Ashadh Maas Significance: ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से आषाढ़ मास को वर्ष का चतुर्थ मास माना गया है। पंचांगानुसार आज यानी 30 जून से आषाढ़ मास का प्रारंभ हो चुका है और इसका समापन 29 जुलाई 2026 को होगा। ज्येष्ठ मास की समाप्ति के तुरंत पश्चात ही आषाढ़ मास का आरंभ हो जाता है। यह मास केवल ऋतु परिवर्तन का सूचक नहीं है, अपितु धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस संपूर्ण मास में भगवान विष्णु की आराधना, जप-तप, दान-पुण्य तथा साधना का विशेष विधान है। इसी कारण सनातन परंपरा में आषाढ़ मास को भक्ति एवं पुण्य का मास कहा गया है। इस मास में कई प्रमुख धार्मिक पर्व एवं व्रत भी आते हैं, जिनका शास्त्रों में विशेष उल्लेख प्राप्त होता है।
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आषाढ़ मास
- फोटो : adobe stock
क्यों विशेष है आषाढ़ मास
शास्त्रों के अनुसार आषाढ़ मास भगवान विष्णु की विशेष उपासना का काल माना गया है। इस अवधि में पूजा-पाठ, मंत्र जाप, व्रत-उपवास, दान तथा सत्संग करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि इस काल में किए गए सत्कर्म जातक के आध्यात्मिक उन्नयन में सहायक सिद्ध होते हैं तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाते हैं। इसके अतिरिक्त आषाढ़ मास वर्षा ऋतु के आगमन का भी प्रतीक माना गया है। इस काल में प्रकृति हरियाली से आच्छादित होने लगती है तथा वातावरण में नवीन ऊर्जा का संचार होता है। इसी कारण इस मास को आत्मचिंतन, संयम तथा आध्यात्मिक साधना हेतु अत्यंत उपयुक्त माना गया है।
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देवशयनी एकादशी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
देवशयनी एकादशी का है विशेष महत्व
आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस तिथि पर भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, और इसी के साथ चातुर्मास का आरंभ हो जाता है। इसके पश्चात आगामी चार मासों तक विवाह, गृह प्रवेश सहित अन्य मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। इस तिथि पर व्रत रखने तथा भगवान विष्णु की आराधना करने का विशेष महात्म्य बताया गया है।
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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि
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इसी मास में पड़ती है गुप्त नवरात्रि
आषाढ़ मास में गुप्त नवरात्रि भी संपन्न होती है। नौ दिवसों तक चलने वाला यह विशेष पर्व मां दुर्गा की उपासना को समर्पित है। तंत्र साधना तथा गोपनीय पूजन-विधि का अनुसरण करने वाले साधकों के लिए इस नवरात्रि का विशेष महत्व बताया गया है, जबकि सामान्य श्रद्धालु भी इस अवधि में माता की आराधना करते हुए सुख-समृद्धि एवं परिवार की कुशलता हेतु प्रार्थना करते हैं।
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गुरु पूर्णिमा
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गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व
आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। यह तिथि गुरु के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता प्रकट करने हेतु समर्पित है। इस अवसर पर शिष्यजन अपने गुरु से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं तथा ज्ञान, शिक्षा एवं उचित जीवन-मार्गदर्शन हेतु उनका सम्मान करते हैं। धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपरा में गुरु पूर्णिमा को अत्यंत उच्च स्थान प्राप्त है।