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अदालत में बयान दर्ज करवाने पहुंचे सुखबीर बादल
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदकोट
Updated Sat, 06 Feb 2016 03:03 PM IST
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जेएमआईसी सतीश कुमार की अदालत में शुक्रवार को उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ चल रहे आपराधिक केस की सुनवाई हुई। इस दौरान खुद उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल भी अदालत में पेश हुए और उन्होंने धारा 313 के तहत अपना बयान दर्ज करवाते हुए इस केस को झूठा करार दिया।
इस मामले में अदालत ने बचाव पक्ष को अपनी गवाही पेश करने के निर्देश देते हुए केस की अगली सुनवाई 25 फरवरी को रखी है। जानकारी के अनुसार वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव के दौरान पत्रकार नरेश सहगल से मारपीट करने व कैमरे छीनने की घटना से संबंधित यह मामला पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय की हिदायतों पर 30 जून, 2006 को थाना सिटी कोटकपूरा में दर्ज हुआ था।
इस केस का ट्रायल शुरू होने के कुछ समय बाद उच्च न्यायालय ने ही निचली अदालत में केस की सुनवाई पर रोक लगा दी थी। करीब डेढ़ माह पहले ही 21 दिसंबर को उच्च न्यायालय ने रोक हटाते हुए निचली अदालत को इस केस की दोबारा सुनवाई शुरू करने के आदेश दिए थे।
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ट्रायल शुरू होने पर शिकायतकर्ता नरेश सहगल ने अदालत से इस मामले में कुछ पुलिस अधिकारियों को आरोपियों के रूप में तलब करने और कुछ और गवाहों को अदालत में पेश करने की इजाजत मांगी थी लेकिन 2 फरवरी को अदालत ने उसकी इन दोनों याचिकाओं को खारिज करते हुए शिकायतकर्ता पक्ष की गवाही बंद करने का आदेश दे दिया था और अगली सुनवाई पर उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को अदालत के समक्ष पेश होकर सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान दर्ज करवाने की हिदायत दी थी।
शुक्रवार बाद दोपहर कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच अदालत में पेश हुए उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने जेएमआईसी सतीश कुमार के समक्ष अपना बयान दर्ज करवाया। उन्होंने कहा कि यह एक झूठा व बेबुनियाद केस है और इस मामले से उनका कोई संबंध नहीं है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने उपमुख्यमंत्री को अगली सुनवाई पर अपने पक्ष के गवाह पेश करने के निर्देश दिए है। उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के वकील शिवकरतार सिंह सेखों के अनुसार इस केस की अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी और इस केस में उन्हें पहले की तरह निजी पेशी से छूट बरकरार रहेगी।
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इस मामले में अदालत ने बचाव पक्ष को अपनी गवाही पेश करने के निर्देश देते हुए केस की अगली सुनवाई 25 फरवरी को रखी है। जानकारी के अनुसार वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव के दौरान पत्रकार नरेश सहगल से मारपीट करने व कैमरे छीनने की घटना से संबंधित यह मामला पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय की हिदायतों पर 30 जून, 2006 को थाना सिटी कोटकपूरा में दर्ज हुआ था।
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इस केस का ट्रायल शुरू होने के कुछ समय बाद उच्च न्यायालय ने ही निचली अदालत में केस की सुनवाई पर रोक लगा दी थी। करीब डेढ़ माह पहले ही 21 दिसंबर को उच्च न्यायालय ने रोक हटाते हुए निचली अदालत को इस केस की दोबारा सुनवाई शुरू करने के आदेश दिए थे।
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ट्रायल शुरू होने पर शिकायतकर्ता नरेश सहगल ने अदालत से इस मामले में कुछ पुलिस अधिकारियों को आरोपियों के रूप में तलब करने और कुछ और गवाहों को अदालत में पेश करने की इजाजत मांगी थी लेकिन 2 फरवरी को अदालत ने उसकी इन दोनों याचिकाओं को खारिज करते हुए शिकायतकर्ता पक्ष की गवाही बंद करने का आदेश दे दिया था और अगली सुनवाई पर उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को अदालत के समक्ष पेश होकर सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान दर्ज करवाने की हिदायत दी थी।
शुक्रवार बाद दोपहर कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच अदालत में पेश हुए उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने जेएमआईसी सतीश कुमार के समक्ष अपना बयान दर्ज करवाया। उन्होंने कहा कि यह एक झूठा व बेबुनियाद केस है और इस मामले से उनका कोई संबंध नहीं है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने उपमुख्यमंत्री को अगली सुनवाई पर अपने पक्ष के गवाह पेश करने के निर्देश दिए है। उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के वकील शिवकरतार सिंह सेखों के अनुसार इस केस की अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी और इस केस में उन्हें पहले की तरह निजी पेशी से छूट बरकरार रहेगी।