जन्मभूमि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनने जा रहा है। अगले महीने की 5 तारीख को मंदिर का भूमि पूजन होगा। भगवान श्रीराम हिन्दुओं की आस्था के महान प्रतीक हैं। आइए जानते हैं उनसे जुड़े ऐसे दस रहस्य जिनसे शायद ही आप रूबरू होंगे।
प्रभु श्रीराम से जुड़े वो दस रहस्य, जिन्हें शायद ही जानते होंगे आप
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उत्तर रामायण (उत्तरकांड) में ये वर्णन मिलता है कि भगवान राम ने माता सीता का परित्याग कर दिया था। कहते हैं रामायण का उत्तरकांड बौद्धकाल में जोड़ा गया है। क्योंकि मूल रामायण में उत्तरकांड का जिक्र नहीं मिलता है। शहर-शहर होने वाली रामलीला में भी लंका विजय के बाद रामायण समाप्त हो जाती है। रामकथा पर सबसे प्रामाणिक शोध करने वाले फादर कामिल बुल्के का स्पष्ट मत है कि 'वाल्मीकि रामायण का 'उत्तरकांड' मूल रामायण के बहुत बाद में जोड़ा गया है।
हिंदू धार्मिक शास्त्रों के अनुसार वैवस्वत मनु के दस पुत्र थे- इल, इक्ष्वाकु, कुशनाम, अरिष्ट, धृष्ट, नरिष्यन्त, करुष, महाबली, शर्याति और पृषध। श्रीराम का जन्म इक्ष्वाकु के कुल में हुआ था। जैन धर्म के तीर्थंकर निमि भी इसी कुल के थे।
हमारे शास्त्रों में लिखा है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम भगवान विष्णु के अवतार थे। हालांकि उन्होंने अयोध्या में राजा दशरथ के यहां एक आम इंसान के रूप में ही जन्म लिया था। लेकिन व्यक्ति अपने कर्मों से महान बनता है और उनकी महानता उनके उच्च आदर्श, वचनबद्धता और कर्तव्यनिष्ठा है। इसलिए वे हिन्दू आस्था के बड़े केन्द्र हैं जिन्हें भगवान के रूप में पूजा जाता है।
लोक कथा के अनुसार, शांता राजा दशरथ और कौशल्या की पुत्री थी। लेकिन माता कौशल्या ने उसे अपनी बहन वर्षिणी को गोद दे दिया था, जिसकी कोई संतान न थी। बाद में राजा रोमपाद ने श्रंगी ऋषि से उनका विवाह हुआ। कर्नाटक के श्रंगेरी में श्रंगी ऋषि के नाम पर ही श्रंगेरी शहर का नाम रखा गया है।