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Working Mothers: कामकाजी महिलाएं कैसे संभालें बच्चे? जानिए करियर और मातृत्व के बीच संतुलन बनाने का सही तरीका

Wed, 02 Aug 2023 01:40 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवानी अवस्थी Updated Wed, 02 Aug 2023 01:40 PM IST
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Tips For Working Mothers Balancing Career And Motherhood In Hindi
Working Mother - फोटो : istock

पूजा दास



Tips For Working Mothers: मृणाल एक मल्टीनेशनल कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट की पोस्ट पर काम करती हैं। परिवार में पति और दो बच्चे हैं। पति भी दूसरी कंपनी में अच्छे पद पर हैं और दोनों बच्चे अच्छे कॉलेज में पढ़ रहे हैं। जिंदगी पटरी पर अच्छी रफ्तार से दौड़ रही है। लेकिन क्या मृणाल के लिए इस मुकाम तक पहुंचना आसान था? इस सवाल का मृणाल हंसते हुए जवाब देती हैं, ''बिल्कुल नहीं! ऑफिस में मैनेजर को लगता है कि हमें काम सिर्फ उनके लिए करना है, जबकि परिवार और समाज को लगता है कि हमें घर और बच्चों को पहले देखना है।'' मृणाल बताती हैं कि बच्चों को पालना और ऑफिस, दोनों अलग-अलग काम हैं और दोनों ही कठिन हैं। एक मां का रोल निभाते हुए करियर में आगे बढ़ना है तो पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ के बीच संतुलन बनाना सबसे ज्यादा जरूरी है। लेकिन दोनों के बीच संतुलन बनाने का कोई एक नुस्खा नहीं है, क्योंकि हर स्त्री की परिस्थितियां और चुनौतियां अलग-अलग होती हैं।

आज की महिलाओं की स्थिति पहले की तुलना में काफी अलग है। कुछ पीढ़ियों पहले तक महिलाओं से चहारदीवारी के भीतर रहकर घर और बच्चों की देखभाल करने की अपेक्षा की जाती थी, लेकिन आज ऐसा नहीं है। महिलाएं घर से बाहर निकलकर न केवल काम कर रही हैं, बल्कि हर जगह अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभा रही हैं। महिलाएं मातृत्व और करियर, दोनों जगह मजबूती से आगे बढ़ रही हैं। मातृत्व हर महिला के लिए एक सुखद अहसास होता है, लेकिन कामकाजी महिलाओं के लिए चुनौती भरा। करियर को देखें तो बच्चे की चिंता, बच्चे को संभालें तो कार्यक्षमता में कमी और दोनों को संभालें तो खुद के लिए वक्त नहीं बचता। ऐसे में मातृत्व और करियर के बीच संतुलन बनाने का सही तरीका क्या है?

Tips For Working Mothers Balancing Career And Motherhood In Hindi
parenting - फोटो : istock

परिवार का समर्थन मिलना बहुत जरूरी

श्वेता 16 सालों से एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर रही हैं। काम के साथ वह अपने दो बच्चों की परवरिश भी अच्छी तरह से कर रही हैं। वह कहती हैं कि घर और ऑफिस के बीच संतुलन बनाने के लिए परिवार का समर्थन मिलना बहुत जरूरी है। अगर पार्टनर के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्य भी आपकी परेशानियां समझें और साथ दें तो यह रास्ता निश्चित तौर पर आसान हो जाता है। श्वेता याद करती हैं, 12 साल पहले जब वह पहली बार मां बनी थीं। वह मैटरनिटी लीव पर थीं और पूरे समय अपने बच्चे के साथ रहती थीं। जैसे-जैसे उनकी छुट्टियां खत्म होने की तारीख करीब आ रही थी, उनकी चिंता बढ़ती जा रही थी। बच्चे को घर पर छोड़ आठ घंटे के लिए ऑफिस जाने की बात सोच कर ही वह कांप जाती थीं।

श्वेता बताती हैं, ''मैं रोमांचित थी और खुशी से मातृत्व का आनंद ले रही थी। कई बार सोचती कि नौकरी छोड़ दूं। लेकिन निजी खर्चों के लिए पति पर निर्भर नहीं रहना चाहती थी।'' श्वेता के अनुसार, उनके माता-पिता भी नहीं चाहते थे कि वह नौकरी छोड़ें और उनकी पढ़ाई एवं डिग्रियां बेकार जाएं। वह आगे बताती हैं, ''मैंने सोचा कि सब कुछ छोड़कर घर बैठने का फैसला लेने से पहले एक बार कोशिश करनी चाहिए। हमने बच्चे की देखभाल के लिए एक हाउस हेल्प रखी। परिवार का साथ भी मिला। शुरुआती दिन संघर्ष और अपराध-बोध से भरे थे, लेकिन अगर आप शांत और मजबूत रहें तो भगवान आपके लिए दरवाजे खोल देते हैं।''

करियर को ऊंचाई तक ले जाने की गति थोड़ी धीमी ही सही, लेकिन श्वेता ने मातृत्व और करियर के बीच संतुलन बनाने की कोशिश जारी रखी और यही कारण है कि दूसरे बच्चे के जन्म के बाद वह इस बात पर दृढ़ थीं कि मैटरनिटी लीव समाप्त होने के बाद भी अपनी नौकरी नहीं छोड़ेंगी।

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Working Mother - फोटो : istock

