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जब संत तुकाराम ने अपने शिष्य से कहा कि तुम एक हफ्ते में मर जाओगे
जीवन में हर कोई सुखी और सफल व्यक्ति बनना चाहता है, इसके लिए लोग खूब मेहनत करते हैं। लेकिन मेहनत के साथ-साथ हमारा व्यवहार भी हमारे जीवन को सुखी और सफल बनाता है। इसलिए हमें मेहनत के साथ-साथ व्यवहार पर भी ध्यान देना चाहिए। एक ऐसे ही संत थे तुकाराम, संत तुकाराम के जीवन से जुड़े कई ऐसी कहानियां हैं, जिनमें सुखी और सफल जीवन के मंत्र छिपे हैं। जो लोग इन जीवन मंत्रों को अपने जीवन में अपनाते हैं उनकी जीवन की कई परेशानियां खत्म हो सकती हैं। आइए जानते हैं संत तुकाराम और उनके शिष्य का प्रसंग।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
प्रसंग के मुताबकि संत तुकाराम के कई शिष्य थे। उनमें एक शिष्य बहुत ही क्रोधी स्वभाव का था। बात-बात पर उसे गुस्सा आ जाता था। एक दिन क्रोधी शिष्य ने अपने गुरु से कहा कि गुरुजी आप कितना शांत रहते हैं, किसी पर गुस्सा नहीं करते हैं। मुझे आपकी तरह बनना है, कृपया मुझे रास्ता बताएं। संत तुकाराम ने अपने शिष्य से कहा कि तुम्हारा स्वभाव बदल पाना असंभव है। क्योंकि तुम्हारे पास ज्यादा वक्त नहीं है, एक सप्ताह में तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
संत तुकाराम की मुंह से अपनी मृत्यु की बात सुनते ही शिष्य दुखी हो गया औक अपने गुरु की बातों पर विश्वास करके वह वहां से चला गया। उस दिन के बाद वह अपने सभी साथियों के साथ प्रेम से रहने लगा। किसी पर भी क्रोध करना छोड़ दिया। शिष्य यह सोच रहा था कि जब कुछ दिन ही और जीना है तो सभी के साथ प्रेम से रहना ही अच्छा होगा। वह दिन-रात पूजा-पाठ करने लगा और जिन लोगों के साथ भी वह बुरा व्यवहार करता उनसे तुरंत माफी मांग लेता।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
सप्ताह के अंतिम दिन वह अपने गुरुजी के पास जाने को सोचा ताकि उनका आशीर्वाद ले सके। शिष्य जब अपने गुरु तुकाराम के पास पहुंचा तो उन्होंने पूछा कि तुम्हारा एक सप्ताह कैसे व्यतीत हुआ। क्या तुमने किसी पर गुस्सा किया। शिष्य ने जवाब दिया कि नहीं, मैं इस पूरे सप्ताह सभी के साथ प्रेम से रहा। मेरे पास वक्त कम है, इसलिए मैं सभी के साथ अच्छी तरह व्यवहार कर रहा था। और साथ ही जिन लोगों का मैंने मन दुखाया था, उनसे भी क्षमा याचना की।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
संत तुकाराम ने शिष्य को बताया कि बस यही अच्छा स्वभाव बनाने का तरीका है। जब मैं जानता हूं कि मेरी मृत्यु किसी भी पल हो सकती है तो मैं सभी से प्रेमपूर्वक ही बर्ताव करता हूं। साथ ही किसी पर गुस्सा भी नहीं करता हूं। संत तुकाराम की बातों से शिष्य को समझ आया कि उन्होंने उसे ये सीख देने के लिए मृत्यु का डर दिखाया है।
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