मोनिका अग्रवाल
सपने तो हर एक के पास होते हैं। आपके पास भी होंगे। करियर का सपना! घर का सपना! कुछ हटके काम कर नाम कमाने का सपना या लोगों की मदद कर समाज के लिए भरोसेमंद चेहरा बन जाने का सपना! लेकिन क्या आपको पता है कि अगर आपके पास कोई सपना है तो आपको क्या करना चाहिए?
“सपने वो नहीं होते, जो नींद में देखे जाते हैं, सपने वो होते हैं, जो आपको सोने नहीं देते हैं।” यह प्रसिद्ध कथन भारत के ‘मिसाइल मैन’ एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का है, जो दुनिया के लाखों-करोड़ों लोगों को आज भी प्रेरणा देता है। यह केवल एक कथन नहीं है, बल्कि एक विचार है, जिसने लोगों को जिंदगी में नए सपने बुनने के लिए एक ऊंची उड़ान दी। इस कथन का सीधा-सा मतलब है कि जीवन को लेकर आपके ऐसे सपने होने चाहिए, जिन्हें पाने के लिए आप पूरी जी-जान लगा दें और तब तक प्रयास करती रहें, जब तक उनको पा न लें।
लेकिन नेहा की मां कुछ अलग ही सोच रखती हैं। “तुम्हें करियर के बारे में सोचने की क्या जरूरत है, शादी के बाद पति के सपने ही पत्नी के सपने बन जाते हैं। महिलाओं के सपने कभी भी परिवार से बड़े नहीं होने चाहिए।” अपनी मां के मुंह से यह शब्द सुनते ही नेहा ने कहा, “यह क्या कह रही हो आप, मम्मी? हर महिला के लिए यह जरूरी है कि वह अपने सपने खुद चुनें, न कि किसी और के सपने उसके सपने हों और वह किसी के दबाव में उन्हें चुनने को मजबूर न हो। हर किसी को अपने सपने देखने का अधिकार है।”
असल में बिल्कुल सही कहा नेहा ने, क्योंकि अक्सर माता-पिता, पति और रिश्तेदार दुनियादारी की पाठशाला में बच्चियों, युवतियों और महिलाओं को यही पाठ पढ़ाते हैं। लेकिन इन बातों के आगे हर महिला के लिए एक खुला संसार है, जहां वह अपने सपने देखने और उन्हें सच करने के लिए आजाद है। बस जरूरत है तो पूरी हिम्मत और विश्वास के साथ कदम आगे बढ़ाने, सपने देखने और उन्हें सच करने की जिद रखने की।
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महिलाओं के सपने
- फोटो : Istock
सोचो कुछ बड़ा
“पापा, लोग क्यों कहते हैं कि बड़े सपने मत देखो। क्या सपने देखना गलत है?” शिखा ने जैसे ही यह सवाल अपने पापा मिस्टर नारंग से किया तो उन्होंने कहा, “बिल्कुल गलत नहीं है। जो बड़े सपने देखते हैं, वही उन्हें पूरा भी करते हैं। इसलिए हमेशा बड़े सपने देखो और जी-जान से उन्हें पाने की कोशिश में जुट जाओ, मेरी बच्ची।”
माना कि घर-परिवार के साथ ऐसा करना महिलाओं के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है, लेकिन इस का अपनी ताकत के रूप में इस्तेमाल करें। दरअसल, सपने कभी बड़े या छोटे नहीं होते, बल्कि यह हमारी सोच पर निर्भर करता है। इसलिए सोच और सपना, दोनों बड़े हों तो ही कामयाबी आपके कदम चूमेगी। अक्सर जो महिलाएं जीवन में कुछ कर गुजरने के सपने देखती हैं या आगे बढ़ने की महत्वाकांक्षाएं रखती हैं, उन्हें लोग गंभीरता से नहीं लेते।
माना जाता है कि ऐसा करना सिर्फ समय की बर्बादी है, लेकिन वास्तव में सपने आपके दिल की सच्चाई हैं। जिस दिन आप अपना लक्ष्य प्राप्त कर लेंगी, उस दिन दुनिया मान जाएगी कि आपका सपना आपका दृढ़ निश्चय था। यह आपको मुश्किलों का सामना करना सिखाएगा, आगे बढ़ना सिखाएगा और आपके अंदर आत्मविश्वास भी जगाएगा।
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आत्मविश्वास को बढ़ावा
“मैंने शौकिया तौर पर यह पापड़ और चिप्स का काम शुरू किया था, लेकिन देखो, आज कितने शहरों से मेरे पास ऑर्डर आ रहे हैं। मेरा शोहरत पाने का सपना सच हो गया”, मिसेज वर्मा ने अपनी पोती से कहा।
