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Ukraine Russia War: Heavy shelling from sky in Ukraine, wreaked havoc in many cities, See pictures Of Crisis
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Ukraine Russia War : यूक्रेन में आसमान से बरस रही आग, कई शहरों में ढाया कहर, 12 तस्वीरों से समझिए कैसे होंगे हालात
Fri, 04 Mar 2022 01:31 AM IST
योगेश साहू
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, कीव/मॉस्को।
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, कीव/मॉस्को।
Published by: योगेश साहू
Updated Fri, 04 Mar 2022 01:31 AM IST
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बमबारी के बाद लगी आग को बुझाने का प्रयास करते दमकल कर्मी।
- फोटो : PTI
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रूसी हमले के आठवें दिन बृहस्पतिवार को यूक्रेन के आसमान से आग बरसती देखी गई। यहां कीव, खारकीव, लवीव, झाइतोमिर, माइकोलेव और कीव ओब्लास्ट समेत कई इलाकों में टैंकों के गोले कहर ढाते देखे गए। जबकि रूस पर लगाए गए पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों की आंच रूसियों को भी झुलसाने लगी है। देश में न तो भुगतान तंत्र काम कर रहा है और न ही नकदी की निकासी हो पा रही है।
कुल मिलाकर, रूस और यूक्रेन दोनों ही देशों में इस युद्ध के चलते आम आदमी दहशत में है। यूक्रेन में रूस की क्रूज मिसाइलों ने सरकारी इमारतों और अन्य आबादी वाले हिस्सों में हमले बढ़ा दिए हैं। यूक्रेन के मुख्य शहरों में रूसी सेना के घुसने से वहां मानवीय संकट खड़ा हो गया है। लोगों के पास राशन नहीं है और खाने-पीने के लिए भी लोग बंकरों से बाहर नहीं आ रहे हैं।
कई शहरों में पलायन करने वाले लोग वहां की दुकानों में लूटपाट कर आगे बढ़ रहे हैं। इस बीच, कीव समेत माइकोलेव, लवीव, झाइतोमिर शहरों में रेड अलर्ट जारी कर लोगों से नजदीकी शिविरों में पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी तरफ, रूसी मुद्रा रूबल विदेशी मुद्रा में नहीं बदल पा रही है। पश्चिमी देशों की पाबंदियों के चलते यहां नकदी निकासी प्रभावित हो गई है।
एटीएम के बाहर लंबी कतारें हैं और कई बैंकों के कार्ड को एटीएम स्वीकार नहीं कर रहे हैं। एप्पल द्वारा रूस में उत्पाद बिक्री रोक दी गई है। एप्पल-पे के यहां काम न करने के कारण बसों, कैफे और जरूरी जगहों पर भुगतान रुक गया है। सुपरमार्केट में भी प्रति व्यक्ति सामान खरीद की मात्रा सीमित कर दी गई है। विदेशी कंपनियों के रूस में कारोबार बंद करने से कई लोग सड़कों पर आ गए हैं।
जगी उम्मीद : नागरिकों की सुरक्षित निकासी के लिए गलियारे पर सहमति
रूस-यूक्रेन के बीच युद्धग्रस्त क्षेत्रों से नागरिकों की सुरक्षित निकासी के लिए गलियारा बनाने पर सहमति बन गई है। बेलारूस में दूसरे दौर की वार्ता के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति के सलाहकार मिखाइलो पोदोलियक ने कहा, युद्धविराम पर कीव को जितनी उम्मीद थी, वैसा नतीजा नहीं आया। हालांकि, नागरिकों को सुरक्षित निकालने तक अस्थायी युद्धविराम की सहमति बनी है।
पोदोलियक ने कहा, केवल उन स्थानों पर युद्धविराम होगा, जहां मानवीय गलियारे हैं। दोनों पक्षों में इस बात पर भी सहमति बनी है कि जहां भीषण तबाही हुई है, वहां दवा व खाना पहुंचाया जाए। हमले के बाद से पहली बार दोनों देशों में किसी बात पर सहमति बनी है। पोदोलियक ने विस्तृत जानकारी तो नहीं दी, इतना जरूर कहा, हमें जितनी उम्मीद थी, वैसा कुछ नहीं हुआ। इतना कह सकता हूं कि मानवीय पहलुओं पर चर्चा की क्योंकि कई शहर घिर गए हैं। उधर, मुख्य रूसी वार्ताकार व्लादिमीर मेदिन्स्की ने कहा, रूस ने मानवीय गलियारे और उसके आसपास युद्धविराम की सहमति दी है। मेदिन्स्की ने इसे महत्वपूर्ण प्रगति करार दिया है। एजेंसी
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युद्ध के दौरान बमबारी से धराशायी हुए अपने घर के सामने खड़ी बच्ची।
- फोटो : @UNICEF_UA
रूस में कीमतें बढ़ीं, पेंशन रुकी, दवाइयों की कमी
यूक्रेन पर युद्ध थोपने के चलते रूस में भी आर्थिक हालात बेहद खराब हैं। विपक्ष की नेता यूलिया गालयेमिना ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, रूसी लोग दाम बढ़ने की समस्या से जूझ रहे हैं, बुजुर्गों की पेंशन रुक गई है। उन्होंने लिखा, दवाइयों और चिकित्सीय उपकरणों की कमी हो रही है। हम 1990 को अब कम खराब वक्त के तौर पर याद करेंगे। लेकिन मेरा सवाल है कि यह सब ‘किस लिए’?
