{"_id":"5822f6564f1c1bf67eb394d1","slug":"tulsi-vivaah-story-dev-pravodhni-ekadashi","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"तो इस कारण से तुलसी भगवान विष्णु को देवी लक्ष्मी से भी प्रिय है","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
तो इस कारण से तुलसी भगवान विष्णु को देवी लक्ष्मी से भी प्रिय है
Thu, 10 Nov 2016 10:50 AM IST
राकेश्ा झा / टीम डिजिटल, अमर उजाला, दिल्ली।
राकेश्ा झा / टीम डिजिटल, अमर उजाला, दिल्ली।
Updated Thu, 10 Nov 2016 10:50 AM IST
विज्ञापन
1 of 7
तुलसी विवाह
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
भगवान विष्णु ने गीता में कहा है कि कर्मों के फल से मानव ही नहीं बल्कि पूरी प्रकृति और ईश्वर भी बंधे हैं और उन्हें भी अपने कर्मों के अनुसार सजा और उत्तम फल मिलता है। इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है भगवान विष्णु का तुलसी से विवाह।
एक पाप के कारण भगवान विष्णु को करना पड़ा था तुलसी से विवाह
2 of 7
तुलसी पत्ता
पुराणों में कथा है कि भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का प्रयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि भगवान विष्णु ने तुलसी के साथ एक पाप पूर्ण काम किया था और इस पाप से मुक्ति के लिए उन्हें तुलसी से विवाह करके यह वरदान देना पड़ा था कि बिना तुलसी पत्ता के मेरी पूजा अधूरी मानी जाएगी। इसलिए भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का होना अनिवार्य है।
एक पाप के कारण भगवान विष्णु को करना पड़ा था तुलसी से विवाह
3 of 7
भगवान विष्णु
भगवान विष्णु को अपने वरदान के कारण जिस दिन तुलसी से विवाह करना पड़ा था वह कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथी मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने शयन के बाद जगते हैं और तुलसी के साथ इनका विवाह संपन्न होता है। इस वर्ष यह तिथि 10 नवंबर को है।
विज्ञापन
विज्ञापन
एक पाप के कारण भगवान विष्णु को करना पड़ा था तुलसी से विवाह
4 of 7
शिव पूजा में तुलसी
- फोटो : tulsi shiv puja
भगवान विष्णु को जिस पाप के कारण तुलसी से विवाह करना पड़ा था उसका संबंध जलंधर नामक असुर से है। जलंधर भगवान शिव का अंश था जो सागर से उत्पन्न हुआ था इसलिए देवी लक्ष्मी का भाई माना जाता है। जलंधर का विवाह वृंदा नाम की कन्या से हुआ था जो भगवान विष्णु की परम भक्त थी।
विज्ञापन
एक पाप के कारण भगवान विष्णु को करना पड़ा था तुलसी से विवाह
5 of 7
शिव पार्वती
वृंदा की भक्ति और सतीत्व के बल पर जलंधर अजेय हो गया था और देवताओं को पीड़ित करने लगा था। जलंधर ने देवी पार्वती पर जब कुदृष्टि डाली तब त्रिदेवों ने जलंधर के वध की योजना बनाई। इस योजना के तहत भगवान शिव ने जलंधर से युद्ध किया और भगवान विष्णु ने वृंदा का सतीत्व भंग।
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।