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सीख: हनुमान जी से सीखें बल और बुद्धि के बीच कैसे बनाएं संतुलन

Fri, 20 Dec 2019 07:09 AM IST
योगेश जोशी धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: योगेश जोशी Updated Fri, 20 Dec 2019 07:09 AM IST
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management and life lessons from hanuman ji
हनुमानजी

एक कुशल प्रबंधक व मानव संसाधन का बेहतर उपयोग करने वाले राम भक्त हनुमान जी में मैनेजमेंट की जबरदस्त क्षमता है।  संपूर्ण रामचरित मानस में और हनुमानजी को समर्पित सुंदरकांड में ऐसी कई घटनाओं का जिक्र है जहां पर हनुमान जी ने बल और बुद्धि का बेहतरीन संतुलन पेश किया है। बल और बुद्धि का उपयोग करते हुए ही हनुमान जी ने माता सीता की खोज की थी। हनुमान जी ने हर समस्याओं को परिस्थितियों के हिसाब से सुलझाया है। जहां बल का प्रयोग करना था वहां बल का प्रयोग किया और जहां विन्रमता की आवश्यकता थी वहां बुद्धि का पूर्ण उपयोग कर परेशानी को दूर किया। अगली स्लाइड्स में जानते हैं, हनुमान जी की और बातें जिनसे हमारा जीवन आसान बन जाएगा।

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Hanuman - फोटो : Rohit Jha

विश्राम लक्ष्य मिलने के बाद
हनुमान जी माता सीता की खोज में जब लंका की तरफ बढ़ रहे थे,  तभी समुंद्र ने हनुमान जी से विश्राम करने का आग्रह किया और अपने भीतर रह रहे मैनाक पर्वत से कहा की तुम हनुमान जी को विश्राम करने दो। हनुमान जी विश्राम करने से मना करते हुए निमंत्रण का मान रखते हुए मैनाक पर्वत को छू कर आगे की ओर निकल पड़े। हनुमान जी की इस बात से हमे यह सीखने को मिलता है कि हमें जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए हमें रुकना नहीं चाहिए। 

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hanuman - फोटो : hanuman

लक्ष्य हासिल करने के लिए कभी कभी झुकना भी पड़ता है 
लंका की ओर बढ़ते समय हनुमान जी को बीच रास्ते में सुरसा नाम की नाग माता ने रोक लिया और उनको खाने की जिद करने लगी। हनुमान जी ने बहुत समझाया पर वो नहीं समझी यहां तक कि हनुमान जी ने वचन भी दे दिया, प्रभु श्री राम का काम करके आने दो, फिर खुद ही आकर आपका आहार बन जाऊंगा, लेकिन सुरसा नहीं मानी।

सुरसा ने हनुमान जी को खाने के लिए जैसे ही अपना शरीर बड़ा किया हनुमान जी अपना शरीर दुगना बड़ा लिया। फिर सुरसा ने अपना शरीर बड़ा लिया, तब हनुमानजी समझ गए कि मामला मुझे खाने का नहीं है, सिर्फ अहम का है। उन्होंने तत्काल सुरसा के बड़े स्वरुप के आगे खुद को छोटा कर लिया ओर उसके मुंह में से घूम कर निकल आए। सुरसा हनुमान जी के इस बुद्धि पराकर्म से काफी खुश हो गई और लंका का मार्ग प्रशस्त कर दिया।

हनुमान जी के इस उदाहरण से हमें सीख मिलती है कि जहां मामला अहम का हो, वहां बल नहीं, बुद्धि का इस्तेमाल करना चाहिए। बड़े लक्ष्य को पाने के लिए अगर कहीं झुकना भी पड़े, झुक जाना चाहिए।

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hanu - फोटो : hanuman

काम को समय रहते कर लें
हनुमानजी जब लंका के द्वार पर पहुंचे, वहां लंकिनी नाम राक्षसी ने उनका रास्ता रोक लिया। हनुमान जी रात के समय में  छोटा रूप लेकर लंका में प्रवेश कर रहे थे। यहां परिस्थिति ऐसी थी कि लंका में रात के समय ही चुपके से घुसा जा सकता था। समय कम था इसलिए उन्होंने लंकिनी से कोई वाद-विवाद नहीं किया ओर सीधे उस पर प्रहार कर दिया। लंकिनी ने हनुमान जी के लिए तुरंत रास्ता छोड़ दिया। इससे हमें सीख मिलती है कि जब मंजिल के एकदम करीब हो और समय का अभाव हो तो परिस्थितियों की मांग पर बल का प्रयोग करना ही बेहतर है।

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