Sixth Mangla Gauri Vrat 2023: सावन के महीने में हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है और मां पार्वती के मंगल स्वरूप की पूजा की जाती है। इस साल अधिक मास के कारण सावन माह एक के बजाय दो महीने का हो गया है, इसलिए इस साल सावन में मंगला गौरी व्रत भी नौ हैं। अब तक पांच मंगला गौरी व्रत बीत चुके हैं। आज यानी 8 अगस्त को छठा मंगला गौरी व्रत है। इसके बाद सातवां मंगला गौरी व्रत 15 अगस्त को, आठवां मंगला गौरी व्रत 22 अगस्त को और नौवां व अंतिम मंगला गौरी व्रत 29 अगस्त को पड़ेगा। ऐसे में चलिए जानते हैं छठे मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि और महत्व...
Mangla Gauri Vrat 2023: छठा मंगला गौरी व्रत आज, जानें व्रत कथा, पूजा विधि और महत्व
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सबसे पहले सावन में मंगलवार के दिन प्रातः जल्दी उठें और स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर एक साफ लकड़ी की चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाएं और उसपर मां गौरी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
फिर मां मंगला गौरी के समक्ष व्रत का संकल्प करें और आटे से बना हुआ दीपक जलाएं। इसके बाद धूप, नैवेद्य, फल-फूल आदि से मां मंगला गौरी की पूजा करें। पूजा संपन्न होने के बाद मां गौरी की आरती करें और उनसे सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
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मंगला गौरी व्रत का महत्व
सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की लंबी आयु के लिए मंगला गौरी का व्रत करती हैं। वहीं कुंवारी कन्याएं भी शीघ्र विवाह की कामना के साथ मंगला गौरी व्रत रखती हैं। साथ ही मान्यता है कि मंगला गौरी का व्रत रखने से कुंडली में मंगल दोष दूर होता है। वहीं यदि किसी जातक के दांपत्य जीवन में समस्याएं बनी हुई हैं, तो उन्हें मंगला गौरी व्रत जरूर करना चाहिए। इससे दांपत्य जीवन की सभी समस्याएं दूर होती हैं।
मंगला गौरी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में धर्मपाल नामक एक सेठ था, उसके पास धन संपत्ति की कोई कमी नहीं थी। वह स्वयं सर्व गुण संपन्न था। देवों के देव महादेव का भक्त था। कालांतर में सेठ धर्मपाल की शादी गुणवान वधू से हुई। हालांकि, विवाह के बाद कई वर्षों तक संतान की प्राप्ति नहीं हुई। इससे सेठ चिंतित रहने लगा। वह सोचने लगा कि अगर संतान नहीं हुई, तो उसके कारोबार का कौन उत्तराधिकारी होगा? एक दिन सेठ धर्मपाल की पत्नी ने संतान के संबंध में किसी प्रकांड पंडित से संपर्क करने की सलाह दी। पत्नी के वचनानुसार, सेठ नगर के सबसे प्रसिद्ध पंडित के पास जाकर मिले। उस समय गुरु ने सेठ दंपत्ति को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-उपासना करने की सलाह दी।
कालांतर में सेठ धर्मपाल की पत्नी ने विधि विधान से महादेव और माता पार्वती की पूजा-उपासना की। सेठ धर्मपाल की पत्नी की कठिन भक्ति से प्रसन्न होकर एक दिन माता पार्वती प्रकट होकर बोली- हे देवी! तुम्हारी भक्ति से मैं अति प्रसन्न हूं, जो वर मांगना चाहते हो! मांगो। तुम्हारी हर मनोकामना अवश्य पूरी होगी। उस समय सेठ धर्मपाल की पत्नी ने संतान प्राप्ति की कामना की। माता पार्वती ने संतान प्राप्ति का वरदान दिया। हालांकि, संतान अल्पायु था। एक वर्ष पश्चात, धर्मपाल की पत्नी ने पुत्र को जन्म दिया। जब पुत्र का नामकरण किया गया, तो उस समय धर्मपाल ने माता पार्वती के वचन से ज्योतिष को अवगत कराया। तब ज्योतिष ने सेठ धर्मपाल को पुत्र की शादी मंगला गौरी व्रत करने वाली कन्या से करने की सलाह दी। ज्योतिष के वचनानुसार, सेठ धर्मपाल ने अपने पुत्र की शादी मंगला गौरी व्रत करने वाली कन्या से की। कन्या के पुण्य प्रताप से धर्मपाल का पुत्र मृत्यु पाश से मुक्त हो गया।