समुद्र में दिखी परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बी
यूक्रेन हमले को लेकर रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन द्वारा एटमी हमले के हाई अलर्ट के बीच परमाणु हथियारों से लैस रूस की पनडुब्बी बैरेंट्स सागर में गश्त करती देखी गई है। रूस के परमाणु हथियार हमले के लिए तैयार स्थिति में हैं। रूस ने यूक्रेन में हथियारों की आपूर्ति कर रहे नाटो देशों पर हमले न करने की गारंटी देने से भी इनकार कर दिया है। जबकि रूसी विदेश मंत्री ने कहा है कि रूस किसी भी कीमत पर यूक्रेन को परमाणु हथियार नहीं बनाने देगा। बता दें कि यूक्रेन के पास पूर्व सोवियत संघ के समय से ऐसे हथियार बनाने की तकनीक है।
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जंग के बीच यूक्रेन में जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ।
- फोटो : @UNICEF_UA
रूस में नवेलनी की अपील के बाद सड़कों पर उतरे लोग
यूक्रेन पर रूसी हमले की जहां अमेरिका, ब्रिटेन और नाटो देश निंदा कर रहे हैं वहीं रूस में भी कुछ दिनों से हमले के खिलाफ प्रदर्शन जारी हैं। इस बीच, भारतीय समयानुसार बृहस्पतिवार को भी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के गृहनगर सेंट पीटर्सबर्ग में पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी में उग्र प्रदर्शन जारी रहे। इस दौरान कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया।
इन प्रदर्शनों के पीछे पुतिन के धुर विरोधी नेता एलेक्सी नवेलनी की अपील को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है जो उन्होंने जेल में बंद रहते हुए रूसियों से की। उन्होंने कहा था कि रूस को डरे हुए कायरों का देश नहीं होना चाहिए। नवेलनी ने अपील की थी कि रूस अमनपसंद देश बनना चाहता है लेकिन अफसोस बहुत कम लोग अब इसे अमनपसंद देश कहेंगे। उन्होंने अपील की कि लोग सड़कों पर उतरें और शांति के लिए लड़ाई लड़ें।
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यूक्रेन के शहरों में घुसने के लिए जाते रूसी सैन्य वाहन।
- फोटो : PTI
एक सप्ताह में 10 लाख लोगों का यूक्रेन से पलायन : यूएन
यूएन की शरणार्थी एजेंसी ने बृहस्पतिवार को बताया कि रूस के हमला करने के बाद से 10 लाख लोग यूक्रेन छोड़कर चले गए हैं। इस सदी में पहले कभी इतनी तेज गति से पलायन नहीं हुआ है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (यूएनएचसीआर) के आंकड़ों के अनुसार, पलायन करने वाले लोगों की संख्या यूक्रेन की आबादी के दो प्रतिशत से अधिक है।
एजेंसी का अनुमान है कि यूक्रेन से अंतत: 40 लाख लोग पलायन कर सकते हैं और यह संख्या अनुमान से भी अधिक हो सकती है। यूएनएचसीआर की प्रवक्ता जोंग-आह घेदिनी-विलियम्स ने एक ईमेल में यह जानकारी दी। संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त फिलिप्पो ग्रांडी ने ट्वीट किया, हमने मात्र सात दिन में यूक्रेन से पड़ोसी देशों में 10 लाख लोगों का पलायन देखा है।
यूक्रेन छोड़कर जाने वाले इन लोगों में समाज के अधिकतर कमजोर वर्ग के लोग शामिल हैं, जो पलायन को लेकर स्वयं फैसला करने में सक्षम नहीं हैं और उनकी यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए उन्हें सहायता की आवश्यकता है। हंगरी के शहर जाहोनी में 200 से अधिक दिव्यांग यूक्रेनी पहुंचे, जो यूक्रेन की राजधानी कीव में दो आश्रय गृहों में रहते थे। शरणार्थियों में कई बच्चे भी शामिल हैं। इनमें कई लोग मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम भी हैं।
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बमबारी से तबाह हुई एक इमारत।
- फोटो : PTI
बाइडन तय करेंगे भारत पर प्रतिबंध लगाएं या नहीं : अमेरिकी अधिकारी
रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की खरीद को लेकर भारत पर काटसा (सीएएटीएसए) कानून के तहत प्रतिबंध लगाया जाए या नहीं, इस पर फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन करेंगे। बाइडन प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी और दक्षिण-मध्य एशिया में अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लु ने अमेरिकी सांसदों को यह जानकारी दी।
भारत के खिलाफ संभावित काटसा प्रतिबंधों से जुड़े एक सवाल पर डोनाल्ड लु ने सीनेट की निकट पूर्व, दक्षिण एशिया, मध्य एशिया और आतंकवाद निरोधी मामलों की विदेशी संबंध उपसमिति के सदस्यों को कहा कि मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि बाइडन प्रशासन काटसा कानून का पालन करेगा और इसे पूरी तरह से लागू करेगा। प्रशासन इसके किसी भी पहलू पर आगे बढ़ने से पहले अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के साथ राय-मशविरा करेगा।
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