दक्षिण चीन सागर (एससीएस) पर चीन के दावे को हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल ने खारिज कर दिया है। फिलीपींस की याचिका पर सुनवाई के बाद दिए फैसले में संयुक्त राष्ट्र समर्थित ट्रिब्यूनल ने कहा है कि दक्षिण चीन सागर पर चीन के एकाधिकार के दावे का कोई भी कानूनी आधार नहीं है। ट्रिब्यूनल का यह फैसला चीन के लिए बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। इस फैसले के बाद दक्षिण चीन सागर विवाद और गहराने के आसार हैं क्योंकि चीन ने ट्रिब्यूनल के फैसले को मानने से इनकार कर दिया है। फैसला आने के तत्काल बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि हम यह फैसला किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे और दक्षिण चीन सागर पर हमारे रुख में कोई बदलाव नहीं आएगा।
16 बातें: दक्षिणी चीनी समुद्र को लेकर क्यों बढ़ रहा है चीन और दूसरे देशों में तनाव?
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दक्षिणी चीनी समुद्र को लेकर क्यों बढ़ रहा है चीन और दूसरे देशों में तनाव?
- फोटो : Reuters
वर्ष 2013 में फिलीपींस दक्षिण चीन सागर का मामला लेकर अंतरराष्ट्रीय कोर्ट पहुंचा था। उस पर सुनवाई करते हुए नीदरलैंड के हेग में परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (पीसीए) ने मंगलवार को अपना फैसला सुनाया। अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल ने कहा कि नाइन डैश लाइन के दायरे में आने वाले समुद्री क्षेत्र और इसके संसाधनों पर चीन के दावे का कोई कानूनी आधार नहीं है।
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दक्षिणी चीनी समुद्र को लेकर क्यों बढ़ रहा है चीन और दूसरे देशों में तनाव?
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पांच जजों वाले ट्रिब्यूनल ने जोर देकर कहा है कि उसका फैसला अंतिम और बाध्यकारी है। ट्रिब्यूनल ने चीन को दक्षिण चीन सागर में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करने का दोषी भी पाया। ट्रिब्यूनल ने दक्षिण चीन सागर में निर्माण कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए चीन की कड़ी आलोचना की है।
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दक्षिणी चीनी समुद्र को लेकर क्यों बढ़ रहा है चीन और दूसरे देशों में तनाव?
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पीसीए ने यह भी कहा कि चीनी मछुआरों ने एससीएस में ऐसे समुद्री जीवों का बड़े स्तर पर शिकार किया, जो विलुप्त होने के कगार पर हैं। चीनी सरकार ने इन्हें रोका नहीं, जो कि अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि चीन ने फिलीपींस के अधिकारों का उल्लंघन किया है। अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल के फैसले पर फिलीपींस ने खुशी जताई है।
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क्या है विवाद
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क्या है विवाद-दरअसल चीन 1940 के दशक के एक नक्शे को आधार बनाकर दक्षिण चीन सागर के लगभग 90 फीसदी हिस्से पर अपना दावा जताता रहा है। उसके मुताबिक नाइन डैश लाइन के दायरे में आने वाले लगभग पूरे समुद्री क्षेत्र पर उसका अधिकार है और उसके मछुआरे सदियों से इस समुद्री क्षेत्र का इस्तेमाल करते रहे हैं। चीन ने अपने दावे को मजबूती देने के लिए दक्षिण चीन सागर के कोरल रीफ को तेजी से कृत्रिम द्वीपों में भी बदल दिया। फिलीपींस, वियतनाम, ताईवान, मलयेशिया और ब्रुनेई भी दक्षिण चीन सागर पर चीन के दावों का कड़ा विरोध करते रहे हैं। इन देशों के समर्थन में अमेरिका भी आ गया है, उसने अपने युद्ध पोत भी इस क्षेत्र में भेजे हैं।