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काम के बिना मोक्ष संभव नहीं, आखिर क्यों

Fri, 16 Dec 2016 11:45 AM IST
राकेश्ा झा / टीम डिजिटल, अमर उजाला, दिल्ली।
राकेश्ा झा / टीम डिजिटल, अमर उजाला, दिल्ली। Updated Fri, 16 Dec 2016 11:45 AM IST
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why sex is important for moksha
मोक्ष योग

शास्‍त्रों में चार पुरूषार्थ बताए गए हैं ज‌िनमें तीसरा पुरूषार्थ काम है। माना जाता है क‌ि इसके ब‌िना मोक्ष की प्राप्त‌ि संभव नहीं है। जबक‌ि एक तरफ शास्‍त्र कहता है ब्रह्मचर्य का पालन जरूरी है। ऐसे में ब्रह्मचर्य और काम में से क‌िसी चुना जाए ज‌िससे मोक्ष की प्राप्त‌ि संभव हो पाए।

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काम के ब‌िना मोक्ष संभव नहीं, आख‌िर क्यों

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ध्‍यान

शास्‍त्रों में पुरुषों के ल‌िए चार पुरुषार्थ बताए गए हैं। इन चार पुरुषार्थ के ब‌िना मनुष्य योनी में जन्म का कोई मतलब नहीं है। शास्‍त्र कहता है क‌ि मनुष्य योनी में जन्म लेने वाले हर जीव का पहला उद्देश्य धर्म है, दूसरा अर्थ यानी धन अर्जन है तीसरा उद्देश्य काम है ज‌िसका मतलब सुख है ज‌िसमें यौन सुख भी शाम‌िल है।

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ध्‍यान

दूसरी ओर शास्‍त्रों में यह भी कहा गया है क‌ि मोक्ष की कामना रखने वाले को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाह‌िए। अगर इस बात को पूरी तरह मान ल‌िया जा तो तीसरे पुरुषार्थ का कोई मतलब नहीं हर जाता क्योंक‌ि ब्रह्मचर्य का पालन करने पर तीसरा पुरुषार्थ छूट जाएगा ऐसे में मोक्ष प्राप्त‌ि का उद्देश्य कैसे पूरा होगा।

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ध्यान

अब शास्‍त्रों के व‌िधान का ध्यान से अध्ययन करें तो आप पाएंगे क‌ि ब्रह्मचर्य के न‌ियम का मतलब है संयम यानी काम भावना का संतुलन और इसका पालन तमाम उम्र जरूरी है। सामाज‌िक व्यवस्‍था में चार आश्रम की बात की जाती है ब्रह्मचर्य, गृहस्‍थ, वाणप्रस्‍थ और संन्यास। यानी जीवन के पहले भाग में जब आप श‌िक्षा और कैर‌ियर के ल‌िए प्रयास कर रहे हैं उस समय आपको ब्रह्मचर्य का पालन पूर्णतः करना चाह‌िए तभी आप सफलता की ओर अग्रसर होंगे।

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ध्यान
इसके बाद गृहस्‍थ आश्रम में आते हैं जहां जीवन का दूसरा उद्देश्य अर्थ प्राप्त‌ि जरूरी हो जाता है ताक‌ि आप अपने जीवन की जरूरतों को पूरा कर सकें और सुखी जीवन का आनंद प्राप्‍त कर सकें। यहां सृष्ट‌ि के व‌िकास के ल‌िए और मोक्ष की प्राप्त‌ि के ल‌िए काम की जरूरत होती है। काम से ही संतान सुख की प्राप्त‌ि होती है।
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