एक महिला जब सीमित दायरे के अंदर रह कर अपने सपनों का संसार बनाती है तो उसे आमतौर पर उसकी जिम्मेदारी का हिस्सा मान लिया जाता है। धीरे-धीरे जिम्मेदारियों का यह बोझ उसका आत्मसम्मान और आत्मविश्वास, दोनों तोड़ देता है। लेकिन जब आप अपना लक्ष्य तय करके उसे पाने के लिए सुई की नोक से लेकर पहाड़ तक की दूरी तय करेंगी तो इससे आपका आत्मविश्वास लौट आएगा। छोटी-छोटी बातें आपको जिंदगी का सबक सिखा जाएंगी। आप कुछ नया सीख पाएंगी और सीखा गया ज्ञान कभी व्यर्थ नहीं जाता।
कहते हैं न, आत्मनिर्भर होकर जीने का मजा ही कुछ और है। आप अपनी कमाई को जब अपने तरीके से खर्च करती हैं तो उसका आनंद कई गुना बढ़ जाता है। वर्किंग वुमन रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 70 फीसदी कामकाजी महिलाएं पति के साथ मिल कर घर का खर्च उठा रही हैं। इतना ही नहीं, 30 प्रतिशत महिलाएं तो अपनी आधी सैलरी घर के खर्च में ही लगा देती हैं। यह हिस्सेदारी न सिर्फ आपको सम्मान दिलाएगी, बल्कि आत्मविश्वास से भी भर देगी। इसलिए आप अपनी बनाई गईं दहलीज को लांघकर आगे बढ़ने का रास्ता खोजें और अपने पैरों पर खड़ी हों और अगर इससे आप अपने परिवार का आर्थिक स्तंभ बनती हैं तो और अच्छा है।
शांत और अच्छी सोच
“आपके सपने असल में आपकी इच्छाओं और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब हैं। एक उम्र के बाद अक्सर महिलाएं इस प्रतिबिंब की रोशनी देख नहीं पातीं। लेकिन ऐसी गलती आप न करें, मम्मी। आपको इस डांस प्रतियोगिता में जरूर जाना चाहिए। जिंदगी में खुद को बार-बार मौके देने में कोई बुराई नहीं है।” दीक्षा ने अपनी मम्मी को समझाया।
असल में, आप जितना बड़ा रिस्क लेंगी, उतनी ही आपकी हिम्मत और आत्मविश्वास बढ़ता जाएगा। ये दोनों ही जीवन के हर कदम में आपके काम आएंगे। आप हर बात और परिस्थिति को पॉजिटिव नजरिये से देखना सीख जाएंगी। सपने देखना बहुत ही बुनियादी बात है, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए अपनी पूरी क्षमता और मेहनत तथा समर्पण देना बहुत ही मुश्किल काम है। जब आप ऐसा करने में महारत हासिल कर लेंगी तो आपका व्यक्तित्व विकास खुद-ब-खुद होने लगेगा। आप परिस्थितियों को सुलझाने के लिए ज्यादा लचीलेपन से सोचना शुरू कर देंगी। आपको काम की प्लानिंग करना और अपने कमिटमेंट निभाना अपने आप आ जाएगा।
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जीने का उद्देश्य
अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, आठ में से हर एक महिला क्लीनिकल डिप्रेशन का शिकार होती है। डिप्रेशन से सबसे ज्यादा प्रभावित 25 से 44 साल की महिलाएं होती हैं। महिलाएं घर और परिवार की जिम्मेदारियों को अच्छी तरह निभाना ही अपने जीने का उद्देश्य मान लेती हैं, लेकिन यह सोच पूरी तरह से ठीक नहीं है। आमतौर पर गृहिणियों के कामों को बहुत ही कम महत्व दिया जाता है या उसे उनकी जिम्मेदारी समझ लिया जाता है, लेकिन यह कोई आसान काम नहीं है।
अहमदाबाद के भारतीय प्रबंधन संस्थान के एक अध्ययन के अनुसार, भारतीय महिलाएं हर दिन करीब 7.2 घंटे घर के अवैतनिक (बिना वेतन के) कार्यों में बिता देती हैं। यह समय किसी ऑफिस कार्यों के घंटों से कम नहीं हैं। वहीं गृहिणियों को कभी कोई छुट्टी अथवा ब्रेक भी नहीं मिलता है और तीज-त्योहारों तथा मेहमानों के आने पर ओवरटाइम के घंटे भी नहीं गिने जाते हैं। ऐसे में आप अपने काम के महत्व को पहले तो खुद समझें और उसके बाद दूसरों को भी समझाएं।
माना कि परिवार आपकी जिंदगी का एक अहम हिस्सा है, लेकिन पूरी जिंदगी नहीं। सबके सपने सच करने के चक्कर में आप खुद सपने देखना न भूलें। ध्यान रखें, उगते सूरज को ही सब नमन करते हैं। आपके सपने और महत्वाकांक्षाएं आपको वह एनर्जी देंगी, जिनके बल पर आप पूरी क्षमता के साथ दिल खोलकर जी सकती हैं। इससे आपको जो आत्मविश्वास मिलेगा, वह अमूल्य होगा। इसलिए अपने सपनों और रुचियों को समय दें। सपनों के माध्यम से ही आप अपनी आकांक्षाओं को और समाज की समस्याओं का हल निकालने के लिए नए-नए विचारों को उत्पन्न कर पाती हैं।
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