विद्रोहियों के खात्मे के नाम पर अपने ही बेगुनाह नागरिकों शिकार बना रही सीरियाई सरकार के खिलाफ विश्व के देश एकमत हो गए हैं। अमेरिका द्वारा सीरियाई सैन्य क्षेत्र पर हुआ हवाई हमला पूरी दुनिया को हैरान कर गया है। अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने सीरिया द्वारा किए गए रासायनिक हमले की कड़ी निंदा की थी और चेताया था कि अगर उसने ये हमले नहीं रोके तो इसका परिणाम ठीक नहीं होगा।
कुछ ऐसे की गई थी सीरिया पर हवाई हमले की पूरी तैयारी
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शुक्रवार शाम 5 बजे अमेरिकी नौसेना के टॉम हॉक मिसाइलों से लैस युद्धक जहाज सीरिया के पास पहुंचने लगे। इस बीच पूरे ऑपर्रेशन पर राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की टीम नजर रखे हुए थी। यही टीम यह तय करने वाली थी कि कितने बजे मिसाइल दागी जाएंगी।
रात 8.55 बजे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्र को संबोधित करने की योजना थी, जिसमें वह अमेरिकी नागरिकों को बताते कि सीरिया में हुए रासायनिक हमले का जवाब देने के लिए अमेरिकी वायुसेना ने दमिश्क पर हवाई हमला कर दिया है।
9 बजे ट्रंप ने जानकारी दी कि सीरिया केमिकल हथियारों को निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा कि फ्रांस और ब्रिटेन के साथ मिलकर इस हमले को अंजाम दिया जाएगा।
9.15 बजे राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस और ईरान पर सीरिया की अप्रत्यक्ष रूप में मदद करने का आरोप लगाते हुए, उन्हें चेताया। उन्होंने कहा कि मैं उन ईरान और रूस से पूछता चाहता हूं कि ऐसे देश की मदद करना कहा तक सही है जो बेगुनाह बच्चे, महिलाओं और आदमियों की जान ले लेता है?
9.25 बजे राष्ट्रपति ट्रंप ने खाड़ी देशों से अपील की और कहा कि वे सभी मिलकर सीरिया पर दबाव बनाएं। अगर यह देश साथ देते हैं, तो जल्द ही सीरिया में नागरिकों को राहत दी जा सकेगी।
9.40 बजे फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों ने भी सूचना दी कि सीरिया के केमिकल मिलिस्ट्री स्पेस पर ब्रिटेन और अमेरिका के साथ मिलकर कार्रवाई की गई है।
9.50 बजे दमिश्क के पूर्व, पश्चिम और दक्षिण से धमाकों की आवाज गूंजने लगी। चश्मदीदों के मुताबिक सीरिया की राजधानी में आग की लपटें दूर तक दिख रही थी।