22 मई को शनि अमावस्या का दिन है। इस दिन शनि दोषों से मुक्ति के लिए शनिदेव की विशेष पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि शनि की नजर जिस किसी पर पड़ जाती है उसको कई तरह की परेशानियां आने लगती है। शनि अगर प्रसन्न हो जाएं तो व्यक्ति को राजा भी बना देते हैं। पुराणों में शनिदेव से जुड़ी कई तरह की मान्यताएं है। आइए जानते हैं शनि से जुड़े कुछ रोचक तथ्य।
Shani Jayanti 2020: जानिए शनिदेव से जुड़ी 10 जानकारियां
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शनिदेव के धीमी चाल और लंगड़ा कर चलने के पीछे पिप्पलाद मुनि के कोप का ही कारण है। पिप्लाद मुनि अपने पिता की मृत्यु का कारण शनिदेव को मानते थे। पिप्पलाद मुनि ने शनि पर ब्रह्रादण्ड से प्रहार किया। शनि यह प्रहार सहन करने में असमर्थ थे जिस कारण से शनि तीनों लोकों में दौड़ने लगे। इसके बाद ब्रह्रादण्ड ने उन्हें लंगड़ा कर दिया।
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भगवान शिव ने शनि को दण्डाधिकारी नियुक्ति
शनिदेव और भगवान शिव के बीच युद्ध भी हुआ था। भयानक युद्ध के बाद भगवान शिव ने शनि को परास्त कर दिया था। बाद में सूर्यदेव की प्रार्थना पर भगवान शिव ने उन्हें माफ किया। शनि के रण कौशल से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपना सेवक और दण्डाधिकारी नियुक्ति कर लिया।
शनिदेव के पिता का नाम सूर्यदेव और माता का नाम छाया है। छाया भगवान शिव की बहुत बड़ी भक्त थीं और वह अपने गर्भ में पल रहे शनि की चिंता किए बगैर हमेशा भगवान शिव की तपस्या में लीन रहती थीं। इस कारण से ना तो वह खुद अपना और ना ही गर्भ में पल रहे अपने बच्चे का ध्यान रख पाती थीं। जिसके कारण से शनि काले और कुपोषित पैदा हुए।
12 साल तक के बच्चों पर शनि का प्रकोप कभी नहीं रहता है। इसके पीछे पिप्पलाद और शनि के बीच हुए युद्ध का कारण है। पिप्पलाद ने युद्ध में शनि को परास्त कर दिया और इस शर्त पर छोड़ा कि वे 12 वर्ष तक की आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं देंगे।