आदि शंकराचार्य का भारतीय सनातन परंपरा के विकास, प्रचार व प्रसार में अहम योगदान रहा है। आदि शंकाराचार्य ने देश में 12 ज्योतिर्लिंगों और भारत के चारों कोनों में चार मठों की स्थापना की थी। ये चार मठ हैं- श्रृंगेरी मठ, गोवर्द्धन मठ, शारदा मठ और ज्योतिर्मठ। हर साल वैशाख शुक्ल पक्ष की पचंमी तिथि को आदि शंकराचार्य की जयंती मनाई जाती है। आइए, आज जानते हैं आदि शंकराचार्य जी के अनमोल विचार...
Adi Shankaracharya Jayanti 2020: आदि शंकराचार्य जी के अनमोल विचार
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- मंदिर वही पहुंचता है जो धन्यवाद देने जाता हैं, मांगने नहीं।
- मोह से भरा हुआ इंसान एक सपने की तरह है, यह तब तक ही सच लगता है जब तक आप अज्ञान की नींद में सो रहे होते हैं। जब नींद खुलती है तो इसकी कोई सत्ता नही रह जाती है।
- जिस तरह एक प्रज्वलित दीपक के चमकने के लिए दूसरे दीपक की जरुरत नहीं होती है। उसी तरह आत्मा जो खुद ज्ञान स्वरूप है उसे और किसी ज्ञान कि आवश्यकता नही होती है, अपने खुद के ज्ञान के लिए।
- तीर्थ करने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। सबसे अच्छा और बड़ा तीर्थ आपका अपना मन है, जिसे विशेष रूप से शुद्ध किया गया हो।