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देवी लक्ष्मी के शाप के कारण श्रावण पूर्णिमा के दिन हुआ था भगवान विष्णु का यह अवतार
Wed, 17 Aug 2016 06:29 PM IST
राकेश्ा झा / टीम डिजिटल, अमर उजाला, दिल्ली।
राकेश्ा झा / टीम डिजिटल, अमर उजाला, दिल्ली।
Updated Wed, 17 Aug 2016 06:29 PM IST
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विष्णु
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एक समय की बात है कि भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी बैकुण्ठ में विराजमान थे। उस समय देवी लक्ष्मी के सुंदर रूप को देखकर भगवान विष्णु मुस्कुराने लगे। देवी लक्ष्मी को ऐसा लगा कि विष्णु भगवान उनके सौन्दर्य की हंसी उड़ा रहे हैं। देवी ने इसे अपना अपमान समझ लिया और बिना सोचे भगवान विष्णु को शाप दे दिया कि आपका सिर धड़ से अलग हो जाए।
देवी लक्ष्मी के शाप के कारण श्रावण पूर्णिमा के दिन हुआ था भगवान विष्णु का यह अवतार
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भगवान विष्णु
शाप का परिणाम यह हुआ कि एक बार भगवान विष्णु युद्ध करते हुए बहुत थक गए तो धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाकर उसे धरती पर टिका दिया और उस पर सिर लगाकर सो गए। कुछ समय बाद जब देवाताओं ने यज्ञ का आयोजन किया तो भगवान विष्णु को निद्रा से जगाने के लिए धनुष की प्रत्यंचा कटवा दिया। प्रत्यंचा कटते ही उसने भगवान विष्णु के गर्दन पर प्रहार हुआ और भगवान का सिर धड़ से अलग हो गया।
देवी लक्ष्मी के शाप के कारण श्रावण पूर्णिमा के दिन हुआ था भगवान विष्णु का यह अवतार
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हयग्रीव भ्ागवान
इसके बाद आदिशक्ति का देवताओं ने आह्वान किया। देवी ने बताया कि आप भगवान विष्णु के धड़ में घोड़े का सिर लगवा दें। देवताओं ने विश्वकर्मा के सहयोग से भगवान विष्णु के धड़ में घोड़े का सिर जोड़ दिया और यह अवतार हयग्रीव अवतार कहलाया।
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देवी लक्ष्मी के शाप के कारण श्रावण पूर्णिमा के दिन हुआ था भगवान विष्णु का यह अवतार
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हयग्रीव भ्ागवान
दरअसल देवी लक्ष्मी का शाप और इस अवतार के पीछे भगवान विष्णु की ही माया थी क्योंकि इस अवतार के जरिए भगवान विष्णु को एक बड़ा काम करना था।
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भगवान विष्णु
इस अवतार में भगवान विष्णु ने हयग्रीव नाम के ही एक दैत्य का वध किया जिसे देवी से यह वरदान प्राप्त हुआ था कि उसकी मृत्यु केवल उसी व्यक्ति के हाथों से हो सकती है जिसका सिर घोड़े का हो और शरीर मनुष्य का। इस तरह भगवान विष्णु का यह अवतार लेना सफल हुआ। भगवान विष्णु ने इस अवतार को लेकर हयग्रीव से वेदों को वापस लेकर ब्रह्मा जी को सौंपा।
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