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गुरदासपुर में 223 लोगों को डेंगू ने मारा डंक
गुरदासपुर
Updated Wed, 30 Oct 2013 10:35 PM IST
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जिले में डेंगू का डंक दिन-प्रतिदिन जहरीला होता जा रहा है। हर रोज डेंगू के नए मरीज सामने आ रहे हैं। डेंगू से निपटने के लिए जिला प्रशासन द्वारा किए गए इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक जिले में 223 लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं, जबकि निजी अस्पतालों डेंगू पीड़ित कई मरीज दाखिल हैं।
शहर में सफाई व्यवस्था में सुधार लाने के लिए भी कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। नगर काउंसिल ने मात्र दो बार शहर में दवा का छिड़काव करवा अपना पल्ला झाड़ लिया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक जिले में डेंगू के एक मरीज की मौत हुई है। उसमें भी अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जिला स्तर पर बनाई गई कमेटी के मुताबिक मरने वाला डेंगू से प्रभावित जरूर था लेकिन उसकी मौत का कारण कुछ और था जबकि मंगलवार को भी डेंगू के एक संदिग्ध मरीज की मौत हो चुकी है।
गुरदासपुर में नोडल अफसर डॉक्टर आर्दश जोत कौर ने बताया कि बुधवार शाम पांच बजे तक पूरे जिले के सरकारी अस्पतालों में डेंगू प्रभावित मरीजों की संख्या 11 थी जबकि संदिग्ध मरीजों की संख्या 22 हो चुकी थी जो गुरदासपुर तथा बटाला के सरकारी अस्पतालों में भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक 223 मरीज ही डेंगू पॉजिटिव पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि लोगों को जागरूक करने के लिए कैंप लगाए जा रहे हैं। विशेष टीमों का गठन किया गया है जो घर-घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर रही हैं।
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गुरदासपुर के सिविल सर्जन डॉ. विनोद बेरी ने बताया कि निजी अस्पतालों से इलाज करवाने वालों का रिकार्ड विभाग के पास नहीं होता। सिविल अस्पताल में डेंगू का पूरा इलाज उपलब्ध है। सिर्फ गुरदासपुर के सिविल अस्पताल में खून में प्लेटलेट्स जांचने की मशीन नहीं है।
डेंगू के लक्षण
डॉ. विनोद बेरी ने बताया कि यह बुखार एक खास तरह का होता है जो डेंगू मच्छर के काटनेसे तीन से 14 दिन के बाद होता है जबकि आम तौर पर सात दिन में बुखार हो जाता है। इसी तरह वाइट बल्ड सेल तथा प्लेटलेट्स सेल कम होने के अलावा उलटियां आती हैं और शरीर के किसी भी हिस्से से खून निकल सकता है। उन्होंने कहा कि जिस किसी को भी बुखार की शिकायत हो वह बिना कोई जोखिम उठाए तुरंत सरकारी अस्पताल में जाकर अपना इलाज करवाए।
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शहर में सफाई व्यवस्था में सुधार लाने के लिए भी कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। नगर काउंसिल ने मात्र दो बार शहर में दवा का छिड़काव करवा अपना पल्ला झाड़ लिया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक जिले में डेंगू के एक मरीज की मौत हुई है। उसमें भी अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जिला स्तर पर बनाई गई कमेटी के मुताबिक मरने वाला डेंगू से प्रभावित जरूर था लेकिन उसकी मौत का कारण कुछ और था जबकि मंगलवार को भी डेंगू के एक संदिग्ध मरीज की मौत हो चुकी है।
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गुरदासपुर में नोडल अफसर डॉक्टर आर्दश जोत कौर ने बताया कि बुधवार शाम पांच बजे तक पूरे जिले के सरकारी अस्पतालों में डेंगू प्रभावित मरीजों की संख्या 11 थी जबकि संदिग्ध मरीजों की संख्या 22 हो चुकी थी जो गुरदासपुर तथा बटाला के सरकारी अस्पतालों में भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक 223 मरीज ही डेंगू पॉजिटिव पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि लोगों को जागरूक करने के लिए कैंप लगाए जा रहे हैं। विशेष टीमों का गठन किया गया है जो घर-घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर रही हैं।
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गुरदासपुर के सिविल सर्जन डॉ. विनोद बेरी ने बताया कि निजी अस्पतालों से इलाज करवाने वालों का रिकार्ड विभाग के पास नहीं होता। सिविल अस्पताल में डेंगू का पूरा इलाज उपलब्ध है। सिर्फ गुरदासपुर के सिविल अस्पताल में खून में प्लेटलेट्स जांचने की मशीन नहीं है।
डेंगू के लक्षण
डॉ. विनोद बेरी ने बताया कि यह बुखार एक खास तरह का होता है जो डेंगू मच्छर के काटनेसे तीन से 14 दिन के बाद होता है जबकि आम तौर पर सात दिन में बुखार हो जाता है। इसी तरह वाइट बल्ड सेल तथा प्लेटलेट्स सेल कम होने के अलावा उलटियां आती हैं और शरीर के किसी भी हिस्से से खून निकल सकता है। उन्होंने कहा कि जिस किसी को भी बुखार की शिकायत हो वह बिना कोई जोखिम उठाए तुरंत सरकारी अस्पताल में जाकर अपना इलाज करवाए।