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यमराज से रहना चाहते है दूर तो नरक चतुर्दशी पर भूलकर भी ना करें ये काम
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 26 Oct 2019 07:47 AM IST
सार
नरक चतुर्दशी अर्थात् छोटी दिवाली को यमराज को खुश करने और दीर्घायु पाने के लिए दीप जलाने की परंपरा शुरू हुई।
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यदि आप भी लंबी उम्र का वरदान पाना चाहते है तो नरक चौदस यानि छोटी दीपावली वाले दिन यह गलती करने से बचें । नरक चतुर्दशी अर्थात् छोटी दिवाली को शास्त्रों में बड़ा महत्त्वपूर्ण बताया गया है और यह दिवाली व्यक्ति के जीवन और मृत्यु से जुड़ी है।
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एक कथा प्रचलित है कि एक बार यमराज ने यमदूतों से कहा लोगों के प्राण हरते समय तुम्हें कभी दुःख हुआ है ? इस पर यमदूत ने कहा कि एक बार एक राजकुमार के प्राण हरते समय उनको बहुत दुःख हुआ था। राजकुमार की शादी के चार ही दिन हुए थे। राजकुमार की मृत्यु से राजमहल में हाहाकार मच गयी थी और नववधू का विलाप देखकर हमारा हृदय हमें धिक्कारने लगा। इसके बाद यमदूतों ने यमराज से पूछा कि हे मृत्यृ के देवता कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे किसी भी इंसान की अकाल मृत्यु न हो तो इस पर यमराज ने कहा कि जो व्यक्ति छोटी दीपावली के दिन मेरे नाम का दीप जलाकर मुझे याद करेगा उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं सताएगा । यह दिन नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इस दिन यम के लिए दीप जलाने वाले को नरक का भय भी नहीं रहता है।
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इसी संदर्भ में एक अन्य कथा भी प्रचलित है कि प्राचीन काल में एक हिम नामक राजा हुए। विवाह के कई वर्षों बाद इन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। ज्योतिषियों ने जब राजकुमार की कुण्डली देखी तो कहा कि विवाह के चौथे दिन राजकुमार की मृत्यु हो जाएगी। राजा रानी इस बात को सुनकर दुःखी हो गये। समय व्यतीत होता चला गया और राजकुमार की शादी हो गयी। विवाह का चौथा दिन भी आ गया। राजकुमार की मृत्यु होने के भय से सभी लोग सहमे हुए थे लेकिन राजकुमार की पत्नी चिंता मुक्त थी। उसे मां लक्ष्मी की भक्ति पर पूरा विश्वास था। शाम होने पर राजकुमार की पत्नी ने पूरे महल को दीपों से सजा दिया। इसके बाद मां लक्ष्मी के भजन गाने लगी। यमदूत जब राजकुमार के प्राण लेने आये तो मां लक्ष्मी की भक्ति में लीन राजकुमार की पतिव्रता पत्नी को देखकर महल में प्रवेश करने का साहस नहीं जुटा पाए। यमदूतों के लौट जाने पर यमराज स्वयं सर्प का रूप धारण करके महल में प्रवेश कर गये। राजकुमार की मृत्यु का समय गुजर जाने के बाद यमराज को खाली हाथ लौटना पड़ा और राजकुमार दीर्घायु हो गया। ऐसी मान्यता है कि तब से नरक चतुर्दशी अर्थात् छोटी दिवाली को यमराज को खुश करने और दीर्घायु पाने के लिए दीप जलाने की परंपरा शुरू हुई।
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