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लुबुंबाशी में फंसे प्रवासी भारतीय, ई-मेल के जरिए अमर उजाला को दी जानकारी

Fri, 15 May 2020 04:35 PM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Tanuja Yadav Updated Fri, 15 May 2020 04:35 PM IST
सार

  • वंदे भारत मिशन के पहले चरण में 14,800 भारतीय लौटे स्वदेश
  • लुबुंबाशी से प्रवासी भारतीय ने अमर उजाला को दी जानकारी
  • भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से लगाई मदद की गुहार

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many people stranded in foreign countries people are willing to come back in india waiting for their chance
एयर इंडिया के विमानों के द्वारा वंदे भारत मिशन चलाया जा रहा है। - फोटो : PTI

विस्तार

कोरोना महामारी की वजह से कई देशों में लॉकडाउन लगा हुआ है, लेकिन इसी बीच विदेशों में कई प्रवासी भारतीय भी फंसे हुए है। इन प्रवासी भारतीयों को निकालने के लिए सरकार ने वंदे भारत मिशन चला रही है जिसके तहत एक करोड़ भारतीयों को भारत वापस लाना है।

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वंदे भारत मिशन के पहले चरण यानि कि सात मई से 14 मई तक 64 फ्लाइट चलाई गई जिसके तहत 12 देशों से 14,800 फंसे हुए भारतीयों को वापस स्वदेश लाया गया है। वहीं दूसरे चरण के तहत 30,000 लोगों को भारत लाया जाएगा। 
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वंदे भारत मिशन का दूसरा चरण 16 से 22 मई तक चलेगा जिसमें 149 फ्लाइट की मदद से 31 देशों में फंसे भारतीयों को वापस लाने की तैयारी की जा रही है। एयर इंडिया और इसकी सहायक कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस दोनों मिलकर विदेशों से भारतीयों को वापस ला रही है।
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वंदे भारत मिशन के तहत कई भारतीयों को वापस लाया जा रहा है, इसी उम्मीद में लुबुंबाशी में फंसे हुए कुछ भारतीयों ने अमर उजाला को लिखकर अपनी ओर ध्यान खींचने की कोशिश की है। वहां फंसे एक प्रवासी भारतीय अखिल ने लिखा है कि लुबुंबाशी में एक हजार से ज्यादा भारतीय फंसे हुए हैं।

अखिल बताते हैं कि उन्होंने भारतीय विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर इस बात की जानकारी दी है। हालांकि अभी वो मंत्रालय से जवाब आने का इंतजार कर रहे हैं। किंशाशा में स्थित भारतीय दूतावास में रजिस्ट्रेशन करा दिया है लेकिन वहां से कोई अपडेट नहीं मिला है।


अखिल ने आगे लिखा कि वो और उनके साथ फंसे हुए भारतीय स्वदेश वापस आने के लिए किराया देने और 14 दिन का क्वारंटीन करने को तैयार हैं। अखिल और उनके साथी भारत की सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं ताकि वो भी बाकी फंसे भारतीयों की तरह वापस स्वदेश लौट सकें।

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