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कृषि-बागवानी बजट: प्राकृतिक खेती के अधीन होगी 50 हजार एकड़ भूमि, पराला बनेगी आदर्श मंडी, जानें बड़ी घोषणाएं

Fri, 04 Mar 2022 09:58 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 04 Mar 2022 09:58 PM IST
सार

 बजट में बागवानी क्षेत्र के लिए 2022-23 में 540 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं कृषि क्षेत्र के लिए 2022-23 में 583 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सीएम ने बजट में घोषणा की कि बागवानी क्षेत्र में उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाने के लिए एक बागवानी नीति तैयार की जाएगी। 

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कृषि-बागवानी बजट हिमाचल। - फोटो : अमर उजाला

हिमाचल प्रदेश की जयराम सरकार ने बजट में बागवानी क्षेत्र के लिए 2022-23 में 540 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं कृषि क्षेत्र के लिए 2022-23 में 583 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सीएम ने बजट में घोषणा की कि बागवानी क्षेत्र में उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाने के लिए एक बागवानी नीति तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि स्वर्गीय सत्यानंद स्टोक्स व्यक्तित्व व योगदान के महत्व को ध्यान में रखते हुए उनकी कर्मभूमि शिमला जिला के कोटगढ़ थानाधार व आसपास के क्षेत्र को ‘सत्यानन्द स्टोक्स ट्रेल’ बनाया जाएगा।



इसका बहुआयामी स्वरूप बागवानी, पर्यटन व भाषा एवं संस्कृति विभागों के समन्वय से विकसित किया जाएगा। पराला मंडी को आदर्श मंडी के रूप में विकसित किया जा रहा है। फलों और सब्जियों के भंडारण की सुविधाओं में और अधिक बेहतरी के लिए इस मंडी में 60 करोड़ 93 लाख रुपये की लागत से पांच हजार मीट्रिक टन क्षमता का एक नया कोल्ड स्टोर स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही एक हजार 500 मीट्रिक टन क्षमता का फ्रीजिंग चैंबर, 10 मीट्रिक टन प्रति घंटा क्षमता की ग्रेडिंग पैकिंग लाइन और एक मीट्रिक टन प्रति घंटा क्षमता की आईक्यूएफ लाइन स्थापित की जाएगी।

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बागवानी। - फोटो : अमर उजाला
शिलारु व पालमपुर में दो उत्कृष्टता केंद्र
बागवानी विकास परियोजना के अंतर्गत शिलारु व पालमपुर में दो उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिसके लिए 18 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रास्तावित है। बागवानी क्षेत्र में चलाई जा रही विभिन्न लघु सिंचाई योजनाओं का निर्माण कार्य विभिन्न चरणों में है। 2022-23 में लगभग नौ हजार हेक्टेयर अतिरिक्त खेती युक्त भूमि में सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध करवा दी जाएंगी।इस पर 198 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
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पराला मंडी(फाइल) - फोटो : अमर उजाला

पराला की फल प्रसंस्करण इकाई में उत्पादन इस साल से
2022-23 के दौरान 91 करोड़ रुपये की लागत से पराला में बन रहे फल प्रसंस्करण इकाई में उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा व परवाणु और जड़ोल में स्थित फल प्रसंस्करण इकाई  का 17 करोड़ रुपये की लागत से उन्नयन किया जाएगा। इसके साथ ही पांवटा साहिब, कांगनी तथा शाट में बन रहे मार्केट यार्डस को सितंबर, 2022 तक किसानों व बागवानों को समर्पित कर दिया जाएगा। परवाणु में बन रहे मार्केट यार्ड को भी मार्च, 2023 से पहले पूरा कर लिया जाएगा। इन पर 35 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

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सेब - फोटो : अमर उजाला

यहां स्थानित होंगे सीए स्टोर
विभिन्न स्थानों परफल प्रसंस्करण इकाइयों के अतिरिक्त सीए स्टोर स्थापित किए जा रहे हैं। 58 करोड़ रुपये की लागत से चच्योट, रिकांगपिओ, ज्ञाबोंगऔर चंबा में सीए स्टोर का निर्माण 2022-23 में शुरू कर दिया जाएगा। इसके साथ ही रोहड़ू, गुम्मा, जड़ोल टिक्कर, टूटूपानी तथा भुंतर में बन रहे सीए स्टोर तथा ग्रेडिंग और पैकेजिंग हाउस में का इसी वर्ष लोकार्पण कर दिया जाएगा। इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 75 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।

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जामुन - फोटो : iStock

इम्युनिटी बूस्टर फसलों की शुरुआत होगी
उच्च घनत्व किस्मों का पौधरोपण और इम्युनिटी बूस्टर वाली फसलों की शुरुआत की जाएगी। जामुन और मेवों की खेती के लिए क्लस्टर बनाए जाएंगे। शिटाके और ढींगरी आदि मशरूम की किस्मों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए तथा मशरूम प्रसंस्करण और डिब्बाबंदी के लिए तीन करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। मधुमक्खी-वनस्पति के लिए विशेष वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा और भारतीय मधुमक्खियों की किस्मों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके लिए 4 करोड़ 50 लाख रुपये व्यय किए जाएंगे। फूलों की खेती का विस्तार करने के लिए आर्किड और सजावटी पौधों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। पुष्प क्रांति योजना के तहत 11 करोड़ रुपये व्यय किए जाने प्रस्तावित हैं।

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