ऑक्सीजन... यह अपने आप में ही गॉड गिफ्टेड (भगवान की तरफ से दिया गया उपहार) है। ऑक्सीजन के बिना मानव जीवन की कल्पना असंभव है। कोरोना काल की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की उपयोगिता और असली महत्व देखने को मिला। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की मांग अचानक बढ़ गई और ये आंकड़ा इतनी तेजी से बढ़ा की समूचे भारत में ही ऑक्सीजन सिलेंडर की शॉर्टेज की स्थिति बन गई थी। कोरोना काल में लोगों के लिए वरदान कहें या अमृत समान ऑक्सीजन सिलेंडरों को लोग किसी भी दाम में खरीदकर घरों में रखने लगे। ताकि मुश्किल के समय में लोग इसका आसानी से इस्तेमाल कर सकें। यूं तो इसका उपयोग मरीजों को अस्पताल ले जाने के दौरान सांस लेने के लिए, सांस की बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए, साथ ही पर्वतारोहियों, स्कूबा गोताखोरों के सामान्य सांस लेने में सहायता के लिए किया जाता है। लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते इसकी मांग इतनी अधिक बढ़ गई कि लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर मिलने में बेहद परेशानी हुई। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसको बनाया कैसे जाता है? आज हम आपको बताएंगे कि इस जीवनदाता ऑक्सीजन सिलेंडर को कैसे तैयार किया जाता है?
Oxygen cylinder: क्या होते हैं ऑक्सिजन सिलेंडर और कैसे होता है इनका निर्माण? आसान शब्दों में समझें सबकुछ
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शेल (खोल)
ऑक्सीजन सिलेंडर का शेल यानी खोल एल्यूमीनियम या ब्रश्ड स्टील से बना होता है। इसे एक कन्वेयर बेल्ट पर आरी द्वारा मेटल की एक शीट को आकार में काटा जाता है। फिर मेटल की शीट को एक मेटल प्रेस के बीच से रखा जाता है, जो इसे एक कप के आकार में रोल कर देता है। इसके बाद कप का मुंह प्रेस की मदद से बंद कर दिया जाता है।
गरम करना
अब बारी आती है सिलेंडर को गर्म करने की। बेहतर मजबूती के लिए सिलेंडर को गर्म करने का प्रोसेस दो चरणों में किया जाता है। पहली है हीटिंग प्रोसेस और दूसरा है सिलिंडर को आर्टिफिशियली एजिंग प्रोसेस। हीटिंग प्रोसेस के लिए, मेटल के रोल को एक सॉल्यूशन फर्नेस में 1000 डिग्री फारेनहाइट तक गरम किया जाता है। साथ ही सभी मिश्रधातुओं को भी भट्टी में डाला जाता है और बाद में ठंडा किया जाता है। मेटल की दूसरी हीटिंग प्रोसेस के लिए इसे 350 डिग्री फारेनहाइट तक गर्म किए गए ओवन के बीच से भेजा जाता है। ये प्रोसेस मिश्र धातुओं को सिलेंडर को मजबूत बनाने के लिए प्रोसेस के साथ मजबूती से बांधने में मदद करता है।
नेक (गरदन)
धागे और सीलिंग सतहों को सिलेंडर में मशीनीकृत किया जाता है। ठोस मेटल के सिलेंडर को एक मिलिंग मशीन पर रखा जाता है। ये एक प्रेस है जो तीन दिशाओं में घूम सकती है। मशीन द्वारा सिलेंडर के केंद्र में एक छेद किया जाता है। फिर धागे को बनाने के लिए एक फॉर्म टूल का उपयोग किया जाता है, और ये फॉर्म मशीन एक गर्दन के आकार में सिलेंडर के शीर्ष पर होती है।
परिष्करण
सिलेंडर को हाइड्रोस्टेटिक परीक्षण के तहत भी रखा गया है। जहां यह जांचा जाता है कि सिलेंडर सभी प्रकार के अत्यधिक दबाव का सामना कर सकता है या नहीं। यदि ये 30 सेकंड के अंदर एक निर्दिष्ट आकार से अधिक फैलता है, तो सिलेंडर को अस्वीकार कर दिया जाता है। डिफेक्टेड सिलेंडर को फिर से एक आरी के नीचे रखा जाता है और रीसाइकल किया जाता है। सिलेंडर की सतह को चिकना बनाने के लिए सिलेंडर को एक स्वचालित सैंडर के तहत एक क्षैतिज (हॉरिजॉन्टल) स्थिति में एक कन्वेयर बेल्ट पर भेजा जाता है। इसके बाद सिलेंडर को पेंट किया जाता है, और ग्राहक के निर्देशों के अनुसार एक टोपी या वाल्व लगाया जाता है।