मंदिर के अंदर जाने से पहले अक्सर हम अपने जूते चप्पल बाहर ही उतार देते हैं। मंदिर में जूते चप्पल पहनकर जाना निषेध होता है, लेकिन एक ऐसा मंदिर है जहां देवी को चप्पल सैंडल ही चढ़ाई जाती है। यही नहीं ये जूते चप्पल विदेशों से भी आते है। वैसे यहां पर जूते चप्पल चढ़ाने की परम्परा सदियों से नहीं है, बल्कि 18 साल पहले ही शुरू हुई है। जानें 18 साल पहले कैसे शुरू हुई ये परंपरा
जानें क्यों पिछले 18 वर्षों से देवी के इस मंदिर में चढ़ाई जा रही हैं चप्पल-सैंडल
amarujala.com- written by: किरण सिंह
Updated Mon, 08 May 2017 06:53 PM IST
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