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इस मंदिर में लगातार 16 सोमवार तक करें पूजा, मिलेगा संतान-सुख

Fri, 16 Aug 2019 11:33 AM IST
प्रशांत राय धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत राय Updated Fri, 16 Aug 2019 11:33 AM IST
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gokarna mahadev temple in mathura
गोकर्णनाथ मंदिर - फोटो : social media

भारत में अलग-अलग तरह के मंदिर हैं, जो अपनी मान्यताओं व प्रचलित कथाओं के चलते देश भर में जाने जाते हैं। ऐसा ही एक मंदिर मथुरा में स्थित है, जिसका नाम गोकर्णनाथ मंदिर है। इस मंदिर का जिक्र पवित्र ग्रंथ गीता में भी है। मान्यता के मुताबिक गोकर्णेश्वर महादेव का यह मंदिर द्वापर युग के वक्त का है। हम आपको बताने जा रहे हैं गोकर्णनाथ महादेव की कहानी से जुड़ी रोचक बातें। 



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gokarna mahadev temple in mathura
प्रतीकात्मक फोटो

मंदिर में मौजूद शिव की मूर्ति महाकाल का रूप बताई जाती है। भगवान शिव को मथुरा का क्षेत्रपाल कहा जाता है, क्योंकि मथुरा के चारों कोनों पर भोलेनाथ के चार मंदिर हैं। पूर्व दिशा में पिघलेश्वर, पश्चिम दिशा में भूतेश्वर, दक्षिण दिशा में रंगेश्वर महादेव और उत्तर दिशा में गोकर्णेश्वर महादेव का पुराना मंदिर है। गोकर्णेश्वर मंदिर टीले पर बना हुआ है। इस कारण से टीले को गोकर्णेश्वर व कैलाश कहते हैं। 

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प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : Social media

मंदिर के बारे में ऐसी मान्यता है कि अगर जिस घर में संतान नहीं हो रहा है तो वह अगर 16 सोमवार तक गोकर्ण महादेव की पूजा और व्रत करें तो उनको संतान जरुर प्राप्त होगा। धार्मिक आस्था के मुताबिक, जो भी श्रद्धालु गोकर्णेश्वर महादेव मंदिर में लगातार 40 दिन तक भगवान शिव स्त्रोत का पाठ और गन्ने के रस से अभिषेक करता है तो वह सुखी, निरोगी और समृद्ध रहता है। 

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- फोटो : social media

गोकर्णनाथ नाम पड़ने के पीछे एक कहानी प्रचलित है। श्री गोकर्ण के पिता का नाम आत्मदेव और मां का नाम धुंदली था। दोनों की कोई संतान नहीं थी। एक बार एक ऋषि ने गोकर्ण जी के माता-पिता को फल दिया और कहा कि इसको खाने से दोनों को एक परम ज्ञानी पुत्र की प्राप्त होगी। 

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- फोटो : social media

माता धुंदली ने ऋषि की बात पर विश्वास नहीं किया और वो फल गाय को खिला दिया। गाय द्वारा फल खाने से गाय के कान से श्री गोकर्ण जा का जन्म हुआ। गाय के कान से जन्म होने के कारण ही गोकर्णनाथ कहलाए। मंदिर में स्थापित गोकर्ण महादेव जी की मूर्ति का स्वरूप कुछ अलग है। उनका उल्टा हाथ अपने लिंग पर है तो दूसरा हाथ मन के ऊपर रखा हुआ है। किसी भी व्यक्ति को अपनी इन दो ही चीजों पर नियंत्रण रखना आवश्यक है। क्योंकि मनुष्य का काम और मन, यह दोनों ही काफी गतिमान होता है। 

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