शिवाजी अपने तंबू में बैठे माधव भामलेकर के आने की प्रतीक्षा कर रहे थे। इसी बीच हाथ में एक ग्रंथ लिए सेनानी पहुंचे। उनके पीछे एक डोला लिए दो सैनिक थे। डोला रखकर वे चले गए। सेनानी ने प्रसन्न मुद्रा में कहा-‘छत्रपते! आज मुगल सेना दूर तक खदेड़ दी गई। बहलोल खां जान बचाकर भागा। अब उसकी ताकत नहीं कि वह इधर मुंह भी करे। शिवाजी ने डोले की ओर देखते हुए पूछा, ′यह क्या है?’ सेनानी ने कहा-इसमें बहलोल की बेगम है, जो महाराज को भेंट करने के लिए लाई गई है।
कुरान और स्त्रीः आंखें नम करने वाली शिवाजी की कथा
Updated Tue, 03 Nov 2015 03:03 PM IST
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कुरान और स्त्रीः आंखें नम करने वाली शिवाजी की कथा
कुरान और स्त्रीः आंखें नम करने वाली शिवाजी की कथा
कुरान और स्त्रीः आंखें नम करने वाली शिवाजी की कथा
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