चंद्र ग्रहण का वैज्ञानिक और ज्योतिषीय नजरिए से विशेष महत्व होता है। चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जबकि धार्मिक और ज्योतिष के नजरिए से ग्रहण का व्यक्ति के जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ता है। इस साल शुक्रवार, 10 जनवरी को चंद्र ग्रहण लग रहा है। चंद्र ग्रहण की अवधी लगभग 4 घंटे से अधिक की रहेगी और यह सिर्फ एक छाया चंद्र ग्रहण है। भारतीय समयानुसार चंद्र ग्रहण रात्रि 10 बजकर 47 मिनट पर शुरू होगा और 2 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। अगली स्लाइड्स में समझते हैं ग्रहण को धार्मिक, विज्ञान और ज्योतिषीय नजरिए से...
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क्या होता है चंद्र ग्रहण, क्यों लगता है? जानें धार्मिक, विज्ञान और ज्योतिषीय नजरिए से
Tue, 07 Jan 2020 07:27 PM IST
योगेश जोशी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश जोशी
Updated Tue, 07 Jan 2020 07:27 PM IST
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धार्मिक मान्यताएं
- पौराणिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय देवताओं और दानवों के बीच अमृत पान के लिए युद्ध शुरू होने लगा, तब इस स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया। मोहिनी के इस मनमोहक रूप से सभी देवता और दानव उन पर मोहित हो उठे और तब भगवान विष्णु ने देवताओं और दानवों को अलग-अलग बिठा दिया। लेकिन ठीक उसी समय एक असुर भगवान विष्णु की इस चाल को समझ गया और वह असुर छल से देवताओं की लाइन में जाकर बैठ गया और अमृत पान करने लगा।
चंद्रमा और सूर्य ने देखा इस दानव को
- देवताओं की पंक्ति में बैठे सूर्य और चंद्रमा ने इस दानव को ऐसा करते हुए देख लिया और इस बात की जानकारी भगवान विष्णु को दे दी, जिसके बाद भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से दानव का सिर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन तब तक उस दानव ने अमृत को गले तक उतार लिया था, जिसके कारण उसकी मृत्यु नहीं हुई और उसके सिर वाला भाग राहू और धड़ वाला भाग केतू के नाम से जाना गया। इसी वजह से राहू और केतु सूर्य और चंद्रमा को अपना शत्रु मानते हैं। पूर्णिमा और अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा का ग्रास कर लेते हैं। इसे सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण कहते हैं।
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ज्योतिषशास्त्र के अनुसार चंद्र ग्रहण
- ज्योतिषशास्त्र के अनुसार राहु और केतु को छाया ग्रह माना गया है। कुंडली में राहु- केतु अगर बुरे भाव में जाकर बैठ जाएं तो उसको जीवन में बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इनकी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सूर्य और चंद्रमा भी इसके प्रभाव से नहीं बच पाते। अगली स्लाइड में वैज्ञानिक नजरिए से जानिए कैसे लगता है चंद्र ग्रहण....
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- फोटो : ANI
कैसे लगता चंद्र ग्रहण- वैज्ञानिक नजरिया
- विज्ञान के अनुसार पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है जबकि चंद्रमा पृथ्वी के चारो ओर घूमती है। पृथ्वी और चंद्रमा घूमते-घूमते एक समय पर ऐसे स्थान पर आ जाते हैं जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा तीनो एक सीध में रहते हैं। जब पृथ्वी धूमते-धूमते सूर्य व चंद्रमा के बीच में आ जाती है। चंद्रमा की इस स्थिति में पृथ्वी की ओट में पूरी तरह छिप जाता है और उस पर सूर्य की रोशनी नहीं पड़ पाती है इसे चंद्र ग्रहण कहते है।