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यह 10 स्थान आज भी बताते हैं कि यहां मिले थे राधा कृष्ण
Fri, 04 Sep 2015 04:42 PM IST
Updated Fri, 04 Sep 2015 04:42 PM IST
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भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं में सबसे सुंदर प्रसंग राधा कृष्ण के मिलन
और प्रेम का है। ऐसे में जन्माष्टमी के मौके पर इनकी लीलाओं की झलक न हो तो
भक्ति का आनंद अधूरा सा लगेगा। इसलिए आइए देखें भगवान श्री कृष्ण और
देवी राधा की लीलाओं को औ जानें कहां-कहां कैसे मिले थे राधा कृष्ण।
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यह है भंडीर वन। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार यहां पर भगवान श्री कृष्ण और राधा की पहली अलौकिक भेंट हुई थी। एक बार श्री कृष्ण को गोद में लेकर वसुदेव जी यहां से गुजर रहे थे तभी देवी राधा वहां प्रकट हुई और ब्रह्मा जी को पुरोहित बनाकर श्री कृष्ण से विवाह किया था। इस घटना का उल्लेख ब्रह्मवैवर्त पुराण में मिलता है।
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यह है वृंदावन में यमुना तट पर स्थित निधिवन। कहते हैं इस वन में जितने वृक्ष हैं वह सभी गोपियां हैं जो रात के समय अपने वास्तविक रुप में आकर रास लीला करते हैं। क्योंकि यहीं पर भगवान श्री कृष्ण ने कार्तिक पूर्णिमा की उज्जवल चांदनी में रास का आयोजन किया था।
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एक कथा यह भी है कि बाल कृष्ण से विवाह से पूर्व देवी राधा श्री कृष्ण से लौकिक रुप में मिल चुकी थी। यह अवसर था श्री कृष्ण के जन्म का उत्सव। इस समय श्री राधा जी जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए अपनी माता कीर्ति के साथ नंदगांव आई थी यहां श्री कृष्ण पालने में झूल रहे थे और राधा माता की गोद में थी। उस समय बालक श्री कृष्ण एक दिन के और देवी राधा ग्यारह माह की थी।
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संकेत में स्थित यह हैं संकेत बिहारी जी। नंद गांव से चार मील की दूरी पर बसा है बरसाना गांव। बरसाना राधा जी की जन्मस्थली है। नंदगांव और बरसाना के बीच में एक गांव है 'संकेत' कहलाता है। कहते हैं लौकिक जगत में श्री कृष्ण और राधा की पहली मुलाकात यहीं पर हुई थी। यहीं से श्री कृष्ण और राधा का लौकिक प्रेम शुरु हुआ था। इसलिए यह स्थान राधा कृष्ण के भक्तों के लिए बहुत ही खास माना जाता है।
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