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अमेरिका से निर्वासित किए जाएंगे 161 भारतीय, अवैध रूप से देश में घुसने का आरोप

Mon, 18 May 2020 09:23 AM IST
अनवर अंसारी पीटीआई, वाशिंगटन
पीटीआई, वाशिंगटन Published by: अनवर अंसारी Updated Mon, 18 May 2020 09:23 AM IST
सार

  • अमेरिका 161 भारतीयों को वापस भेजेगा
  • मेक्सिको से लगी सीमा से अवैध रूप से देश में दाखिल हुए थे

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America will deport 161 illegal Indian migrants this week, would arrive Amritsar on 19 may
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : america US flag

विस्तार

संयुक्त राज्य अमेरिका इस सप्ताह 161 भारतीय नागरिकों को वापस भेजेगा। इनमें से अधिकांश ने गैर-कानूनी तरीके से मेक्सिको के साथ लगने वाली दक्षिणी सीमा से देश में प्रवेश किया था। इनके पास अमेरिका में दाखिल होने के लिए कोई भी वैध दस्तावेज नहीं थे। एक विशेष विमान से इन्हें पंजाब के अमृतसर लाया जाएगा। 

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निर्वासित किए जाने वाले लोगों की सूची में सबसे अधिक 76 हरियाणा से हैं, उसके बाद पंजाब से 56, गुजरात से 12, उत्तर प्रदेश से पांच, महाराष्ट्र से चार, केरल, तेलंगाना और तमिलनाडु से दो-दो, और आंध्र प्रदेश और गोवा से एक-एक लोग शामिल हैं।
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उत्तर अमेरिकी पंजाबी एसोसिएशन (एनएपीए) के कार्यकारी निदेशक, सतनाम सिंह चहल के अनुसार, वे पूरे अमेरिका में 95 जेलों में बंद 1,739 भारतीयों में से हैं।

इन लोगों को अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करने की कोशिश करते हुए आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन या आईसीई द्वारा गिरफ्तार किया गया था। आईसीई की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2018 में अमेरिका ने 611 भारतीयों को निर्वासित किया था। वहीं, 2019 में इस आंकड़ें में ढ़ाई गुना की बढ़ोतरी हुई और यह बढ़कर 1616 हो गया।
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एनएपीए ने कहा कि जिन 161 लोगों को भारत निर्वासित किया जा रहा है, उनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं। उनमें से सबसे कम उम्र के हरियाणा के दो 19 वर्षीय युवा भी शामिल हैं। चहल ने कहा कि अमेरिकी जेलों में बंद अन्य भारतीय नागरिकों के साथ आगे क्या होगा, इसकी कोई जानकारी नहीं है। 

हालांकि, यह दिखाने के लिए कोई डाटा उपलब्ध नहीं है कि अमेरिकी जेलों में बंद भारतीय अधिकतर किस राज्य से हैं, माना जा रहा है कि उनमें से अधिकतर उत्तर भारत के रहने वाले हैं। 

हिरासत में लिए गए अधिकतर लोगों ने शरण मांगी थी और दावा किया था कि उन्होंने अपने देश में हिंसा या उत्पीड़न का सामना किया है। पिछले कुछ वर्षों में, अमेरिकी न्यायाधीशों ने उनके इस तर्क को नहीं माना और उनके आवेदनों को खारिज कर दिया।

वर्षों से उनके बीच काम कर रहे चहल ने आरोप लगाया कि उत्तर भारत, विशेष रूप से पंजाब में मानव तस्करों और अधिकारियों की सांठगांठ है, जो युवा लोगों को अपने घर छोड़ने और अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।


ये बिचौलिए और एजेंट प्रत्येक व्यक्ति से 35-50 लाख रुपये तक लेते हैं। एक बयान में, चहल ने पंजाब सरकार और केंद्र से अवैध एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया।

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