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कुरान और स्त्रीः आंखें नम करने वाली शिवाजी की कथा

Tue, 03 Nov 2015 03:03 PM IST
Updated Tue, 03 Nov 2015 03:03 PM IST
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कुरान और स्‍त्रीः आंखें नम करने वाली श‌िवाजी की कथा

story for shiva ji maharaj and quran

शिवाजी अपने तंबू में बैठे माधव भामलेकर के आने की प्रतीक्षा कर रहे थे। इसी बीच हाथ में एक ग्रंथ लिए सेनानी पहुंचे। उनके पीछे एक डोला लिए दो सैनिक थे। डोला रखकर वे चले गए। सेनानी ने प्रसन्न मुद्रा में कहा-‘छत्रपते! आज मुगल सेना दूर तक खदेड़ दी गई। बहलोल खां जान बचाकर भागा। अब उसकी ताकत नहीं कि वह इधर मुंह भी करे। शिवाजी ने डोले की ओर देखते हुए पूछा, ′यह क्या है?’ सेनानी ने कहा-इसमें बहलोल की बेगम है, जो महाराज को भेंट करने के लिए लाई गई है।

कुरान और स्‍त्रीः आंखें नम करने वाली श‌िवाजी की कथा

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तभी डोले से आवाज आई, यह मेरे हाथ से कुरान लीजिए। शिवाजी ने कुरान लेकर चूम लिया और डोले के पास आकर पर्दा हटाया तथा बहलोल खां की बेगम को बाहर आने को कहा। उसको ऊपर से नीचे तक निहारकर उन्होंने कहा,‘सचमुच आप बड़ी सुंदर हैं। अफसोस है कि मैं आपके गर्भ से नहीं जन्मा। अगर ऐसा होता, तो मैं भी कुछ सुंदरता पा जाता।’

कुरान और स्‍त्रीः आंखें नम करने वाली श‌िवाजी की कथा

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श‌िवाजी ने अपने एक अधिकारी को आदेश दिया कि सम्मान और क्षमा प्रार्थना के साथ बेगम तथा कुरान-शरीफ को बहलोल खां को जाकर सौंप आइए। सेनापति को अपने कृत्य पर लज्जा आई। इधर पत्नी और कुरान को लौटाया देख बहलोल खां भी पिघल गया। अंत में उसने यही निश्चय किया कि इस फरिश्ते को देखकर मैं दिल्ली लौटूंगा।

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कुरान और स्‍त्रीः आंखें नम करने वाली श‌िवाजी की कथा

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बहलोल ने सैनिक भेजकर शिवाजी से मिलने की इच्छा प्रकट की। नियत तिथि और समय पर शिवाजी बहलोल खां की प्रतीक्षा करते खड़े थे। इसी बीच बहलोल खां आ पहुंचा और ‘फरिश्ते’ कहकर शिवाजी से लिपट गया। फिर शिवाजी के पैरों पर गिरकर कहने लगा-माफ कर दो मुझे। बेगुनाहों का खून मेरे सिर चढ़कर बोलेगा। मुझे माफ कर दो।

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