कन्या श्रृष्टिसृजन श्रृंखला का अंकुर होती है। ये पृथ्वी पर प्रकृति स्वरुप मां शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं, जैसे श्वांस लिए बगैर आत्मा नहीं रह सकती वैसे ही कन्याओं के बिना इस श्रृष्टि की कल्पना भी नहीं की जा सकती। कन्या प्रकृति रूप ही हैं अतः वह सम्पूर्ण है।
Chaitra Navratri 2019 : अष्टमी - नवमी को पूजी जाएंगी कन्याएं, जानें पूजन मंत्र और विधि
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उम्र के अनुसार होता है कन्या का नाम
शास्त्रानुसार कन्या के जन्म का एक संवत (वर्ष) बीतने के पश्चात् कन्या को कुवांरी की संज्ञा दी गई है, अतः दो वर्ष की कन्या को कुमारी, तीन वर्ष की कन्या को अ+उ+म त्रिदेव-त्रिमूर्ति, चार वर्ष की कल्याणी, पांच वर्ष की रोहिणी, छह वर्ष की कालिका, सात वर्ष की चंडिका, आठ वर्ष की शाम्भवी, नौ वर्ष की दुर्गा और दस वर्ष की कन्या सुभद्रा के समान मानी जाती है।
धर्म ग्रंथों के अनुसार तीन वर्ष से लेकर नौ वर्ष की कन्याएं साक्षात् माता का स्वरूप मानी जाती है। दुर्गा सप्तशती में कहा गया है कि "कुमारीं पूजयित्या तू ध्यात्वा देवीं सुरेश्वरीम्" अर्थात् दुर्गापूजन से पहले कुवांरी कन्या का पूजन करने के पश्चात् ही माँ दुर्गा का पूजन करें।
जानें कितने साल की कन्या पूजा का क्या मिलता है फल
भक्तिभाव से की गई एक कन्या की पूजा से ऐश्वर्य, दो कन्या की पूजा से भोग, तीन की चारों पुरुषार्थ, और राज्यसम्मान, पांच की पूजा से बुद्धि-विद्या, छ: की पूजा से कार्यसिद्धि, सात की पूजा से परमपद, आठ की पूजा अष्टलक्ष्मी और नौ कन्या की पूजा से सभी ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
पुराण के अनुसार माता के ध्यान और पूजन का मंत्र इस प्रकार है —
मंत्राक्षरमयीं लक्ष्मीं मातृणां रूपधारिणीम्। नवदुर्गात्मिकां साक्षात् कन्यामावाहयाम्यहम्।।
जगत्पूज्ये जगद्वन्द्ये सर्वशक्तिस्वरुपिणि। पूजां गृहाण कौमारि जगन्मातर्नमोस्तु ते।।
।। कुमार्य्यै नम:, त्रिमूर्त्यै नम:, कल्याण्यै नमं:, रोहिण्यै नम:, कालिकायै नम:, चण्डिकायै नम:, शाम्भव्यै नम:, दुगायै नम:, सुभद्रायै नम:।।
कन्या पूजन विधि
कन्याओं का पूजन करते समय सबसे पहले उनके पैर धुलें। इसके बाद एक बार फिर पंचोपचार विधि से पूजन करें और तत्पश्चात् सुमधुर भोजन कराएं और प्रदक्षिणा करते हुए यथा शक्ति वस्त्र, फल और दक्षिणा देकर विदा करें।
इस तरह नवरात्र पर्व पर कन्या का पूजन करके भक्त माँ की कृपा पा सकते हैं।
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