि 2007 में इसी जिले की 10 में से पांच सीटों पर बसपा का बोलबाला रहा था। बलिया का भी उदाहरण कुछ ऐसा ही है।
सपा ने 2012 में सात में से पांच सीटें हासिल की थीं, जबकि 2007 में बसपा के छह प्रत्याशी आसानी से जीत गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी ज्यादातर संसदीय क्षेत्रों में बसपा को मिले मतों का प्रतिशत दूसरे नंबर पर था। अब पूर्वांचल के चुनावी समर में बसपा सुप्रीमो मायावती ने पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने का वादा कर दिया है तो भाजपा की चुनौती और बढ़ गई है।
भाजपा की पूरी कोशिश है कि सपा से नाराज मतदाता बसपा की ओर देखने के बजाय उसके पक्ष में लामबंद हो जाएं। यही नहीं, सपा के आपसी विवाद और मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव की सीमित भागीदारी का भी भाजपा फायदा उठा रही है।
मुसलमानों को लुभाने के लिए दर्जन मुसलमान उम्मीदवार चुनाव में उतारा
एक दिन पहले सपा और कांग्रेस नेताओं को पूर्वांचल में आना शुरू हुआ है। फिर भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का कोई कार्यक्रम अब तक तय नहीं हो पाया है। कांग्रेस का ध्यान वाराणसी में राहुल गांधी रोड शो कराने से ज्यादा नहीं लग रहा है। हालांकि अब तक यह भी तय नहीं हो पाया है।
पूर्वांचल पर भाजपा के जोर लगाने का एक और भी कारण है। सपा-कांग्रेस गठबंधन और बसपा ने गोरखपुर-बस्ती समेत पूर्वांचल के मुसलमान मतदाताओं को लुभाने के लिए करीब एक-एक दर्जन मुसलमान उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हैं।
बसपा ने इसी बेल्ट से ताल्लुक रखने वाले पूर्व सांसद अफजाल अंसारी को स्टार प्रचारक घोषित कर दिया है। तत्कालीन कौमी एकता दल के बसपा में विलय के बाद उनके परिवार को सबसे ज्यादा टिकट इसलिए दिए हैं,
ताकि पूर्वांचल की 20 सीटों पर नतीजों को प्रभावित किया जा सके। नसीमुद्दीन सिद्दीकी के कार्यक्रम तय हो चुके हैं। वहीं कांग्रेस ने प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद को इसी काम में लगा दिया है। हालांकि सपा के फायर ब्रांड नेता आजम खान और कद्दावर नेता अहमद हसन के दौरे अब तक तय नहीं हुए हैं।