80 अरब डॉलर डूबे और सपना टूटा: मार्क जकरबर्ग ने किया मेटावर्स बंद करने का फैसला, सामने आई अंदर की कड़वी सच्चाई
Metaverse Shutdown:
मार्क जकरबर्ग का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट मेटावर्स बुरी तरह फ्लॉप हो गया है। अरबों डॉलर के नुकसान के कारण कंपनी ने इसे बंद करने का एलान किया है। अब मेटा का पूरा ध्यान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्मार्ट चश्मों पर है।

विस्तार
जिस 'मेटावर्स' के लिए मार्क जकरबर्ग ने अपनी कंपनी 'फेसबुक' का नाम बदलकर 'मेटा' कर दिया था, वह सपना अब जमींदोज हो गया है। पिछले पांच साल में पानी की तरह अरबों डॉलर बहाने के बाद, मेटा ने आखिरकार अपनी वर्चुअल दुनिया पर ताला लगाने का फैसला किया है। यह खबर तकनीकी जगत के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि ज़करबर्ग को उम्मीद थी कि भविष्य में लोग असल दुनिया के बजाय इसी डिजिटल दुनिया में रहेंगे।
वर्चुअल रियलिटी प्लेटफॉर्म बंद करेगी कंपनी
मेटा ने घोषणा की है कि वह अपने सोशल वर्चुअल रियलिटी (VR) प्लेटफॉर्म होराइजन वर्ल्ड्स (Horizon Worlds) को इस साल जून तक बंद कर देगा। मार्च का अंत तक यह एप क्वेस्ट (Quest) स्टोर से हटा दिया जाएगा। जबकि जून 15, 2026 तक VR डिवाइसेस पर इसका सपोर्ट पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इसके बाद यूजर्स इसे केवल एक मोबाइल एप की तरह इस्तेमाल कर सकेंगे, जिसका मतलब है कि इसका वर्चुअल अहसास खत्म हो जाएगा।
80 अरब डॉलर का महा-नुकसान
मेटावर्स के चक्कर में कंपनी को अब तक 80 अरब डॉलर (लगभग 6.6 लाख करोड़ रुपये) का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। साल 2020 से अब तक मेटा की रियलिटी लैब्स डिवीजन मुनाफे के बजाय केवल घाटा ही दे रही थी। इस नाकामी का असर कर्मचारियों पर भी पड़ा है। जनवरी 2026 में 1,000 लोगों को निकाला गया और चर्चा है कि आने वाले समय में 15,000 और लोगों की छंटनी हो सकती है।
क्या था मेटावर्स?
मेटावर्स एक ऐसी वर्चुअल दुनिया का कॉन्सेप्ट था, जहां लोग डिजिटल अवतार के जरिए मिल सकते हैं, काम कर सकते हैं और गेम खेल सकते हैं। इसके लिए खास वीआर हेडसेट का इस्तेमाल किया जाता था। Meta ने 2021 में इसे लॉन्च किया था और इसे भविष्य की इंटरनेट दुनिया बताया था।
क्यों फेल हुआ मेटावर्स?
मेटा की रियलिटी लैब्स के पूर्व सदस्य वसुमान मोजा ने इस असफलता के पीछे की अंदरूनी कहानी साझा की है। उन्होंने सीधे तौर पर मिडिल मैनेजमेंट को जिम्मेदार ठहराया। वसुमान के अनुसार, मैनेजमेंट यह समझ ही नहीं पाया कि आज का युवा तकनीक का इस्तेमाल कैसे करता है।
वसुमान ने बताया कि उन्होंने एक उपयोगी टूल बनाया था जिसे गेम डेवलपर्स की जरूरत थी, लेकिन मैनेजमेंट ने उसे बंद कर दिया और उन्हें एक ऐसे प्रोजेक्ट पर लगा दिया जिसकी किसी को जरूरत नहीं थी। उन्होंने कहा कि हर टीम में ऐसा ही हुआ, यही वजह है कि 80 अरब डॉलर खर्च करने के बाद भी यह प्रोजेक्ट कभी सफल नहीं हो पाया।
अब AI और स्मार्ट चश्मों पर दांव
भले ही मेटावर्स फ्लॉप हो गया हो, लेकिन मेटा के स्मार्ट चश्मे (Ray-Ban Smartglasses) काफी सफल रहे हैं। कंपनी अब तक 70 लाख से ज्यादा चश्मे बेच चुकी है। अब ज़करबर्ग का पूरा ध्यान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर है।
हालांकि, यहां भी राह आसान नहीं है। कंपनी का लेटेस्ट एआई मॉडल एवोकाडो (Avocado) इंटरनल टेस्ट में फेल होने के कारण टाल दिया गया है। साथ ही, मेटा ने मोल्टबुक (Moltbook) नाम के एक एआई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को खरीदा है ताकि वे अपनी एआई क्षमताओं को और मजबूत कर सकें।
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