Indian Railways Train Coach Placing Rules in Hindi: जब भी हमें एक जगह से दूसरी जगह पर यात्रा करनी होती है तो हम अलग-अलग वाहनों से सफर करते हैं, लेकिन एक बड़ा तबका भारतीय ट्रेन से सफर करता हुआ नजर आता है। रोजाना काफी बड़ी संख्या में ट्रेनों का संचालन किया जाता है जिससे यात्री अपने गंतव्य तक पहुंच पाते हैं। ट्रेन में अलग-अलग तरह के कोच होते हैं जिसमें जनरल कोच से लेकर स्लिपर और एसी कोच शामिल होते हैं।
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Train Coach: कैसे तय होता है ट्रेन में कौन सा डिब्बा कहां लगेगा? यात्रीगण यहां जानें नियम
Mon, 30 Dec 2024 09:03 AM IST
प्रकाश चंद जोशी
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रकाश चंद जोशी
Updated Mon, 30 Dec 2024 09:03 AM IST
सार
भारतीय रेलवे कई ट्रेनों का संचालन रोजाना करता है जिससे यात्री एक शहर से दूसरे शहर तक जा पाते हैं। ट्रेन में यात्रा करने के लिए आपको टिकट लेना होता है जिसके बाद आप यात्रा कर सकते हैं।
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ट्रेम में कोच लगाने की पोजिशन कैसे तय होती है?
- फोटो : Amar Ujala
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ट्रेम में कोच लगाने की पोजिशन कैसे तय होती है?
- फोटो : AdobeStock
कैसे तय होती है डिब्बों की पोजिशन?
- सबसे पहले तो ये जान लें कि ट्रेन में जो डिब्बे लगाए जाते हैं वो किस हिसाब से लगेंगे, इसके लिए मानदंड तय है। इसमें सबसे ज्यादा यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखा जाता है और उस हिसाब से ही डिब्बों को ट्रेन में लगाया जाता है जिसमें कोचिंग प्लान की मदद ली जाती है। यहां पर ये भी जानते चलें कि डिब्बों को इस तरह से लगाया जाता है जिससे इमरजेंसी वाली स्थिति में यात्री आसानी से बाहर निकल सके।
ट्रेम में कोच लगाने की पोजिशन कैसे तय होती है?
- फोटो : Adobe Stock
क्या होता है कोचिंग प्लान?
- दरअसल, भारतीय रेलवे की तरफ से हर ट्रेन के लिए एक फिक्स्ड कोचिंग प्लान तैयार किया जाता है। ये प्लान वो प्लान होता है जिसके तहत ट्रेन के डिब्बों की पोजीशन तय की जाती है यानी इंजन के पीछे कौन से डिब्बे किस नंबर पर लगेंगे। ये ट्रेन में डिब्बों की कुल संख्या पर भी निर्भर करता है।
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ट्रेम में कोच लगाने की पोजिशन कैसे तय होती है?
- फोटो : AdobeStock
कैसी होती है डिब्बों की पोजिशन?
- बात अगर डिब्बों की पोजिशन की करें तो सारे डिब्बे इंजन के पीछे होते हैं जिसमें पहले इंजन के पास जनरन डिब्बा होता है
- फिर इसके बाद लगेज डिब्बा और उसके बाद एसी के डिब्बे (फर्स्ट, सेकंड और थर्ड एसी) होते हैं। इसके बाद स्लीपर का डिब्बा और ट्रेन के पीछे और कुछ जनरल कोड और फिर आखिर में गार्ड केबिन होता है।
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ट्रेम में कोच लगाने की पोजिशन कैसे तय होती है?
- फोटो : AdobeStock
इन बातों को जरूर जानें:-
- रेलवे का हर ट्रेन के लिए एक फिक्स्ड कोचिंग प्लान होता है जिसके मुताबिक, ट्रेन के डिब्बे लगाए जाते हैं
- ट्रेन के डिब्बों को लगाते समय सेफ्टी देखी जाती है
- डिब्बों को इस तरह लगाया जाता है जिससे इमरजेंसी की स्थिति में यात्री आसानी से बाहर निकल पाएं।