लौह, कांस्य और न्यूक्लियर एज से होते हुए अब हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युग में कदम रख चुके हैं। चैटजीपीटी, गूगल बार्ड जैसे एआई बेस्ड लैंग्वेज मॉडल टूल्स के दस्तक ने इस नए युग की शुरुआत कर दी है। आने वाले समय को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक नए सिरे से परिभाषित करेगा। बिजनेस, एजुकेशन, ई-कॉमर्स, गवर्नेंस से लेकर हर क्षेत्र में एआई का बड़े पैमाने पर उपयोग किए जाने की शुरुआत हो चुकी है। इसी के समानांतर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े खतरे भी सामने निकलकर आने लगे हैं।
AI Regulation: एआई को लेकर इस चिट्ठी ने उड़ाए दुनिया के होश, जरूर पढ़ें यह खबर
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े इन्हीं खतरों को देखते हुए अरबपति बिजनेसमैन एलन मस्क, मशहूर लेखक युवाल नोह हरारी, एआई से जुड़े कई वैज्ञानिकों, कंपनियों के सीईओ और संस्थापकों ने अप्रैल के महीने में एक ओपन लेटर जारी किया।
"पॉज जायंट एआई एक्सपेरिमेंट" नामक इस ओपन लेटर में यह साफ लिखा था कि उत्तम किस्म और शक्तिशाली एआई सिस्टम को तभी बनाया जाए, जब हम आश्वस्त हो जाएं कि उनका सकारात्मक असर समाज पर पड़ेगा। इस ओपन लेटर में इस बारे में भी लिखा था कि मानव बुद्धिमत्ता के साथ प्रतिस्पर्धा करने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मानवता और समाज के लिए कई खतरों को जन्म दे सकते हैं।
यही नहीं एआई बेस्ड चैटबॉट टूल्स समाज में दुष्प्रचार को बढ़ावा दे सकते हैं। इसका इस्तेमाल राजनीतिक हितों को साधने में किया जा सकता है, जिसका बुरा असर लोकतंत्र पर पड़ेगा। इससे समाज में ध्रुवीकरण बढ़ेगा। आज के समय एआई पर शोध करने वाली प्रयोगशालाएं कुछ भी कर सकने में सक्षम हैं। ऐसे में इनकी जांच की जानी चाहिए और जल्द से जल्द इन पर रोक लगाया जाना चाहिए।
इस ओपन लेटर के बाद दुनिया के कई देशों की सरकारें एआई के प्रति काफी संजीदा हो गई हैं। इटली ने ओपन एआई कंपनी को अपने देश से जुड़े डाटा को इकट्ठा करने पर रोक लगा दी है।
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