Guru Transit 2025: गुरु अब मिथुन राशि में होंगे। करीब 12 साल के बाद गुरु 14 मई 2025 को रात 10 बजकर 32 मिनट पर मिथुन राशि में प्रवेश कर चुके होंगे। गुरु मिथुन राशि में गोचर करने के साथ अतिचारी चाल से चलेंगे। गुरु की यह अतिचारी चाल साल 2032 तक रहेगी। अतिचारी होने से गुरु तेज गति से चलेंगे। गुरु जहां करीब 12 महीनों के बाद अपनी राशि बदलते हैं वहीं गुरु के अतिचारी होने यह 6 महीने के भीतर ही अक्तूबर में कर्क राशि में प्रवेश कर जाएंगे ,फिर इसी राशि में रहते हुए वक्री भी होंगे। दिसंबर के महीने में एक बार फिर से मिथुन राशि में वापस लौट आएंगे। वैदिक ज्योतिष में गुरु को ज्ञान, वैवाहिक जीवन, संतान, धर्म और शिक्षा का कारक ग्रह माना गया है। गुरु धनु और मीन राशि के स्वामी होते हैं। यह कर्क राशि में उच्च के होते हैं। गुरु के मिथुन राशि में गोचर करने से कुछ राशि वालों के करियर-कारोबार, नौकरी, आय और पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है। आइए जानते हैं गुरु के गोचर के किन राशियों को सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा।
Guru Transit 2025: 12 साल बाद मिथुन राशि में गुरु का गोचर, अब चमक उठेगी इन राशि वालों की किस्मत
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरु अब मिथुन राशि में आ गए हैं। गुरु को मिथुन राशि में गोचर करने के कारण कुछ राशि वालो की किस्मत में बदलाव के संकेत हैं।
मिथुन राशि
14 मई 2025 को गुरु का गोचर मिथुन राशि वालों के लिए बहुत ही शुभ और लाभकारी साबित होगा। गुरु के 12 साल बाद मिथुन राशि में गोचर करने से बहुत सारी चीजों में आपको सफलताएं प्राप्ति होंगी। आपके लिए देवगुरु बृहस्पति सप्तम और दशम भाव के स्वामी होते हैं और बृहस्पति का गोचर आपके लग्न में हुआ है। इस भाव से व्यक्ति के व्यक्तित्व और सेहत का विचार किया जाता है। इस भाव में विराजमान बृहस्पति की दृष्टि आपके पंचम , सप्तम और भाग्य स्थान पर जा रही है। मिथुन राशि के जातकों के लिए गुरु का यह गोचर किसी वरदान से कम नहीं है। इस समय आपके सभी अटके हुए काम पूरे हो सकते हैं। संतान पक्ष की ओर से आपको अच्छी खबर प्राप्त हो सकती है। पढ़ाई लिखाई से फायदा होगा। आपके व्यापार में आपको अच्छा मुनाफा प्राप्त होगा।
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देवगुरु बृहस्पति का गोचर सिंह राशि वालों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। आपके लिए गुरु का सभी तरह की अधूरी इच्छाओं की पूर्ति के लिए रहेगा। आपके लिए देवगुरु बृहस्पति पंचम और अष्टम भाव के स्वामी होते हैं और अब बृहस्पति का गोचर आपके11वें भाव यानी कि लाभ स्थान से होने जा रहा है। इस भाव से व्यक्ति की इच्छा पूर्ति का विचार किया जाता है। इस भाव में विराजमान बृहस्पति की दृष्टि आपके तृतीय, पंचम और सप्तम भाव पर जा रही है। सिंह राशि के जातकों के लिए गुरु का गोचर बहुत अच्छा रहेगा। कार्य स्थल पर परिस्थिति अनुकूल होंगी। व्यापार का विस्तार करने में सफल होंगे।
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तुला राशि
गुरु का मिथुन राशि में गोचर आपको कई मोर्चे पर शुभ सूचनाएं देने और आपके लिए अनुकूल सिद्ध हो सकता है। आप के लिए बृहस्पति तृतीय और छठे भाव के स्वामी होते हैं और अब बृहस्पति का गोचर आपके भाग्य स्थान से होने जा रहा है। इस भाव से व्यक्ति के धर्म कर्म और धार्मिक यात्राओं का विचार किया जाता है। इस भाव में विराजमान बृहस्पति की दृष्टि आपके प्रथम भाव पर, तृतीय भाव पर और पंचम भाव पर होगी। तुला राशि के जातकों के लिए बृहस्पति का यह गोचर बहुत ही अच्छा रहने वाला है। आपके भाग्य की वृद्धि होगी। आपके पिता और गुरु आपके सहायक होंगे। आपके व्यक्तित्व में एक अलग ही प्रकार का निखार आएगा। आपको सम्मानित किया जा सकता है।
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