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तो इस कारण से तुलसी भगवान विष्णु को देवी लक्ष्मी से भी प्रिय है

Thu, 10 Nov 2016 10:50 AM IST
राकेश्ा झा / टीम डिजिटल, अमर उजाला, दिल्ली।
राकेश्ा झा / टीम डिजिटल, अमर उजाला, दिल्ली। Updated Thu, 10 Nov 2016 10:50 AM IST
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tulsi vivaah story dev pravodhni ekadashi
तुलसी व‌िवाह

भगवान व‌िष्‍णु ने गीता में कहा है क‌ि कर्मों के फल से मानव ही नहीं बल्क‌ि पूरी प्रकृत‌ि और ईश्वर भी बंधे हैं और उन्हें भी अपने कर्मों के अनुसार सजा और उत्तम फल म‌िलता है। इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है भगवान व‌िष्‍णु का तुलसी से व‌िवाह।

एक पाप के कारण भगवान व‌िष्‍णु को करना पड़ा था तुलसी से व‌िवाह

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तुलसी पत्‍ता

पुराणों में कथा है क‌ि भगवान व‌‌िष्‍णु की पूजा में तुलसी का प्रयोग इसल‌िए क‌िया जाता है क्योंक‌ि भगवान व‌िष्‍णु ने तुलसी के साथ एक पाप पूर्ण काम क‌िया था और इस पाप से मुक्त‌ि के ल‌िए उन्हें तुलसी से व‌िवाह करके यह वरदान देना पड़ा था क‌ि ब‌िना तुलसी पत्ता के मेरी पूजा अधूरी मानी जाएगी। इसल‌िए भगवान व‌िष्‍णु की पूजा में तुलसी का होना अन‌िवार्य है।

एक पाप के कारण भगवान व‌िष्‍णु को करना पड़ा था तुलसी से व‌िवाह

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भगवान विष्‍णु
भगवान व‌िष्‍णु को अपने वरदान के कारण ज‌िस द‌िन तुलसी से व‌िवाह करना पड़ा था वह कार्त‌िक शुक्ल एकादशी त‌िथी मानी जाती है। इस द‌िन भगवान व‌िष्‍णु चार महीने शयन के बाद जगते हैं और तुलसी के साथ इनका व‌िवाह संपन्न होता है। इस वर्ष यह त‌िथ‌ि 10 नवंबर को है।
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एक पाप के कारण भगवान व‌िष्‍णु को करना पड़ा था तुलसी से व‌िवाह

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श‌िव पूजा में तुलसी - फोटो : tulsi shiv puja

भगवान व‌िष्‍णु को ज‌िस पाप के कारण तुलसी से व‌िवाह करना पड़ा था उसका संबंध जलंधर नामक असुर से है। जलंधर भगवान श‌िव का अंश था जो सागर से उत्पन्न हुआ था इसल‌िए देवी लक्ष्मी का भाई माना जाता है। जलंधर का व‌िवाह वृंदा नाम की कन्या से हुआ था जो भगवान व‌िष्‍णु की परम भक्त थी।

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श‌िव पार्वती

वृंदा की भक्त‌ि और सतीत्व के बल पर जलंधर अजेय हो गया था और देवताओं को पीड़‌ित करने लगा था। जलंधर ने देवी पार्वती पर जब कुदृष्ट‌ि डाली तब त्र‌िदेवों ने जलंधर के वध की योजना बनाई। इस योजना के तहत भगवान श‌िव ने जलंधर से युद्ध क‌िया और भगवान व‌िष्‍णु ने वृंदा का सतीत्व भंग।

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