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नहाय खायः कद्दू और सरसों के साग से क्यों शुरु होता छठ पर्व

Mon, 16 Nov 2015 09:36 AM IST
Updated Mon, 16 Nov 2015 09:36 AM IST
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नहाय खायः कद्दू और सरसों के साग से क्यों शुरु होता छठ पर्व

2015 chhath puja

आज कार्त‌िक कृष्‍ण चतुर्थी त‌िथ‌ि है। इस द‌िन नहाय खाय के साथ छठ पर्व की शुरुआत हो जाती है। इस दिन छठ व्रत रखने वाले व्रती नदी या तालाब में स्नान करके सूर्य भगवान की पूजा करते हैं और छठ व्रत सफलता पूर्वक पूरा हो इसकी कामना करते हैं।

नहाय खायः कद्दू और सरसों के साग से क्यों शुरु होता छठ पर्व

2015 chhath puja

इसके बाद कद्दू और सरसों के साग की सब्जी खाकर व्रत आरंभ करते हैं। इसलिए इस दिन को नहाय खाय कहा जाता है। इस व्रत का आरंभ कद्दू और सरसों के साग से होता है इसका धार्मिक कारण यह है कि कद्दू और सरसों के साग को शुद्घ और सात्विक माना गया है।

नहाय खायः कद्दू और सरसों के साग से क्यों शुरु होता छठ पर्व

2015 chhath puja

धर्म के अलावा सरसों का साग और कद्दू खाने का वैज्ञानिक आधार भी है। कद्दू सुपाच्य होता है। जिससे व्रती के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। जबकि सरसों का साग खाने का रिवाज इसलिए है क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है।

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नहाय खायः कद्दू और सरसों के साग से क्यों शुरु होता छठ पर्व

2015 chhath puja

छठ व्रत में व्रती को काफी समय तक जल में खड़ा रहना पड़ता है इससे सर्दी जुकाम की परेशानी न हो इसलिए व्रती सरसों का साग खाते हैं।

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