भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से सीखें सफल होने के 5 सूत्र
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पहला मंत्र-शान्त स्वभाव रखकर काम करना
वैसे तो भगवान श्रीकृष्ण बचपन में बहुत नटखट स्वभाव के थे। विपरीत परिस्थितियां आने पर उनका स्वभाव हमेशा शान्त रहता था। कृष्ण जी भगवान विष्णु के अवतार थे और वे यह बात जानते भी थे कि कंस मामा उन्हें बार-बार मारना चाहते थे, फिर भी वे शांत रहते थे और समय आने पर कंस के हर प्रहार का मुंह तोड़ दिया। इससे सीख मिलती है कि कठिन समय में भी अपने शान्त स्वभाव का त्याग नहीं करना चाहिए।
दूसरा मंत्र-साधारण जीवन जीना
भगवान श्रीकृष्ण हमेशा साधारण जीवन जीने में विश्वास करते थे। गोकुल के राजघराने में परविश होने के बावजूद वह अन्य सामान्य बालको के साथ रहते, खेलते और घूमते रहते थे। उन्हें कभी भी अपने राजघराने का घमंड नहीं था।
तीसरा मंत्र- कभी हार न मानना
कभी भी उनका मन बुरा समय आने पर घबराता नहीं था। वह विपरीत परिस्थितियों का डटकर मुकाबला करते थे। उनका मनाना था बुरे समय में विवेक पूर्वक काम करना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने कभी भी हार न मनाने का संदेश दिया था। अंत का प्रयास करते रहना चाहिए, भले ही परिणाम हमारे पक्ष में क्यों न हो।
चौथा मंत्र-दोस्ती निभाना
कृष्ण और सुदामा की दोस्ती को कौन नहीं जानता? यह दोस्ती महज दोनों के प्रेम के कारण नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति आदर के कारण भी प्रसिद्ध है। किंतु आज के जमाने में दोस्ती के असली मायने कोई नहीं जानता। श्रीकृष्ण ने हमेशा अपने मित्र सुदामा और अर्जुन का साथ दिया था।