पांचवा वेद माने जाने वाले महाभारत के सभी पात्रों की अपनी एक अलग विशेषता थी। मसलन, किसी के पास 10 हजार हाथियों का बल था तो किसी के पास तेज दिमाग और कूटनीति, तो वहीं कोई वेदों, शास्त्रों और धर्मनीति का ज्ञाता था। अपने-अपने इन्हीं गुणों के कारण उन्हें समाज में सम्मान प्राप्त था। इन सभी पात्रों में एक नाम ऐसा था, जिनकी बुद्धिमता और ज्ञान को आज भी पूजा जाता है।
कलयुग में इन छह चीजों के होने पर व्यक्ति बन जाता है भाग्यशाली
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ज्ञान
विश्व में मनुष्य के पास ज्ञान ही एक मात्र ऐसा धन है, जिसे कोई चोरी नहीं कर सकता और चाह कर भी बांट नही सकता। शास्त्रों में इस बात वर्णन है कि ज्ञान ही इंसान की सबसे बड़ी दौलत है। व्यक्ति का ज्ञान सदैव उसके लिए विपरीत समय में एक हथियार की भांति कार्य करता है और हमेशा व्यक्ति के साथ ही रहता है। वर्तमान समय में ज्ञान ही व्यक्ति के लिए आय का सबसे बड़ा साधन बन चुका है।
आय का साधन
वर्तमान समय में व्यक्ति को अपनी जरुरतों को पूरा करने के लिए आय के साधन को जुटाना पड़ता है। जिस व्यक्ति के पास आय के साधन नहीं होते हैं, वास्तव में वह व्यक्ति दुर्भाग्यशाली होता है और उसे जीवन में तमाम तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। धनहीन व्यक्ति को अपनी जरुरतों को पूरा करने के लिए दूसरों के आगे हाथ फैलाना पड़ता है। कई बार जब दूसरों के आगे हाथ फैलाने के बावजूद, उसकी जरुरतें पूरी नहीं होतीं तो मजबूरन उसे किसी गलत रास्ते का चुनाव करना पड़ता है। नतीजतन, उस व्यक्ति के पास जीवन में पछतावे के सिवा कुछ भी नहीं होता है। ऐसे में जिनके पास आय के साधन होते हैं, उन्हें खुद को भाग्यशाली मानना चाहिए।
मीठी वाणी
विदुर नीति के अनुसार जो स्त्री-पुरुष मीठा बोलते हैं, उनके ऊपर मां सरस्वती का आशीर्वाद बना रहता है। शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि वाणी में मां सरस्वती का वास होता है। कहते हैं कि बुरे और कटु वचन बोलने वाले लोगों का स्वभाव भी उनकी भाषा की तरह बुरा बन जाता है। मधुर वाणी बोलने वाला मनुष्य अपनी जरूरत को किसी की तृष्णा में परिवर्तित कर सकता है। विदुर के अनुसार जो व्यक्ति मधुर वाणी का स्वामी होता है, भाग्य भी उसकी साथ देता है।
रोगों से मनुष्य का शरीर कमजोर पड़ जाता है। बीमार व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक शक्तियां नष्ट हो जाती है। जिसके कारण वह कोई भी कार्य ठीक से नहीं कर पाता। बार-बार बीमार होने से व्यक्ति के संचित धन का भी नुक्सान होता है। अगर मनुष्य निरोगी है, तो वह भाग्यशाली है। धरती के तमाम सुखों पर भारी है व्यक्ति की निरोगी काया। जो व्यक्ति रोगों से मुक्त होता है, वह धरती के तमाम सुखों को भोग कर सकता है।