चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान राम का जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस बार 21 अप्रैल 2021 दिन बुधवार को पूरे देश में रामनवमी का पर्व मनाया जाएगा। जगत पालन कर्ता भगवान विष्णु ने राम और माता लक्ष्मी ने सीता मां के रूप में संसार के कल्याण के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया था। आज भी रामायण कालीन कई ऐसे स्थान हैं, जिनका सीधा संबंध प्रभु श्री राम से है। भगवान राम के जन्मोत्सव के पावन पर्व पर जानते हैं इन स्थानों और उससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में।
Ram Navami 2021: इन मंदिरों का है भगवान राम से सीधा संबंध, जानिए इनके बारे में
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इस बात से तो सभी अवगत हैं कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। भगवान राम का जन्म अयोध्या के दक्षिणी भाग रामकोट में हुआ था। वर्तमान समय में यह स्थान उत्तर प्रदेश में स्थित है, जहां एक लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद भगवान राम के जन्म स्थान पर राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। इसी तरह से रामायणकालीन कई ऐसे स्थान हैं जिनका संबंध सीधे प्रभु श्री राम के साथ है।
जनकपुर माता सीता का जन्म स्थान है। वर्तमान समय में यह स्थान नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित है और भगवान राम की ससुराल के रूप में विख्यात है। रामायण काल में यह स्थान मिथिला की राजधानी था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहीं पर माता सीता और भगवान राम का विवाह हुआ था। आज भी जनकपुर में भक्त विवाह स्थल और विवाह मंडप के दर्शन करने आते हैं। जनकपुर के पास रहने वाले लोग विवाह के अवसर पर जनकपुर मंदिर से सिंदूर लेकर जाते हैं जिसे दुल्हन की मांग में भरा जाता है। मान्यता है कि इससे वर वधू को प्रभु श्री राम और माता सीता का आशीर्वाद प्राप्त होता है जिससे उनका संबंध मजबूत बना रहता है।
बिहार के दरभंगा जिले में स्थित अहियारी गांव अहिल्या स्थान के नाम से प्रसिद्ध है। यहां पर अहिल्या स्थान में एक मंदिर बना हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी स्थान पर भगवान राम ने ऋषि गौतम की पत्नी अहिल्या का उद्धार किया था और उन्हें पाषाण की प्रतिमा से पुनः नारी रूप प्राप्त हुआ। रामनवमी के मौके पर यहां एक अलग ही परंपरा देखने को मिलती है। लोग सुबह-सुबह यहां पर बैंगन का भार लेकर पहुंचते हैं। फिर भगवान राम और माता अहिल्या को बैंगन का भरता अर्पित करते हैं। मंदिर के प्रांगण में प्रभु राम, माता सीता और लक्ष्मण जी का मंदिर भी बना हुआ है। इस मंदिर के बारे में कथा मिलती है कि जब अहिल्या माता के मंदिर का निर्माण किया जा रहा था तब माता अहिल्या राजा छत्र सिंह के स्वप्न में आई और कहा कि जिन्होंने मेरा उद्धार किया है उनके मंदिर का भी निर्माण करवाया जाए। उसी के बाद मंदिर प्रांगण में राम जी के साथ सीता माता और लक्ष्मण जी के मंदिर का निर्माण कराया गया। इसी मंदिर के पास भोजपुर नामक स्थान है, कहा जाता है कि यह वही स्थान है जहां भगवान राम ने ताड़का का वध किया था।
कैकयी के वरदान मांगने पर भगवान राम को चौदह वर्षों का वनवास मिला जब वे चौदह साल के वनवास में थे, तब लगभग 11 साल उन्होंने चित्रकूट ही बिताए थे। वर्तमान समय में यह स्थान उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच में स्थित है। जब राजा दशरथ की मृत्यु हुई थी तब राम जी को वापस लेकर जाने के लिए भरत जी इसी स्थान पर उनसे मिले थे। आज भी चित्रकूट में राम और माता सीता के कई पद चिन्ह मौजूद हैं और कई स्थानों पर उनके मंदिर बने हुए हैं। यहां पर जानकी कुंड भी बना हुआ है जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां माता सीता स्नान करती थी। यही पर एक शिला है जिसपर माता सीता के पदचिन्ह बने हुए हैं।चित्रकूट से करीब चार किलोमीटर की दूरी पर माता अनुसूया और महर्षि अत्रि का आश्रम भी है।