कामकाजी मां के लिए चुनौतियां दोगुनी

करियर कोई भी हो, कामकाजी स्त्रियों के लिए एक ही समय में दोनों चीजों के बीच संतुलन बनाकर चलना आसान नहीं होता। 13 सालों से आईटी सेक्टर में पांव जमा कर रखने वाली रितु चार साल के बच्चे की मां हैं। वह कहती हैं कि किसी भी स्त्री के लिए मां बनना जीवन का सबसे खूबसूरत और सुखद अनुभव होता है, लेकिन मां बनने के बाद का सफर शायद किसी भी स्त्री के लिए आसान नहीं होता। इस सुखद अनुभव के साथ ढेरों जिम्मेदारियां और चुनौतियां आती हैं। अगर मां कामकाजी है तो उसकी चुनौतियां दोगुनी हो जाती हैं।

कामकाजी महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है अपनी अनुपस्थिति में बच्चे के लिए सुरक्षित जगह ढूंढना। अगर एक सुरक्षित और भरोसेमंद जगह की पुष्टि हो जाती है तो चीजें काफी हद तक आसान हो जाती हैं। हालांकि वह यह भी मानती हैं कि बच्चे के आने के बाद महिलाओं के दिमाग में कई चीजें एक साथ चलती हैं, जिसका असर उनके काम पर भी पड़ सकता है।

एक तरफ वह ऑफिस में किसी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के स्लाइड्स बना रही होती हैं तो वहीं दिमाग के एक कोने में चिंता लगी रहती है कि बच्चे ने खाना खाया होगा या नहीं। ऐसी स्थिति काम पर ध्यान केंद्रित करने की उनकी क्षमता को प्रभावित कर सकती है, जिससे कार्यकुशलता में कमी आ सकती है। कई बार अधिक क्षमता होने के बावजूद महिलाएं वैसे काम नहीं कर पाती, जितना वे कर सकती हैं और इसका प्रभाव निश्चित रूप से करियर पर पड़ता है। महिलाओं को व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन, दोनों में अक्सर बहुत-से बलिदान करने पड़ते हैं।

एक तरह के अपराध-बोध की भावना हर समय साथ चलती है। कई बार लगता है कि परिवार को समय नहीं दे पा रही हैं, कई बार ऑफिस के लिए समय कम लगता है तो कई बार खुद के लिए समय नहीं मिलता। कामकाजी महिलाओं को समय के अनुसार प्राथमिकता तय करना बेहद जरूरी है, तभी वे बच्चों और करियर, दोनों पर ध्यान देते हुए आगे बढ़ सकती हैं।

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Working Women - फोटो : Istock

समाज की कामकाजी माँ के लिए पूर्वनिर्धारित सोच
 
मां बनने के बाद कामकाजी महिलाओं के लिए एक अन्य सबसे बड़ी चुनौती है आस-पास के लोगों का आलोचनात्मक हो जाना। ऑफिस, घर, समाज हर जगह लोग पहले से ही उनके लिए एक सोच बना लेते हैं। कई बार ऑफिस में महिलाओं के लिए मां बनने के बाद पहले से ही एक सोच तैयार कर ली जाती है कि वे पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर रही हैं। फिर उन्हें वे अवसर और प्रमोशन नहीं दिए जाते, जो उनके सहयोगियों को दिए जाते हैं, या फिर अगर घर पर बच्चे बीमार हो जाएं तो उसका कारण भी मां का बच्चे पर पूरा ध्यान न देना ही माना जाता है। महिलाओं के प्रति ऐसी सोच बदले जाने की भी जरूरत है।

महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मातृत्व और करियर के बीच संतुलन बनाने का सबसे सही तरीका क्या है? इस सवाल का शायद कोई एक या तैयार जवाब नहीं हो सकता, क्योंकि हर महिला अलग है और उसकी परिस्थितियां भी अलग हैं। मातृत्व अपने आप में एक फुल टाइम जॉब है और इसी तरह करियर भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इन दो भूमिकाओं के बीच तालमेल बिठाना कभी न खत्म होने वाली चुनौती की तरह महसूस हो सकता है, लेकिन इस संघर्ष में आप अकेली नहीं हैं।

कई कामकाजी माताएं अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन के बीच सही संतुलन खोजने में संघर्ष कर रही हैं और अच्छी खबर यह है कि यह कर पाना संभव है। सही मानसिकता और समर्थन के साथ आप दोनों भूमिकाओं को सफलतापूर्वक प्रबंधित कर सकती हैं और दोनों में सफल हो सकती हैं।

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parenting tips - फोटो : pixabay

कैसे बनाएं संतुलन

अपराध-बोध न आए

हर दिन के हिसाब से प्राथमिकताएं तय करें और आगे बढ़ें। मसलन, अगर बच्चा बीमार है तो किसी दिन ऑफिस से जल्दी घर निकलने पर अपराध-बोध नहीं आना चाहिए कि आपने कम काम किया। अपना काम ईमानदारी और गुणवत्ता के साथ समय-सीमा से पहले पूरा करना जरूरी है। इसी तरह बिजनेस यात्रा पर जाने से आप बुरी मां नहीं बन जातीं।

दूसरों से मदद

कामकाजी मां एक सुपरवुमन होती है, लेकिन सुपरवुमन को भी समय-समय पर मदद की जरूरत होती है। इसलिए माता-पिता होने की जिम्मेदारियों को पार्टनर के साथ साझा करना शुरू करें। बच्चे की देखभाल करना माता-पिता, दोनों की जिम्मेदारी है। यदि आपको काम पर अधिक समय तक रुकना है तो बच्चे को संभालने के विकल्पों पर साथी से चर्चा करें। हो सकता है कि साथी अगले कुछ हफ्ते आपके और बच्चों के लिए रात का खाना तैयार करने को पहले घर आ सके।

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