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विदेश से तो लौटे लेकिन देश में करना पड़ रहा परेशानियों का सामना, प्रशासन पर फूटा गुस्सा

Tue, 19 May 2020 12:09 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली 
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली  Published by: अमित कुमार Updated Tue, 19 May 2020 12:09 PM IST
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Vande Bharat Mission: People are facing problems at Airport after returning India
लोगों को एयरपोर्ट पर घंटों भूखे प्यासे करना पड़ा इंतजार - फोटो : Amar Ujala

कोरोना वायरस के कहर के बीच केंद्र सरकार विदेशों में फंसे भारतीयों को स्वदेश लाने के लिए प्रयास करने में जुटी हुई है। वंदे भारत मिशन के तहत बड़ी संख्या में भारतीयों को वापस लाया जा रहा है। मगर विदेश से घर सुरक्षित लौटने की उम्मीद लिए इन प्रवासी भारतीयों को देश में पहुंचते ही ढेरों समस्याओं से रूबरू होना पड़ रहा है। 

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लंदन में फंसे ऐसे ही भारतीयों को लेकर एयर इंडिया का विशेष विमान सोमवार को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा। जब विमान ने लंदन से उड़ान भरी तो इसमें सवार यात्रियों को लगा कि जल्द ही वो अपनों के बीच होंगे, जहां उनके देश की सरकार मदद के लिए तत्पर खड़ी है। मगर दिल्ली में लैंड करते ही उनकी समस्याएं खत्म होने के बजाय उलटा बढ़ा गई। 
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बिना कुछ खाए-पिए घंटों इंतजार। मजबूरन पासपोर्ट जमा कराना। एक ढंग का होटल ढूंढने के लिए प्रशासन से लंबी बहस। सोमवार को दिल्ली एयरपोर्ट का नजारा कुछ ऐसा ही था। जहां स्वदेश लौटने पर इन यात्रियों के चेहरों पर खुशी होनी चाहिए थी, वहीं सभी के चेहरे पर तनाव था, गुस्सा था और प्रशासन के प्रति रोष था। खासतौर से नोएडा-गाजियाबाद प्रशासन को लेकर। 
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गाजियाबाद के इंदिरापुरम में रहने वाली शुचिता शुक्ला भी इसी विमान से भारत लौटी हैं। अमर उजाला के साथ खास बातचीत में उन्होंने यात्रियों को होने वाली परेशानियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया, 'हम सुबह 9.30 बजे एयर इंडिया के विमान से दिल्ली पहुंचे और रात आठ बजे तक हमें एयरपोर्ट पर ही इंतजार करने को मजबूर होना पड़ा। हमारे साथ 35 लोग और हैं।। 

शुचिता शुक्ला ने बताया कि विमान में हमारा अच्छे से ख्याल रखा गया। स्टाफ ने भी अच्छे से बात की और हमें खाने के लिए भी देते रहे। मगर एयरपोर्ट पर पहुंचते ही दिक्कतें बढ़ना शुरू हो गई। ऐसा लग रहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधियों को कुछ पता ही नहीं है कि क्या करना है। उनके पास कोई जानकारी ही नहीं है। 

होटल का इंतजाम भी खुद किया
अपने ढाई साल के बच्चे के साथ भारत लौटी शुचिता के मुताबिक हम सभी यात्रियों के पासपोर्ट एक थैले में बंद करके रख लिए। इसके बदले हमें कोई रिसिविंग भी नहीं दी गई। हमें भूखे प्यासे एयरपोर्ट पर ही लंबा इंतजार करने को मजबूर होना पड़ा। हमें विमान में मिले खाने से ही काम चलाना पड़ा। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट पर सही ढंग से काम हो रहा है, लेकिन स्थानीय प्रशासन पर दिक्कतें आ रही हैं। दिनभर कोई खाना या पानी नहीं मिला। 

बार-बार पूछने के बावजूद कोई यह बताने को तैयार नहीं था कि उन्हें किस होटल में लेकर जाया जा रहा है। अधिकारियों व पुलिसकर्मियों के साथ लोगों की तीखी बहस भी हुई। थककर हमने ही अपने रिश्तेदारों से बातचीत कर होटल की बुकिंग करवाई। यहां तक कि होटल में कमरे के रेट के लिए भी हमें ही मोलभाव करना पड़ा।   


टेस्टिंग के नाम पर सिर्फ बुखार की जांच 
शुचिता शुक्ला ने जानकारी दी कि टेस्टिंग के नाम पर उनके सिर्फ बुखार की जांच की गई है। अब अगली टेस्टिंग कब होगी, इसके बारे में कुछ नहीं पता। कोई कुछ नहीं बता रहा है।
यूपी सरकार तो बिल्कुल उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही। 

कुछ भी चीज मुफ्त नहीं 
उन्होंने बताया कि भारत लौटने वालों में बहुत से छात्र हैं। जो बेहद मुश्किलों से लौटे हैं, लेकिन अपने देश में आकर भी उनका संघर्ष खत्म नहीं हो रहा। हमें मिलने वाली कोई भी सुविधा मुफ्त नहीं है। इसके बावजूद हमें लड़ाई करनी पड़ रही है।

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