राजस्थान में लोहार्गल नाम का स्थान है और ऐसा कहा जाता है कि यहां पांडवों के शस्त्र गल गए थे। यह राजस्थान का पुष्कर के बाद दूसरा सबसे बड़ा तीर्थ स्थल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह वही कुंड है जिसमें भगवान विष्णु का मत्स्यावतार हुआ था। मार्गशीर्ष माह के शुक्लपक्ष की मत्स्य द्वादशी और चैत्र माह के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि पर इस जलाशय की विशेष तौर पर पूजा अर्चना की जाती है। इस स्थान का संबंध भगवान परशुराम, भगवान सूर्य और भगवान विष्णु से भी है।
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राजस्थान के सूर्यकुंड में हुआ था भगवान विष्णु का मत्स्यावतार
Mon, 09 Dec 2019 07:01 PM IST
योगेश जोशी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश जोशी
Updated Mon, 09 Dec 2019 07:01 PM IST
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राजस्थान में लोहार्गल नाम का स्थान है
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भगवान विष्णु ने शंखासूर नामक दैत्य का संहार करने के लिए मत्स्य अवतार लिया था
- भगवान विष्णु ने यहां लिया था मत्स्य अवतार
धार्मिक कथाओं के अनुसार इसी जगह पर भगवान विष्णु ने शंखासूर नामक दैत्य का संहार करने के लिए मत्स्य अवतार लिया था।
भगवान परशुराम ने क्रोध में आकर क्षत्रियों का संहार कर दिया था
- परशुराम जी को यही से मिली थी पापों से मुक्ति
भगवान परशुराम ने क्रोध में आकर क्षत्रियों का संहार कर दिया था। बाद में जब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ तो उन्होंने यहां आकर यज्ञ किया और सभी पापों से मुक्ति पाई।
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महाभारत के युद्ध के बाद पांडव अपने परिजनों की हत्या के पाप से चिंतित थे
- यहां गल गए थे पांडवों के हथियार
महाभारत के युद्ध के बाद पांडव अपने परिजनों की हत्या के पाप से चिंतित थे। तब श्रीकृष्ण ने उन्हें बताया कि जिस तीर्थ स्थल के तालाब में तुम्हारे हथियार गल जाएंगे, वहां पर आराधना करने से तुम्हारे सभी पाप धूल जाएंगे । इस स्थान पर पांडवों ने शिव कि आराधना कर मोक्ष का मार्ग प्राप्त किया।
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यह पवित्र स्थान सूर्यदेव का है
- सूर्य देव का स्थान है यह
धार्मिक कथाओं के अनुसार यह पवित्र स्थान सूर्यदेव का है। हजारों वर्ष पूर्व यहां पर सूर्य मंदिर व सूर्यकुंड का निर्माण करवा कर इस तीर्थ को भव्य रूप दिया गया।