अलीबाबा के सह-संस्थापक और चीन के जाने-माने कारोबारी जैक मा ने भले ही अपने 55वें जन्मदिन पर अलीबाबा कंपनी के पद से इस्तीफा दे दिया हो लेकिन अलीबाबा को हमेशा जैक मा के नाम से जाना जाएगा। आइए जानते है कि जैक मा के बारे में वो 5 बातें जो उन्हें बाकियों से अलग बनाती हैं।
जैक मा को सबसे अलग बनाती है उनकी ये 5 बातें
फॉर्ब्स की 2017 की सूची के अनुसार जैक मा चीन के तीसरे सबसे धनी व्यक्ति हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चीन के एक गरीब परिवार में जन्मे जैक मा ने बतौर अंग्रेजी शिक्षक अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्हें 30 नौकरियों से हटाया जा चुका है परन्तु कंप्यूटिंग से कोई पुराना वास्ता नहीं होने के बावजूद भी जैक मा ने अपने अपार्टमेंट में ही अलीबाबा की नींव रखी।
फॉर्ब्स की 2017 की सूची के अनुसार, जैक मा चीन के तीसरे सबसे धनी व्यक्ति हैं। फॉर्ब्स में उनकी दौलत 36.6 अरब डॉलर बताई गई थी और 420 अरब डॉलर की कंपनी अलीबाबा में जैक मा की लगभग नौ प्रतिशत हिस्सेदारी है।ब्लैक फ्राइडे और साइबर मंडे जैसे शॉपिंग इवेंट के जरिए जैक मा ने अमरीका में भी अपनी धाक जमाई।
शिक्षा की ओर वापसी
जैक मा ने दस साल पहले अपने वारिस के बारे में सोचना शुरु किया था. साल 2013 में उन्होंने बोर्ड अध्यक्ष बनने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की कुर्सी छोड़ी। उन्होंने इसके बाद जैक मा फाउंडेशन के जरिए चीन के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए काम शुरू किया। अलीबाबा के संस्थापक साझेदार की भूमिका में रहते हुए जैक मा अब शिक्षा की ओर लौटना चाहते हैं। इस सिलसिले में उन्होंने ब्लूमबर्ग को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि कई चीजें हैं, जिन्हें वो बिल गेट्स से सीख सकते हैं।
ट्रंप को पंसद हैं जैक मा
पिछले साल जनवरी में जैक मा ने कहा था कि न्यूयॉर्क में निर्वाचित राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के साथ उनकी मुलाक़ात बहुत अच्छी रही थी। मुलाक़ात के बाद जैक मा ने कहा था कि ट्रंप और वो दोनों सहमत हुए कि अमरीका-चीन संबंध मजबूत, अधिक दोस्ताना और बेहतर होने चाहिए। तब ट्रंप ने जैक मा की ये कहते हुए तारीफ़ की थी कि वो एक महान उद्यमी हैं जो चीन और अमरीका दोनों से प्यार करते हैं। लेकिन जैक मा ऐसे समय कुर्सी छोड़ रहे हैं जब चीन के निर्माता और कारोबार, अमरीका के साथ ट्रेड वॉर की वजह से कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।