Social Media: बच्चों को चिंता और अवसाद में धकेल रहा सोशल मीडिया, वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट ने दी चेतावनी

Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीNitish Kumar
Thu, 19 Mar 2026 06:29 PM IST
सार

World Happiness Report 2026:

वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2026 में खुलासा हुआ है कि सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल बच्चों और किशोरों की मानसिक सेहत पर गंभीर असर डाल रहा है। ज्यादा समय ऑनलाइन बिताने वाले युवाओं में चिंता, अवसाद और जीवन से असंतोष तेजी से बढ़ रहा है।

social media impact children mental health world happiness report
सोशल मीडिया से किशोरों में बढ़ रहा अवसाद - फोटो : Adobe Stock

    सोशल मीडिया की चमक-धमक वाली दुनिया हमारे बच्चों के भीतर एक गहरा अंधेरा पैदा कर रही है। लंबे समय से इस पर बहस चल रही थी, लेकिन अब 'वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2026' के आंकड़ों ने पुष्टि कर दी है कि यह समस्या उम्मीद से कहीं ज्यादा गंभीर है। रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों और किशोरों में बढ़ती घबराहट, अवसाद और जीवन के प्रति असंतोष का सीधा संबंध सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल से है।

    सोशल मीडिया
    सोशल मीडिया - फोटो : AI

    5 घंटे से ज्यादा समय बिताने पर गंभीर नुकसान

    रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जो किशोर दिन में 5 घंटे से ज्यादा समय फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, यूट्यूब, एक्स (X) या स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बिताते हैं, उनमें डिप्रेशन और बेचैनी के लक्षण उन बच्चों की तुलना में कहीं ज्यादा देखे गए हैं जो इनका इस्तेमाल कम करते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं रह गई है, बल्कि अब यह पूरी आबादी के मानसिक स्वास्थ्य के ग्राफ को नीचे गिरा रही है।

    सोशल मीडिया (सांकेतिक)
    सोशल मीडिया (सांकेतिक) - फोटो : एआई

    2010 के बाद से शुरू हुआ सोशल मीडिया का दौर

    विशेषज्ञों ने गौर किया कि साल 2010 के आसपास से युवाओं के सुख-चैन में गिरावट आनी शुरू हुई थी। यह वही दौर था जब स्मार्टफोन हर हाथ में पहुंचने लगे थे और सोशल मीडिया 24 घंटे की लत बन गया था। विशेष रूप से पश्चिमी देशों और अंग्रेजी बोलने वाले क्षेत्रों में 25 साल से कम उम्र के युवाओं की जीवन संतुष्टि में सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई है।

    रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया का सबसे बुरा असर किशोरियों पर पड़ रहा है। इन्फ्लुएंसर कल्चर और दूसरों से अपनी तुलना करने की मजबूरी ने लड़कियों में बॉडी-इमेज (अपने शरीर को लेकर हीन भावना) और कम आत्मसम्मान जैसी समस्याएं पैदा कर दी हैं। एल्गोरिदम द्वारा दिखाए जाने वाले वीडियो और फोटो उन्हें हर वक्त यह अहसास कराते हैं कि वे दूसरों से पीछे हैं।

    और पढ़ें...
    Login or Signup
    अपना शहर चुनें