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हजारों लोगों को चूना लगाकर खड़ा किया राजमहल जैसा घर, ठाट-बाट देखकर रह जाअोगे दंग
फीचर टीम, अमर उजाला
Updated Sun, 09 Sep 2018 12:58 PM IST
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आज हम आपको एक ऐसे इंसान के बारे में बताने जा रहे हैं जो देश के हजारों लोगों को चूना लगाकर राजमहल जैसा आशियाना बना चुका है। इसके ठाट-बाट किसी राजा से कम नहीं थे। लेकन वो कहावत तो अापने सुनी ही होगी जो जैसे उगाएगा वैसा ही काटेगा। जी हां, इस शख्स को भी अपने कर्मो का फल मिलने का वक्त आ गया।
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देशभर में अलग-अलग हिस्सों पर इसने लोगों को ठगा। इसलिए अलग-अलग राज्यों की पुलिस इसे तलाशती फिर रही थी। रायपुर पुलिस को कड़ी मशक्कत के बाद इस शातिर ठग को पकड़ने में कामयाबी मिली। उप्र के गाजियाबाद में रायपुर पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद घेराबंदी कर उसे दबोचा।
अंतर्राज्यीय गिरोह के इस सरगना ने ठगी के पैसों से गाजियाबाद के रिहायशी इलाके में राजमहल जैसा आशियाना बना रखा है। उसकी लाइफ स्टाइल किसी रईसजादे से कम नहीं है। पुलिस टीम उसकी ठाट-बाट देखकर दंग रह गई। सरगना के पास से लैपटॉप, चार मोबाइल, आठ सिम, तीन एटीएम कार्ड, नकद 39 हजार 7 सौ रुपये, मल्टी बैंक सीएसपी के नाम के कई दस्तावेज मिले हैं।
अंतर्राज्यीय गिरोह के इस सरगना ने ठगी के पैसों से गाजियाबाद के रिहायशी इलाके में राजमहल जैसा आशियाना बना रखा है। उसकी लाइफ स्टाइल किसी रईसजादे से कम नहीं है। पुलिस टीम उसकी ठाट-बाट देखकर दंग रह गई। सरगना के पास से लैपटॉप, चार मोबाइल, आठ सिम, तीन एटीएम कार्ड, नकद 39 हजार 7 सौ रुपये, मल्टी बैंक सीएसपी के नाम के कई दस्तावेज मिले हैं।
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बैंक खाता खंगालने पर एक करोड़ के लेनदेन का हिसाब-किताब मिला है। अब दिल्ली पुलिस को भी उसकी तलाश है। पुलिस कंट्रोल रूम में शुक्रवार शाम को बिहार के नवादा जिले के मीरचक गांव निवासी धर्मेंद्र कुमार (35) को दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया।
गोबरा नवापारा निवासी सुरेंद्र कुमार साहू को पंडरीपानी में देना बैंक का ग्राहक सेवा केंद्र की आईडी दिलाने का झांसा देकर अपने आप को अजीत सिंह बताकर धर्मेंद्र ने 1 लाख 23 हजार 8 सौ रुपए ठग लिए थे, जबकि बलरामपुर का एक और बेरोजगार भी गैंग की ठगी का शिकार हुआ है।
गोबरा नवापारा निवासी सुरेंद्र कुमार साहू को पंडरीपानी में देना बैंक का ग्राहक सेवा केंद्र की आईडी दिलाने का झांसा देकर अपने आप को अजीत सिंह बताकर धर्मेंद्र ने 1 लाख 23 हजार 8 सौ रुपए ठग लिए थे, जबकि बलरामपुर का एक और बेरोजगार भी गैंग की ठगी का शिकार हुआ है।
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इस शातिर ठग ने अपने छिपने का ठिकाना भी बनाया था। यह जब भी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देता था तो उसके बाद अंडरग्राउंट हो जाता था। जब मामला थोड़ा ठंडा पड़ जाता था तो यह बाहर आता था। पिछले पांच साल से फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी का नेटवर्क पूरे देशभर संचालित करते आ रहे धर्मेंद्र ने ठगी के पैसे से दिल्ली, गाजियाबाद, चंडीगढ़, बिहार समेत कई राज्यों में छिपने का स्थायी ठिकाना बना रखा है।
दिल्ली में भी उसके खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज है, लेकिन अब तक वह गिरफ्तार नहीं हुआ। वह अपना ठिकाना बदल-बदल कर छुपता रहा, यही वजह है कि उसे अन्य राज्यों की पुलिस तलाश नहीं पाती थी। पहली बार वह रायपुर पुलिस के घेरे में फंसा। पुलिस के मुताबिक आरोपी धर्मेंद्र ने कई सरकारी व गैर सरकारी बैंकों में खाता खुलवा रखा है। ठगी का पूरा पैसे उसी खाते में वह जमा कराता था।
दिल्ली में भी उसके खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज है, लेकिन अब तक वह गिरफ्तार नहीं हुआ। वह अपना ठिकाना बदल-बदल कर छुपता रहा, यही वजह है कि उसे अन्य राज्यों की पुलिस तलाश नहीं पाती थी। पहली बार वह रायपुर पुलिस के घेरे में फंसा। पुलिस के मुताबिक आरोपी धर्मेंद्र ने कई सरकारी व गैर सरकारी बैंकों में खाता खुलवा रखा है। ठगी का पूरा पैसे उसी खाते में वह जमा कराता था।
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अपने शिकार को फंसाने के लिए वह ग्राहकों से कॉल कर पूरी डिटेल मल्टी सीएसपी के ई-मेल पर मंगाता था। मोबाइल पर मैसेज भेजकर वेबसाइट से फार्म डाउनलोड करवाता था। इसके बाद बैंक ग्राहक सेवा केंद्र की फ्रेंचाइजी की फीस खाते में जमा करवाने के बाद मोबाइल पर मैसेज कर आईडी एवं यूजर आईडी व पासवर्ड ई-मेल के जरिए भेजता था।
इस प्रक्रिया में करीब दो से तीन महीने का समय लग जाता था। जैसे ही ग्राहक पैसे वापस मांगने का दबाव बनाने लगते थे, वह अपना मोबाइल नंबर और वेबसाइट दोनों की बंद कर देता था।
इस प्रक्रिया में करीब दो से तीन महीने का समय लग जाता था। जैसे ही ग्राहक पैसे वापस मांगने का दबाव बनाने लगते थे, वह अपना मोबाइल नंबर और वेबसाइट दोनों की बंद कर देता था।